नर्सिंग छात्राओं में एनीमिया जागरूकता के लिए “Beat the Fatigue” कार्यक्रम 

नर्सिंग छात्राओं में एनीमिया जागरूकता के लिए “Beat the Fatigue” कार्यक्रम 

गीतांजली में विशेषज्ञ डॉक्टरों और डाइटिशियन ने बताए एनीमिया के कारण और उपचार

आयरन युक्त आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर

छात्राओं ने प्रश्नोत्तर सत्र में उत्साहपूर्वक लिया भाग

महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया रोकथाम को लेकर बढ़ाई जागरूकता

उदयपुर, Dusrikhbar.com। Geetanjali Hospital की ओर से जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) छात्राओं के लिए “Beat the Fatigue” नामक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में एनीमिया जागरूकता बढ़ाना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और डाइटिशियन ने एनीमिया के कारण, लक्षण, रोकथाम और संतुलित आहार के महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की।

एनीमिया रोकथाम को लेकर छात्राओं को किया जागरूक

उदयपुर में आयोजित इस विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में GNM छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों में तेजी से बढ़ रही एनीमिया समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना था।

विशेषज्ञों ने बताया कि एनीमिया केवल कमजोरी नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। समय पर पहचान और सही खानपान से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।

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क्या है एनीमिया?

एनीमिया: शरीर में खून की कमी बन रही गंभीर समस्या: एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पातीं या उनमें आयरन की कमी हो जाती है।

महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में इसका खतरा अधिक रहता है। एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषण की कमी, आयरन और विटामिन B12 की कमी, अत्यधिक रक्तस्राव, खराब खानपान और लंबे समय तक बीमारी शामिल हैं।

नर्सिंग छात्राओं में एनीमिया जागरूकता के लिए “Beat the Fatigue” कार्यक्रम

एनीमिया रोग क्या है इसके लक्षण और बचाव के उपाय।

लक्षण 

इसके लक्षणों में कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, सिरदर्द और त्वचा का पीला पड़ना शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर जांच और संतुलित आहार से एनीमिया से बचाव संभव है।

कैसे हो बचाव?

हरी सब्जियां, चुकंदर, अनार, दालें, गुड़ और आयरन युक्त भोजन लाभदायक होते हैं। गंभीर स्थिति में डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट्स या उपचार की सलाह देते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नलिनी शर्मा, एमडी फिजिशियन डॉ. रवि मंगलिया और चीफ डाइटिशियन श्रीमती इंदु सैनी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।

डॉ. नलिनी शर्मा ने महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया के कारण, लक्षण, दुष्प्रभाव और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आयरन की कमी, असंतुलित भोजन और जागरूकता की कमी एनीमिया के प्रमुख कारण हैं।

वहीं डॉ. रवि मंगलिया ने एनीमिया जांच और उपचार की प्रक्रिया तथा समय पर पहचान के महत्व को समझाया।

संतुलित आहार और आयरन युक्त भोजन पर जोर

कार्यक्रम में चीफ डाइटिशियन श्रीमती इंदु सैनी ने छात्राओं को आयरन युक्त आहार और संतुलित भोजन की उपयोगिता के बारे में बताया।

उन्होंने हरी सब्जियां, दालें, फल, गुड़, चना और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि सही खानपान और जागरूकता से महिलाओं में होने वाली खून की कमी की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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छात्राओं ने उत्साहपूर्वक लिया भाग

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी निभाई। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने एनीमिया से जुड़े सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और भविष्य में समाज में भी इस विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षाविदों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. डॉ. आलोक रावत (कॉलेज ऑफ नर्सिंग), प्राचार्य प्रो. डॉ. दिनेश कुमार शर्मा (स्कूल ऑफ नर्सिंग) एवं प्रो. डॉ. जयेश पाटीदार (अकादमिक ऑफिसर) ने की। यह आयोजन प्रो. डॉ. विजयम्मा अजमेरा, डीन, गीतांजली कॉलेज ऑफ नर्सिंग के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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