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जयपुर में RAS अफसर का पीए को 1लाख रुपए की रिश्वत लेते एसीबी ने दबोचा, घर से लाखों कैश और सोना बरामद

जयपुर में RAS अफसर का पीए को 1लाख रुपए की रिश्वत लेते एसीबी ने दबोचा, घर से लाखों कैश और सोना बरामद

जयपुर में भ्रष्टाचार पर एसीबी का बड़ा प्रहार

जयपुर एडीएम ईस्ट नरेंद्र कुमार वर्मा (RAS) के पीए मुकेश चौधरी को ₹1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

परीक्षा लॉजिस्टिक के ₹16-17 लाख के बिल पास कराने के बदले मांगा 10% कमीशन

आरोपी के घर से ₹10.68 लाख नकद, 100 ग्राम सोना और 100 ग्राम चांदी बरामद

आरोपी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी सेवा में आया था

शुरुआती जांच में लैपटॉप खरीदने के नाम पर रिश्वत मांगने की बात, जांच जारी 

महावीर,

जयपुर, dusrikhabar.com। राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एडीएम ईस्ट (RAS) के पीए को ₹1 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी के घर पर हुई तलाशी में ₹10.68 लाख नकद, 100 ग्राम सोना और 100 ग्राम चांदी के आभूषण भी बरामद हुए। यह मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, जहां सरकारी भुगतान के लिए भी कथित तौर पर कमीशन की मांग की जाती है।

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सरकारी बिल पास कराने के नाम पर मांगी गई रिश्वत

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, एडीएम ईस्ट (RAS) नरेंद्र कुमार वर्मा के निजी सहायक मुकेश चौधरी ने परीक्षा संबंधी लॉजिस्टिक कार्य के बिल पास कराने के बदले परिवादी से करीब ₹1.50 लाख की रिश्वत मांगी थी।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर बुधवार दोपहर करीब 2 बजे जयपुर कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की गई। जैसे ही आरोपी ने ₹1 लाख की रिश्वत ली, एसीबी टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

जयपुर एडीएम ईस्ट नरेंद्र कुमार वर्मा (RAS) के पीए मुकेश चौधरी को ₹1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

जयपुर एडीएम ईस्ट नरेंद्र कुमार वर्मा (RAS) के पीए मुकेश चौधरी को ₹1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

घर की तलाशी में मिला कैश और सोना, बढ़ीं जांच की परतें

गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी के घर पर भी तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान वहां से 10 लाख 68 हजार रुपए नकद, 100 ग्राम सोना और 100 ग्राम चांदी के आभूषण भी बरामद किए गए। 

बताया जा रहा है कि मुकेश चौधरी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद इस सरकारी पद पर नियुक्त हुआ था। अब एसीबी उसकी आय और संपत्ति के स्रोतों की भी जांच कर रही है।

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16 से 17 लाख के बिल पास कराने के लिए मांगा था 10 प्रतिशत कमीशन

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग ने बताया कि हाल ही में आयोजित फॉरेस्टर और ग्रेड सेकंड शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के दौरान परिवादी की 80 से 100 गाड़ियां लॉजिस्टिक सपोर्ट में लगी थीं। इन वाहनों का उपयोग प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और वापस एडीएम कार्यालय लाने में किया गया था।

इस कार्य के करीब ₹16 से ₹17 लाख के बिल पास होने थे। आरोप है कि इन्हें मंजूर कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन, यानी लगभग ₹1.50 लाख की मांग की गई। बाद में यह सौदा ₹1 लाख में तय हुआ।

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ऊपर तक पैसा देना पड़ता हैकहकर करता था रिश्वत की मांग

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी रिश्वत मांगते समय कथित तौर पर कहा करता था कि पैसा ऊपर अधिकारियों तक देना होता है, व्यवहार अपनी जगह और काम अपनी जगह।” हालांकि एसीबी इस दावे की स्वतंत्र जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में आरोपी अकेला था या रिश्वत के इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे।

लैपटॉप खरीदने के नाम पर मांगी जा रही थी घूस

एसीबी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी लैपटॉप खरीदने के लिए रिश्वत की रकम मांग रहा था। अब जांच एजेंसी तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाएगी कि क्या रिश्वत की राशि केवल आरोपी के लिए थी या किसी बड़े नेटवर्क तक पहुंचनी थी।

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रिश्वत व्यवस्था पर भरोसा तोड़ती है, ईमानदार लोगों का मनोबल भी गिराती है

यह मामला केवल एक सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं है। जब किसी व्यापारी या सेवा प्रदाता को अपने वैध बिल का भुगतान पाने के लिए रिश्वत देने का दबाव झेलना पड़े, तो सबसे अधिक नुकसान व्यवस्था पर जनता के विश्वास का होता है।

जो लोग नियमों के तहत काम करते हैं, उनके सामने ऐसी परिस्थितियां आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव पैदा करती हैं। दूसरी ओर, एसीबी की त्वरित कार्रवाई यह संदेश भी देती है कि शिकायत करने का साहस भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार बन सकता है।

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