Visitors: 6918107
राजमहल से निकली शाही परंपरा; पीढ़ियां बदलीं, दौर बदले, मगर नहीं बदली “तीज माता” के प्रति जयपुर की आस्था

राजमहल से निकली शाही परंपरा; पीढ़ियां बदलीं, दौर बदले, मगर नहीं बदली “तीज माता” के प्रति जयपुर की आस्था

जयपुर की गलियों से अमेरिका तक गूंजे तीज माता के जयकारे

पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने की आरती

जनानी ड्योढ़ी में राजपरिवार की महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

राजसी परंपरा और लोककला का अद्भुत संगम

175 कलाकारों ने सजाया सांस्कृतिक कारवां

डिजिटल प्रसारण से प्रवासी राजस्थानियों ने किए तीज के दर्शन

RANA के माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे राजस्थानियों ने देखी शाही सवारी

सोशल मीडिया के जरिए देश-विदेश के दर्शकों तक पहुंचा जयपुर का तीज उत्सव

विजय श्रीवास्तव, 

जयपुर, dusrikhabar.com। तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जयपुर की सांसों में रची-बसी ऐसी परंपरा है, जो पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ती है। शनिवार शाम जब त्रिपोलिया गेट से तीज माता की शाही सवारी निकली तो गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक गलियां लोकगीतों, ढोल-नगाड़ों, जयकारों और राजसी लवाजमे से गूंज उठीं। यह दृश्य सिर्फ जयपुरवासियों के लिए उत्सव नहीं था, बल्कि राजस्थान की संस्कृति का ऐसा जीवंत प्रदर्शन था, जिसकी तस्वीरें और सवारी की झलक समुद्र पार अमेरिका में बसे राजस्थानियों तक भी पहुंची।

सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार की महिला सदस्यों ने तीज माता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद तीज माता की पालकी शाही लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट पहुंची, जहां पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने आरती की। आरती के बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। छोटी चौपड़ पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी और जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने तीज माता की महाआरती की।

read also:कैसा रहेगा आपका आज, क्या कहता है भाग्यांक? 16 अगस्त, रविवार, 2026

जनानी ड्योढ़ी से निकली आस्था, त्रिपोलिया गेट पर दिखी राजसी परंपरा

तीज माता की शाही सवारी की शुरुआत में जनानी ड्योढ़ी में राजपरिवार की महिला सदस्यों ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद पालकी को शाही लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट लाया गया। यहां पद्मनाभ सिंह द्वारा तीज माता की आरती किए जाने के साथ सवारी ने नगर भ्रमण शुरू किया। त्रिपोलिया गेट से छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक रास्ते के दोनों ओर लोगों की भीड़ उमड़ती रही। झरोखों, हवेलियों और महलों की अटारियों से तीज माता की सवारी निहारते लोग जयपुर की उस पुरानी तस्वीर को जीवंत कर रहे थे, जिसमें उत्सव और शहर की विरासत एक-दूसरे के साथ चलते हैं।

जयपुर की गलियों से अमेरिका तक गूंजे तीज माता के जयकारे, पूर्व राजपरिवार सदस्य पद्मनाभ सिंह ने की आरती, राजसी ठाठ-बाठ से निकली तीज माता की सवारी...

पूर्व राजपरिवार सदस्यों ने की तीज माता की आरती, राजसी ठाठ-बाठ से निकली तीज माता की सवारी…

175 लोक कलाकारों ने राजस्थान के हर रंग को किया जीवंत

शाही सवारी का सबसे आकर्षक पक्ष रहा राजस्थान की लोककलाओं का विराट प्रदर्शन। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 175 लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सवारी को सांस्कृतिक कारवां में बदल दिया। सवारी में इन लोक विधाओं की रंगारंग प्रस्तुतियों ने राजस्थान की लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा के दर्शन कराए। कलाकारों ने कच्ची घोड़ी, कालबेलिया, चरी नृत्य, घूमर, चंग और ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली, बहुरूपिया जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुतियां हुईं।

घोड़ों और ऊंटों से सजा शाही लवाजमा इस पूरे दृश्य को राजसी भव्यता प्रदान कर रहा था। लोकगीतों की धुन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की आवाज के बीच ऐसा लग रहा था मानो जयपुर की ऐतिहासिक गलियां कुछ समय के लिए अपने पुराने दौर में लौट आई हों।

read also:120 साल की विरासत, नए भारत की जिम्मेदारी: इंडियन बैंक ने राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास का संकल्प दोहराया

बालिकाओं की तलवारबाजी ने बताया—परंपरा के साथ शौर्य भी

तीज की शृंगार और भक्ति से भरी परंपरा के बीच शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन कर आयोजन में नया रंग भर दिया। बालिकाओं का यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि राजस्थान की वीर परंपरा और महिला शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया। तीज माता की सवारी में जहां लोक संस्कृति और आस्था दिखाई दी, वहीं तलवारों की चमक ने राजस्थान के शौर्य की याद भी दिलाई।

छोटी चौपड़ पर महाआरती, गणगौरी बाजार में पुष्पवर्षा

शाही सवारी के छोटी चौपड़ पहुंचने पर महाआरती की गई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी और जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने तीज माता की महाआरती की। जेल बैंड और आरएसी बैंड की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भव्य बना दिया। वहीं जयपुर व्यापार महासंघ की ओर से तीज माता पर पुष्पवर्षा की गई। इसके बाद सवारी गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची, जहां कला मेले और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उत्सव को आगे बढ़ाया।

जयपुर की गलियों से अमेरिका तक गूंजे तीज माता के जयकारे, पूर्व राजपरिवार सदस्य पद्मनाभ सिंह ने की आरती, राजसी ठाठ-बाठ से निकली तीज माता की सवारी...

राजसी ठाठ-बाठ से निकली तीज माता की सवारी… 

जब जयपुर की तीज पहुंची अमेरिका तक

इस वर्ष तीज उत्सव की सबसे खास बात यह रही कि जयपुर की शाही सवारी परकोटे की सीमाओं से बाहर निकलकर डिजिटल माध्यम से विदेशों तक पहुंची। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे प्रवासी राजस्थानियों ने शाही सवारी का लाइव प्रसारण देखा।

यानी जयपुर की वही तीज, जिसे कभी केवल परकोटे की गलियों और झरोखों से देखा जाता था, अब डिजिटल तकनीक के माध्यम से हजारों किलोमीटर दूर बैठे राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि की संस्कृति से जोड़ रही थी। परंपरा वही रही, लेकिन उसे देखने का माध्यम बदल गया।

read also:एक बीज से जंगल तक… गीतांजली उदयपुर की ‘बीजोत्सव 2.0’ पहल से हरित भविष्य की उम्मीद!

13 जगहों पर एलईडी स्क्रीन से शहरभर में हुए तीज माता के दर्शन

परकोटे से बाहर रहने वाले जयपुरवासियों को भी शाही सवारी से जोड़ने के लिए शहर के 13 प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गईं। इनमें अजमेरी गेट, न्यू गेट, सरावगी मेंशन, मोती डूंगरी, त्रिमूर्ति सर्किल, रामबाग सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, महाराजा कॉलेज, बिरला मंदिर, राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान कॉलेज, ओटीएस चौराहा और जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट शामिल रहे। इन स्क्रीन के माध्यम से लोगों ने तीज माता की शाही सवारी के लाइव दर्शन किए।

सोशल मीडिया ने जोड़ा नई पीढ़ी को परंपरा से

पर्यटन विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शाही सवारी की लाइव स्ट्रीमिंग की गई। दिल्ली से आए सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने जयपुर के तीज उत्सव का अनुभव किया और इसकी झलकियां अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा कीं। यह पहल खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि लोक परंपराओं को नई पीढ़ी और दुनिया के डिजिटल दर्शकों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया अब एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

आसमान से हुई पुष्पवर्षा, झरोखों से बरसी आस्था

शाही सवारी के दौरान ड्रोन के माध्यम से पुष्पवर्षा की गई। सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों के साथ-साथ महलों, हवेलियों और झरोखों से भी लोग तीज माता की पालकी के दर्शन करते रहे। देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए भी सवारी देखने की विशेष व्यवस्थाएं की गईं। इससे तीज का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप पर्यटन के आकर्षण से भी जुड़ता नजर आया।

तीज की सबसे बड़ी खूबसूरती—परंपरा बदलती है, पहचान नहीं

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, तीज माता की शाही सवारी जयपुर की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें आस्था, लोककला, संगीत, शौर्य और राजसी विरासत एक साथ दिखाई देती है। इस बार डिजिटल माध्यम के जरिए आयोजन को व्यापक दर्शक वर्ग से जोड़ने का प्रयास किया गया।

read also:धौलपुर में 100 पर्यटक झरने-नाले के बहाव में फंसे: भरतपुर में बंध बारेठा डैम का गेट खोला; 2 दिन बारिश का अलर्ट नहीं, 19 से बदलेगा मौसम

वास्तव में इस बार की तीज ने यही संदेश दिया कि समय बदल सकता है, तकनीक बदल सकती है और उत्सव देखने का तरीका बदल सकता है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ी परंपराएं लोगों के दिलों में बनी रहती हैं।

जयपुर की गलियों में गूंजते तीज के लोकगीतों से लेकर अमेरिका में बैठे प्रवासी राजस्थानियों तक पहुंची इसकी लाइव तस्वीरों ने साबित किया कि संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती।

————————————    

#Jaipur Teej, #Teej Mata, #Teej Procession, #Jaipur Royal Family, #Diya Kumari, #Padmanabh Singh, #Manju Sharma, #Rajasthan Tourism, #Folk Culture, #Rajasthan’s Heritage, #Jaipur Festival, #Teej Festival 2026, जयपुर तीज 2026, तीज माता की शाही सवारी, जयपुर तीज उत्सव, तीज सवारी जयपुर, त्रिपोलिया गेट तीज सवारी, दिया कुमारी तीज, पद्मनाभ सिंह तीज, जयपुर राजपरिवार, राजस्थान लोक संस्कृति, जयपुर पर्यटन, Rajasthan Teej Festival 2026

CATEGORIES
TAGS
Share This