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गीतांजली हॉस्पिटल में एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी की नई तकनीकों पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप

गीतांजली हॉस्पिटल में एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी की नई तकनीकों पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप

गीतांजली हॉस्पिटल की वर्कशॉप में बोटुलिनम टॉक्सिन आधारित एस्थेटिक प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण 

रेजिडेंट्स ने फेशियल असेसमेंट और ट्रीटमेंट प्लानिंग की बारीकियां सीखीं

हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग वर्कशॉप का प्रमुख आकर्षण रही

डॉ. कल्पना गुप्ता के मार्गदर्शन में हुई वर्कशॉप

सोनिया

उदयपुर,dusrikhabar.com। त्वचा विज्ञान में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल केवल चेहरे की खूबसूरती तक सीमित नहीं है, बल्कि सही तकनीक, चेहरे की संरचना की समझ और प्राकृतिक परिणाम के संतुलन से जुड़ा विषय भी है। इसी सोच के साथ गीतांजली हॉस्पिटल के डर्मेटोलॉजी विभाग की ओर से एडवांस्ड एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी और बोटुलिनम टॉक्सिन प्रक्रियाओं पर विशेष हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। प्रशिक्षण के दौरान पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में फेशियल असेसमेंट से लेकर ट्रीटमेंट प्लानिंग और इंजेक्शन तकनीक तक की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्राकृतिक लुक बनाए रखना भी उपचार का अहम हिस्सा

वर्कशॉप में बताया गया कि बोटुलिनम टॉक्सिन का उपयोग चेहरे पर दिखाई देने वाली झुर्रियों और उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है। हालांकि, एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी में उपचार का उद्देश्य चेहरे के भावों को पूरी तरह स्थिर कर देना नहीं, बल्कि चेहरे की प्राकृतिक अभिव्यक्ति को बनाए रखते हुए संतुलित परिणाम हासिल करना है।

प्रशिक्षण के दौरान रेजिडेंट्स को समझाया गया कि किसी भी एस्थेटिक प्रक्रिया में चेहरे की मांसपेशियों, उसकी बनावट और अलग-अलग हिस्सों की संरचना को समझना बेहद जरूरी है। सही आकलन के आधार पर किया गया उपचार ही प्राकृतिक और संतुलित लुक देने में मदद करता है।

फेशियल असेसमेंट से इंजेक्शन तकनीक तक मिली प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

वर्कशॉप में पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स को फेशियल असेसमेंट, ट्रीटमेंट प्लानिंग और इंजेक्शन तकनीकों के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। खास तौर पर चेहरे के अलग-अलग हिस्सों में उपचार की योजना बनाते समय संतुलन, तकनीक और प्राकृतिक परिणाम को ध्यान में रखने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की गई। वर्कशॉप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रहा, जिसमें रेजिडेंट्स को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आधुनिक एस्थेटिक प्रक्रियाओं को नजदीक से समझने और अपने व्यावहारिक कौशल को विकसित करने का अवसर मिला।

क्लासरूम से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर

डर्मेटोलॉजी का क्षेत्र लगातार नई तकनीकों और प्रक्रियाओं के साथ विकसित हो रहा है। ऐसे में केवल सैद्धांतिक जानकारी के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण रेजिडेंट्स की क्लिनिकल समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गीतांजली हॉस्पिटल के डर्मेटोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित इस वर्कशॉप का उद्देश्य भी रेजिडेंट्स को नियमित क्लिनिकल शिक्षा के साथ आधुनिक एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी की प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना रहा।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुआ प्रशिक्षण

वर्कशॉप का आयोजन डर्मेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. राशि अग्रवाल और डॉ. श्रेया शर्मा ने रेजिडेंट्स को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान एस्थेटिक प्रक्रियाओं में सटीक आकलन, उचित तकनीक और प्राकृतिक परिणाम के महत्व पर जोर दिया।

रेजिडेंट्स के लिए सीखने का अवसर

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम रेजिडेंट्स को डर्मेटोलॉजी के तेजी से बदलते क्षेत्र में नई प्रक्रियाओं और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर देते हैं। एस्थेटिक उपचार में मरीज की अपेक्षाओं और प्राकृतिक चेहरे के संतुलन को समझना भी चिकित्सा प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

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