
हरियाली अमावस्या पर सोने के आभूषणों में सोहे सांवलिया सेठ…
हरियाली अमावस्या पर सांवलियाजी सेठ का स्वर्ण पोशाक से विशेष श्रृंगार
मंगला आरती से पहले ही दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें
मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
तेज बारिश के बावजूद भक्तों की आस्था नहीं दिखी कम
राम रसोड़े और विभिन्न सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद की व्यवस्था
सोनिया,
चित्तौड़गढ़, dusrikhabar.com। चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी सेठ मंदिर में हरियाली अमावस्या का पर्व श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर रहा। अमावस्या मेले में मध्यप्रदेश, गुजरात सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। विशेष अवसर पर भगवान सांवलियाजी का स्वर्ण पोशाक से भव्य श्रृंगार किया गया और उन्हें मालपुए का विशेष भोग अर्पित किया गया। दोपहर बाद तेज बारिश शुरू होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और मंदिर के बाहर दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
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मंगला आरती से पहले ही उमड़ने लगे श्रद्धालु
हरियाली अमावस्या को लेकर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ रही। सुबह 5 बजे मंगला आरती शुरू होने से पहले ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। बड़ी संख्या में भक्त पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे।
मंदिर परिसर में पूरे दिन ‘हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की‘ के जयकारे गूंजते रहे। महिलाएं भजन और मंगल गीत गाती नजर आईं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
सोने की पोशाक और फूलों से हुआ सांवलियाजी का विशेष श्रृंगार
हरियाली अमावस्या पर भगवान सांवलियाजी का विशेष श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। ओसरा पुजारी कमलेश वैष्णव और गोविंद वैष्णव ने भगवान को गंगाजल से स्नान कराया। इसके बाद उन्हें सोने से बनी विशेष पोशाक पहनाई गई।
भगवान के मस्तक पर केसर-चंदन का तिलक लगाया गया। गुलाब के फूलों के साथ नोटों की माला और तुलसी का गुच्छ भी अर्पित किया गया। मंदिर के मुख्य गर्भगृह से लेकर कॉरिडोर तक फूलों की लड़ियों और रंग-बिरंगे गुलदस्तों से आकर्षक सजावट की गई।
बारिश भी नहीं रोक पाई श्रद्धालुओं के कदम
दोपहर करीब 1 बजे के बाद तेज बारिश शुरू हुई। बारिश के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी जरूर हुई, लेकिन भक्त कतारों में डटे रहे। कई श्रद्धालु बारिश में भीगते हुए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
हालांकि, आसपास के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर बारिश का कुछ असर पड़ा, लेकिन मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह और आस्था बरकरार रही। देर शाम तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा।
मालपुए का भोग, भंडारों में श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
हरियाली अमावस्या के अवसर पर भगवान सांवलिया सेठ को मालपुए का विशेष भोग लगाया गया। इसके बाद नई धर्मशाला में ब्रह्मभोज और देवकी सदन धर्मशाला में महाप्रसादी का आयोजन हुआ।
मेले में आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सेवा कार्य किए। भादसोड़ा रोड पर राम रसोड़े लगाए गए, जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर चाय, पकौड़े, केले और अन्य फल भी नि:शुल्क वितरित किए गए।
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बाजारों में भी रही रौनक, सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
मंदिर के आसपास सजे बाजारों में भी दिनभर काफी चहल-पहल रही। पूजा सामग्री, प्रसाद, खिलौने और खान-पान की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बाल भोग प्रसाद लेने के लिए भी कतारें लगीं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी मेले से अच्छा कारोबार मिला।
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर मंडल और प्रशासन ने व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की। मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव और बोर्ड सदस्यों के निर्देशन में प्रशासनिक अधिकारी भूपेंद्र वसी ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
पुलिस ने संभाली यातायात व्यवस्था, कस्बे में वाहनों की एंट्री रोकी
मेले के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया। भदेसर डीवाईएसपी विनोद लखेरा और मंडफिया थाना प्रभारी रविंद्र सेन के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने मंदिर परिसर, बाजार और प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी।
भीड़ को देखते हुए कस्बे के बाहर पार्किंग की व्यवस्था की गई और अंदर वाहनों की एंट्री रोक दी गई। इससे मंदिर क्षेत्र में पैदल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिली और मेले की व्यवस्थाएं सुचारु बनी रहीं।
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