उदयपुर में मेडिकल चमत्कार: तीन भाई-बहनों ने जीती दुर्लभ जेनेटिक कैंसर से जंग, गीतांजली हॉस्पिटल ने रचा इतिहास

उदयपुर में मेडिकल चमत्कार: तीन भाई-बहनों ने जीती दुर्लभ जेनेटिक कैंसर से जंग, गीतांजली हॉस्पिटल ने रचा इतिहास

उदयपुर में तीन भाई-बहनों ने एक साथ जीती जेनेटिक कैंसर की जंग

जहां टूट गई थी आस, वहां गीतांजली हॉस्पिटल उदयपुर ने गढ़ा विश्वास

राजसमंद के एक ही परिवार के 3 भाई-बहनों में एड्रिनल व मेडुलरी थायराइड कैंसर

सर्जरी के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर 260/150 से अचानक गिरकर 60 तक पहुंचा

सोनिया

उदयपुर,dusrikhabar.com। जीवन जब सबसे कठिन परीक्षा लेता है, तब उम्मीद की एक किरण ही अंधेरे को दूर करने के लिए काफी होती है। राजस्थान के राजसमंद जिले के एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों के सामने जब दुर्लभ जेनेटिक कैंसर जैसी भयानक बीमारी खड़ी हुई, तो लगा जैसे सब कुछ बिखर जाएगा। लेकिन उदयपुर स्थित गीतांजली कैंसर सेंटर (Gitanjali Cancer Centre) के विशेषज्ञों की दूरदर्शिता, आपसी समन्वय और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक ने इस नामुमकिन से दिखने वाले मिशन को मुमकिन बना दिया। तीनों भाई-बहनों ने एक-एक करके न केवल इस जानलेवा बीमारी को हराया, बल्कि आज वे एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

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जब पहली बहन के सामने आई ‘उच्च जोखिम’ वाली चुनौती

इस संघर्ष की शुरुआत परिवार की एक बहन से हुई। उनके दोनों एड्रिनल ग्लैंड्स (Adrenal Glands) में 10 सेंटीमीटर से भी बड़े ट्यूमर पनप चुके थे। इसके कारण उनका रक्तचाप (Blood Pressure) खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा था और दिल पर भारी दबाव बन रहा था।

डॉ. राहुल सहलोत (एंडोक्राइनोलॉजिस्ट) के नेतृत्व में ऑपरेशन से पहले लगभग 10 दिनों तक मरीज का विशेष ‘एंडोक्राइन ऑप्टिमाइजेशन’ किया गया। इसके बाद डॉ. आशिष जाखेटीया (विभागाध्यक्ष व कैंसर सर्जन), डॉ. अजय यादव (कैंसर सर्जन) और डॉ. नवीन पाटीदार (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ) की टीम ने बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। सर्जरी के दौरान मरीज का बीपी 260/150 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा और ट्यूमर हटते ही गिरकर 60 रह गया। एनेस्थीसिया और सर्जिकल टीम के तालमेल ने मरीज को सुरक्षित बचा लिया।

इसके कुछ महीनों बाद फॉलोअप जांच में मेडुलरी थायराइड कैंसर का पता चला, जिसकी दूसरी सफल सर्जरी की गई। आज 3 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वे बिना किसी कीमोथेरेपी या रेडिएशन के पूरी तरह स्वस्थ हैं।

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जेनेटिक कड़ी का शक और भाई-बहन का सफल इलाज

चिकित्सकों ने तुरंत भांप लिया था कि यह बीमारी दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम (Multiple Endocrine Neoplasia / MEN Syndrome) से जुड़ी हो सकती है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार तुरंत जेनेटिक टेस्ट नहीं करवा सका, लेकिन कुछ समय बाद जब भाई के गले (थायराइड) में सूजन आई, तो समय रहते जांच कर मेडुलरी थायराइड कैंसर की पुष्टि की गई और सफल सर्जरी की गई।

इसके बाद परिवार की सबसे बड़ी बहन भी उपचार के लिए पहुंचीं। उनके गले में 8-9 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ थी जो लिम्फ नोड्स तक फैल चुकी थी और दोनों एड्रिनल ग्लैंड्स में भी ट्यूमर मौजूद थे। गीतांजली की विशेषज्ञ टीम ने चरणबद्ध तरीके से (Staged Surgery) पहले दोनों एड्रिनल ट्यूमर निकाले और फिर गले की गांठ का सफल ऑपरेशन किया।

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विशेषज्ञों की राय: समय पर जेनेटिक काउंसलिंग और स्क्रीन ही बचाव

डॉक्टरों के अनुसार, जब परिवार के किसी एक सदस्य में ऐसा दुर्लभ जेनेटिक कैंसर पाया जाता है, तो पूरे परिवार की स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग बेहद आवश्यक हो जाती है। एक ही छत के नीचे कैंसर सर्जरी, एंडोक्राइन मैनेजमेंट और क्रिटिकल केयर एनेस्थीसिया के बेहतरीन समन्वय ने इस चमत्कार को संभव बनाया।

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