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जयपुर-पूर्व जिला जज फंसे ठगी के मायाजाल में, 8 दिन में 2.50 करोड़ की ठगी, जज साहब को गिरफ्तारी की दी धमकी, क्या है राज…?

जयपुर-पूर्व जिला जज फंसे ठगी के मायाजाल में, 8 दिन में 2.50 करोड़ की ठगी, जज साहब को गिरफ्तारी की दी धमकी, क्या है राज…?

पूर्व जिला जज को डिजिटल अरेस्ट कर 8 दिन में ₹2.50 करोड़ की ठगी

CBI और RBI अफसर बनकर डराते रहे साइबर ठग

90 वर्षीय पूर्व जिला जज को आरोपियों ने खुद को CBI और RBI अफसर बताया

आरोपियों ने चैट और कॉल हिस्ट्री डिलीट करने के दिए निर्देश 

SBI मैनेजर की सतर्कता से PPF की रकम ट्रांसफर होने से बची

ज्योति नगर थाने में BNS और IT एक्ट के तहत FIR दर्ज 

विजय श्रीवास्तव, 

जयपुर, dusrikhabar.com। जयपुर में साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को हवाला लेनदेन के मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी और RBI मैनेजर बताया और जांच के नाम पर 8 दिन में 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का सिलसिला तब रुका, जब SBI के एक बैंक मैनेजर को PPF खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने पर शक हुआ।

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वॉट्सऐप वीडियो कॉल से शुरू हुआ डर का खेल

मामले की रिपोर्ट पूर्व जज के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत ने ज्योति नगर थाने में दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार, लालकोठी निवासी 90 वर्षीय गणपत सिंह भण्डारी को 28 जुलाई को वॉट्सऐप वीडियो कॉल आया।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और खुद को मुंबई CBI का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन की जांच चल रही है और इसमें 40 लाख रुपए पूर्व जज के SBI खाते में आने की बात कही।

आरोपियों ने कथित तौर पर गिरफ्तारी और मुंबई ले जाने का डर दिखाया। साथ ही परिवार के किसी सदस्य को जानकारी नहीं देने की चेतावनी दी गई।

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RBI अधिकारी बनकर मांगी वित्तीय जानकारी

इसके कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल कर खुद को RBI मैनेजर बताया। उसने हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने का दावा करते हुए पीड़ित से उनकी आर्थिक स्थिति और निवेश से जुड़े दस्तावेज मांगे।

डर के माहौल में पीड़ित ने आरोपियों को म्यूचुअल फंड सहित अन्य वित्तीय दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा दी। इसके बाद कथित तौर पर जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

हर कॉल के बाद चैट और कॉल हिस्ट्री डिलीट करवाते थे

साइबर ठगों ने कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट का दबाव बनाए रखने के लिए हर बातचीत के बाद वॉट्सऐप चैट, कॉल हिस्ट्री और मैसेज डिलीट करने के निर्देश दिए। भय के कारण पीड़ित ने ऐसा किया, जिसके चलते परिवार को भी काफी समय तक ठगी की जानकारी नहीं हो सकी।

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PPF की रकम बचाने में बैंक मैनेजर की सतर्कता बनी अहम कड़ी

ठगों ने इसके बाद पीड़ित को PPF खाते की रकम भी ट्रांसफर करने के लिए कहा। बुधवार को जब वह SBI की जौहरी बाजार शाखा पहुंचे और PPF से रकम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो बैंक मैनेजर को संदेह हुआ।

पूछताछ में पूरा मामला सामने आने के बाद बैंक मैनेजर ने ट्रांजैक्शन रुकवा दिया और पीड़ित को साइबर ठगी के बारे में बताया। इसके बाद भांजे को बुलाया गया और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

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BNS और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज

ज्योति नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर BNS 2023 की धारा 318(4), 319(2) और IT एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक खातों में हुए लेनदेन, कॉलिंग नंबरों और आरोपियों की पहचान से जुड़े सुराग जुटा रही है।

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