
राजस्थान विश्वविद्यालय में अब सरस का स्वाद, कैंपस में ही दूध-छाछ-लस्सी से लेकर आइसक्रीम तक का स्वाद
विश्वविद्यालय परिसर में सरस के दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन और आइसक्रीम सहित कई उत्पाद मिलेंगे
सरस के उत्पादों के साथ दुग्ध उत्पादक किसानों को भी मिलेगा बड़ा बाजार
विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार को परिसर में ही खरीदारी की सुविधा
सरस के वितरण एवं विपणन नेटवर्क को और विस्तार मिलेगा
बढ़ते बाजार से प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद
सहकारी डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ाई और शोध के बीच अब विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण दुग्ध एवं डेयरी उत्पादों के लिए परिसर से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। जयपुर डेयरी की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में नए सरस पार्लर की शुरुआत की गई है। यहां दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क और मिठाइयों सहित सरस के विभिन्न उत्पाद उपलब्ध रहेंगे।
सरस पार्लर का उद्घाटन आरसीडीएफ की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज, राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा, रजिस्ट्रार कालूराम और जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
कैंपस में सुविधा, युवाओं के लिए पौष्टिक विकल्प
राजस्थान विश्वविद्यालय जैसे बड़े शिक्षण संस्थान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी आते हैं। ऐसे में परिसर में ही शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य एवं डेयरी उत्पाद उपलब्ध होना रोजमर्रा की जरूरत को आसान बनाएगा।
आरसीडीएफ की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में सरस उत्पादों की उपलब्धता और विपणन नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की सहज उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरस केवल एक डेयरी ब्रांड नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे और प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों से जुड़ी सहकारी व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
सरस पार्लर से किसानों को भी मिलेगा फायदा
इस पहल का लाभ केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। सरस पार्लरों का बढ़ता नेटवर्क प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए भी बाजार का विस्तार करेगा।
श्रुति भारद्वाज ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों सहित अधिकाधिक सार्वजनिक स्थानों पर सरस पार्लर और आउटलेट स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
राजस्थान विश्वविद्यालय में शुरू हुआ यह पार्लर इसी अभियान का हिस्सा है। जितनी अधिक जगहों पर सरस उत्पाद पहुंचेंगे, उतना ही व्यापक बाजार दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा।
विश्वविद्यालय ने भी पहल को बताया उपयोगी
राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा ने सरस पार्लर की शुरुआत का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादों की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सुविधा है।
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उन्होंने जयपुर डेयरी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और डेयरी के बीच भविष्य में सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है। रजिस्ट्रार कालूराम ने कहा कि पार्लर की स्थापना विश्वविद्यालय परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की गई है। अब विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को परिसर में ही सरस के विभिन्न उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे।
दूध, दही, घी से लेकर आइसक्रीम और मिठाइयां तक
जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित सरस पार्लर में उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार उत्पाद उपलब्ध करवाए जाएंगे। यहां प्रमुख रूप से सरस दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा मांग के अनुसार अन्य उपयोगी खाद्य उत्पाद भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरस पार्लरों का विस्तार उपभोक्ता सुविधा और दुग्ध उत्पादक किसानों—दोनों को जोड़ने वाली पहल है। इससे सहकारी डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों के दूध के लिए निरंतर और व्यापक बाजार तैयार होगा।
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एक विद्यार्थी के लिए यह सिर्फ एक नया पार्लर नहीं, बल्कि कैंपस की रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा और आसान बनाने वाली सुविधा है। पढ़ाई के लंबे समय के बीच दूध, दही, फ्लेवर्ड मिल्क या आइसक्रीम के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी। दूसरी ओर, इस छोटे से आउटलेट का संबंध प्रदेश के उन दुग्ध उत्पादक परिवारों से भी है, जिनकी आजीविका दूध की बिक्री पर निर्भर है। इस लिहाज से विश्वविद्यालय परिसर में खुला सरस पार्लर उपभोक्ता सुविधा और किसान की आय—दोनों को जोड़ने वाली पहल बनकर सामने आता है।
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