
पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल जानलेवा हमला, 62 वर्षीय निहंग गिरफ्तार
सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ के गुरुद्वारा परिसर में कृपाण से हमला
62 वर्षीय जसपाल सिंह की हमलावर के रूप में पहचान
सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को मौके पर ही दबोचा
पूर्व डिप्टी सीएम के हाथ में चोट लगने की सूचना
हमले के कारण की नहीं हुई अधिकारिक पुष्टि
घटना के बाद राम रहीम, बेअदबी और पुलिस फायरिंग से जुड़े पुराने विवाद फिर चर्चा में
2024 में भी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी चली थी बादल पर गोली
संदीप बहल,
मुम्बई, dusrikhabar.com। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला होने से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मच गई। गुरुवार दोपहर करीब 1:45 बजे गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी मुकट परिसर में निहंग वेशभूषा में पहुंचे एक व्यक्ति ने कृपाण से बादल पर वार किया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हमलावर को पकड़ लिया। बादल के हाथ में मामूली चोट बताई गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। हमले की वास्तविक वजह और हमलावर की मंशा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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62 वर्षीय जसपाल सिंह ने किया हमला, मौके से गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, हमलावर की पहचान 62 वर्षीय जसपाल सिंह के रूप में हुई है। वह मूल रूप से पुणे का रहने वाला बताया जा रहा है और पेशे से वकील रहा है। जानकारी के मुताबिक, जसपाल पिछले करीब दो वर्षों से नांदेड़ के पास मुगत स्थित माता साहिब गुरुद्वारे में सेवा कर रहा था।
हमले के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे काबू कर लिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमले के पीछे व्यक्तिगत, धार्मिक या किसी अन्य तरह की वजह थी।
हमले के बाद फिर सामने आया सुखबीर बादल का पुराना विवादित अध्याय
नांदेड़ की घटना के बाद सुखबीर बादल से जुड़े पुराने धार्मिक और राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़ा विवाद, 2015 के बेअदबी मामले और बहिबल कलां तथा कोटकपूरा पुलिस फायरिंग प्रमुख हैं।
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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इन पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक या धार्मिक असहमति को हिंसा का आधार नहीं बनाया जा सकता।
राम रहीम प्रकरण ने कैसे बढ़ाया था विवाद?
मई 2007 में गुरमीत राम रहीम के सलाबतपुरा कार्यक्रम में पहनी गई वेशभूषा को लेकर सिख समुदाय के एक बड़े वर्ग में नाराजगी सामने आई थी। इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने राम रहीम के खिलाफ आदेश जारी किया था।
2015 में राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से माफी दिए जाने के फैसले ने पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। इस फैसले में तत्कालीन अकाली सरकार और सुखबीर बादल की भूमिका को लेकर सवाल उठे। विरोध के बाद यह माफी वापस ले ली गई थी।
अकाल तख्त ने सुखबीर बादल को क्यों दी थी धार्मिक सजा?
30 अगस्त 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक कदाचार के मामले में तनखैया घोषित किया था। बाद में उन्हें धार्मिक सजा के तौर पर विभिन्न गुरुद्वारों में सेवा करने, बर्तन साफ करने और पहरेदारी जैसी सेवाएं करने के निर्देश दिए गए।
उनसे जुड़े मामलों में राम रहीम को कथित माफी दिलाने की भूमिका, 2015 के बेअदबी मामलों में कार्रवाई और कोटकपूरा-बेहबल कलां पुलिस फायरिंग जैसे मुद्दे शामिल रहे। बहिबल कलां गोलीकांड में दो सिख प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी।
यह पहला हमला नहीं, 2024 में भी चली थी गोली
सुखबीर बादल पर यह पहला बड़ा हमला नहीं है। दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी उन पर गोली चलाने की कोशिश हुई थी। उस समय सुरक्षा कर्मी की तत्परता से हमलावर को काबू कर लिया गया था और बादल सुरक्षित बच गए थे।
नांदेड़ की घटना के बाद उनके पुराने विवाद फिर बहस का विषय जरूर बन गए हैं, लेकिन राम रहीम प्रकरण या अन्य पुराने विवादों का इस हमले से सीधा संबंध है, ऐसा साबित करने वाला कोई पुष्ट प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।
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