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राजस्थान के कपड़े को दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी, टेक्सटाइल उद्योग में रोजगार और नए बाजारों की उम्मीद

राजस्थान के कपड़े को दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी, टेक्सटाइल उद्योग में रोजगार और नए बाजारों की उम्मीद

राजस्थान के टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

2030 तक भारत के 100 बिलियन डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में राजस्थान की प्रभावी भागीदारी

राज्य का कुल वस्तु निर्यात 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक

टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स की निर्यात में करीब 12.9% हिस्सेदारी

कारीगरों और पारंपरिक हुनर को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योजना

नए FTA से टेक्सटाइल निर्यात को मिलने वाले संभावित लाभ पर विचार

उद्योग की समस्याओं और सुझावों के लिए टेक्सटाइल टास्क फोर्स गठित

नवीन सक्सेना

जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान के कपड़ों, पारंपरिक हुनर और आधुनिक टेक्सटाइल उद्योग को अब सिर्फ देश के बाजार तक सीमित रखने के बजाय दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी हो रही है। जयपुर के उद्योग भवन में हुई राउंड टेबल चर्चा में सरकार, उद्यमियों, डिजाइनरों और टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने इस बात पर मंथन किया कि राजस्थान में बनने वाले उत्पादों में मूल्य संवर्धन, डिजाइन, ब्रांडिंग और निर्यात को कैसे बढ़ाया जाए।

इस पहल का असर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। टेक्सटाइल से जुड़े कारीगरों, छोटे उद्यमियों, डिजाइनरों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए भी वैश्विक बाजार नए अवसर खोल सकता है।

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कपड़े से कारोबार तक, राजस्थान की बड़ी संभावनाएं

राजस्थान लंबे समय से टेक्सटाइल, हस्तशिल्प और परिधान उत्पादन के लिए जाना जाता है। अब सरकार की कोशिश इस ताकत को अंतरराष्ट्रीय कारोबार में बदलने की है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई चर्चा में निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ उद्योग की मौजूदा चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार किया गया।

राजस्थान का कुल वस्तु निर्यात 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है, जिसमें टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी करीब 12.9 प्रतिशत है।

कच्चा माल बाहर से कम आए, राजस्थान में ज्यादा बने तैयार उत्पाद

बैठक में एक अहम मुद्दा टेक्सटाइल उद्योग के कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करना रहा। उद्योग प्रतिनिधियों ने राज्य में उत्पादन और मूल्य संवर्धन बढ़ाने की जरूरत बताई। इसका सीधा अर्थ यह है कि राजस्थान में सिर्फ कच्चा माल तैयार करने के बजाय उसे यहीं प्रोसेस कर बेहतर और ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों में बदला जाए। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

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नीतियों के सहारे वैश्विक बाजार तक पहुंचने की कोशिश

राजस्थान सरकार ने टेक्सटाइल और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू की हैं। इनमें राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025, राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2024, राजस्थान एमएसएमई पॉलिसी-2024, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पॉलिसी-2024 और विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन पॉलिसी शामिल हैं। सरकार के अनुसार इन नीतियों का उद्देश्य उद्योगों को निवेश, उत्पादन और बाजार विस्तार के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।

कारीगरों के हुनर को मिले बाजार, डिजाइन से जुड़े नए अवसर

राजस्थान की पहचान सिर्फ मिलों और बड़े टेक्सटाइल उद्योगों से नहीं है। यहां पीढ़ियों से हस्तशिल्प, पारंपरिक कपड़ा निर्माण, प्रिंटिंग और डिजाइन से जुड़े कारीगर भी हैं। राउंड टेबल में पारंपरिक कारीगरों की क्षमता बढ़ाने और डिजाइन संस्थानों तथा उद्योगों के बीच सहयोग मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अगर पारंपरिक हुनर को आधुनिक डिजाइन, तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाता है, तो स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को देश से बाहर नए ग्राहक और नए बाजार मिल सकते हैं।

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युवा डिजाइनरों और उद्यमियों के लिए भी खुल सकता है नया रास्ता

टेक्सटाइल उद्योग में अब केवल उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है। नए डिजाइन, बदलती वैश्विक पसंद, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार बाजार में सफलता के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। बैठक में डिजाइनरों और उद्योग प्रतिनिधियों ने वैश्विक मांग के अनुरूप नए उत्पाद विकसित करने और डिजाइन संस्थानों तथा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के सुझाव दिए।

इससे राजस्थान के युवाओं के लिए फैशन, डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, ब्रांडिंग और निर्यात कारोबार में नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से राजस्थान के कपड़ों को क्या फायदा हो सकता है?

राउंड टेबल में हाल में लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) से टेक्सटाइल उद्योग को मिलने वाले संभावित लाभ पर भी चर्चा हुई। उद्योग जगत की दिलचस्पी इस बात में है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से राजस्थान में बने कपड़ों और परिधानों के लिए नए बाजार कैसे खोले जा सकते हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में जगह बनाने के लिए सिर्फ समझौते पर्याप्त नहीं होंगे। गुणवत्ता, कीमत, समय पर आपूर्ति, डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी उद्योगों को लगातार काम करना होगा।

टेक्सटाइल टास्क फोर्स करेगी उद्योग की समस्याओं की पहचान

सरकार ने उद्योग जगत के साथ संवाद बनाए रखने और समस्याओं की पहचान के लिए टेक्सटाइल टास्क फोर्स का गठन किया है। सरकार का लक्ष्य भारत के वर्ष 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में राजस्थान की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार सुविधाएं और अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। राउंड टेबल में मिले सुझावों की समीक्षा कर उन्हें नीति और कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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जयपुर की बैठक से निकला बड़ा सवाल—राजस्थान का हुनर दुनिया तक कैसे पहुंचे?

राउंड टेबल में राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. एस.एन. मोडानी, बायर एजेंट एसोसिएशन से मनोज राणा, डिजाइनर आशना वासवानी, हिम्मत सिंह, अनुज मूंदड़ा, फैशन डिजाइनिंग काउंसिल ऑफ राजस्थान से पुनीत खत्री, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन एवं मेटेक्सिल के एमडी शालीन तोषनीवाल तथा बीएमडी प्राइवेट लिमिटेड के प्रेसिडेंट संजय शर्मा ने विचार रखे।

इस चर्चा का असली महत्व केवल निर्यात के आंकड़ों में नहीं है। राजस्थान के लिए चुनौती यह है कि मिलों की उत्पादन क्षमता, छोटे उद्यमियों की मेहनत, डिजाइनरों की कल्पना और कारीगरों के पारंपरिक हुनर को एक साथ जोड़कर ऐसा उत्पाद तैयार किया जाए जिसे दुनिया पहचान सके।

अगर यह कड़ी मजबूत होती है तो राजस्थान का टेक्सटाइल क्षेत्र सिर्फ एक औद्योगिक सेक्टर नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार, स्थानीय हुनर और वैश्विक कारोबार को जोड़ने वाला बड़ा आर्थिक आधार बन सकता है।

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