
उदयपुर के ताज अरावली प्रोजेक्ट में ठगी कर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप, दिल्ली EOW ने दर्ज की FIR
ताज अरावली प्रोजेक्ट से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में दिल्ली EOW ने FIR दर्ज
ईशान क्लब्स एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और तीन निदेशक नामजद
सात शुरुआती निवेशकों ने लगाया 7.22 करोड़ रुपये की कथित ठगी का आरोप
कॉटेज खरीद पर 9-12% सालाना रिटर्न,मुनाफे में 25% शेयर का किया था कथित वादा
वन भूमि, पेड़ों की कटाई और जमीन आवंटन को लेकर भी आरोप
EOW कर रही है वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल की जांच
मामले में लगाए गए आरोप अभी तक नहीं हो पाए हैं साबित
नवीन सक्सेना,
उदयपुर, dusrikhabar.com। उदयपुर के कोडियात स्थित चर्चित ताज अरावली होटल प्रोजेक्ट से जुड़ा कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला अब जांच एजेंसी तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ईशान क्लब्स एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि होटल प्रोजेक्ट में कॉटेज खरीदने के नाम पर उनसे करोड़ों रुपये लिए गए, लेकिन भुगतान के बाद भी लंबे समय तक सेल डीड यानी रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
मामले में कंपनी के साथ राजीव आनंद, साहिल आनंद और चारू आनंद को नामजद किया गया है। सात शुरुआती निवेशकों ने कुल 7 करोड़ 22 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के अधीन हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
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कॉटेज के साथ सालाना 9 से 12 फीसदी रिटर्न का दावा
शिकायत के अनुसार, निवेशकों से दिल्ली में मुलाकात कर उन्हें उदयपुर के ताज अरावली प्रोजेक्ट में कॉटेज खरीदने के लिए आकर्षित किया गया। आरोप है कि निवेशकों को हर साल 9 से 12 फीसदी तक निश्चित रिटर्न और प्रोजेक्ट के कुल मुनाफे में 25 फीसदी तक हिस्सेदारी देने का भरोसा दिलाया गया। इसी भरोसे के आधार पर निवेशकों ने बैंक ट्रांसफर और RTGS के जरिए रकम जमा कराई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कॉटेज की पूरी कीमत और स्टांप ड्यूटी तक लेने के बाद भी कई वर्षों तक उनके नाम रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
निवेशकों के मुताबिक, जब उन्होंने अपने दस्तावेज और वादे के मुताबिक लाभ की मांग की तो उन्हें कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के नाम लेकर डराया गया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि निवेशकों को जानकारी दिए बिना प्रोजेक्ट को किसी विदेशी कंपनी को बेचने की कोशिश की गई।
सात निवेशक किसने किया कितना भुगतान
शिकायत में अलग-अलग निवेशकों की ओर से भुगतान की गई रकम का भी उल्लेख किया गया है।
- चेतन्य सिंह – 2 करोड़ रुपये, पांच कॉटेज के लिए।
- रुक्मणी सिंह – 2 करोड़ रुपये, पांच कॉटेज के लिए।
- विराज सागर दास – 81.60 लाख रुपये, जिसमें कॉटेज की कीमत और स्टांप ड्यूटी शामिल बताई गई है।
- अलका दास – 80.63 लाख रुपये।
- सोनाक्षी दास – 80.63 लाख रुपये।
- राहुल कुमार – 40 लाख रुपये, एक कॉटेज के लिए।
- सरिता शर्मा – 40 लाख रुपये, एक कॉटेज के लिए।
इन सात शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुल 7.22 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
जांच आगे बढ़ी तो 9 और निवेशक सामने आए
मामले की शुरुआती जांच के दौरान नौ और कथित पीड़ितों के सामने आने की बात कही गई है। इनमें सीमा अरुण अग्रवाल, संतोष कुमार चौधरी, संजय चिरानिया HUF, संजय कुमार चिरानिया, मुकेश कुमार चौधरी HUF, एस.एस. अग्रवाल एंड संस HUF, पूजा मेहता, बसंती मेहता और सुमन बोथरा शामिल हैं। इन शिकायतकर्ताओं ने भी कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायत दी है। इससे जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
प्रभावशाली लोगों के नाम लेकर डराने का भी आरोप
शिकायत में निवेशकों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने रजिस्ट्री और अपने निवेश से जुड़े दस्तावेजों की मांग की तो उन्हें कथित तौर पर राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के नाम का हवाला देकर डराया गया।
शिकायत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के नाम का उल्लेख करते हुए रसूख का भय दिखाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही एक व्यक्ति को पूर्व मुख्यमंत्री के OSD के रूप में बताते हुए फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
वन भूमि और पर्यावरण नियमों को लेकर भी गंभीर सवाल
मामला केवल निवेश और रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है। FIR में प्रोजेक्ट से जुड़े वन भूमि और पर्यावरण संबंधी कथित उल्लंघनों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि 21 जून 2021 को उप वन संरक्षक (DFO) ने उदयपुर कलेक्टर को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें होटल प्रबंधन पर बुझड़ा गांव के पास वन विभाग की सुरक्षा दीवार तोड़ने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद कथित तौर पर पेड़ों की कटाई कर अरावली हिल कंजर्वेशन जोन की सरकारी जमीन पर नई दीवार बनाने की बात सामने आई। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति भी संबंधित विभागों की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
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जमीन आवंटन पर भी उठाए गए सवाल
FIR में उदयपुर UIT की ओर से जमीन आवंटन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, UIT ने आरक्षित दर के 150 प्रतिशत + 15 प्रतिशत पर जमीन आवंटित करने की सिफारिश की थी, लेकिन बाद में तत्कालीन सरकार ने कथित तौर पर इसे घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया।
इसके अलावा देवास परियोजना से जुड़ी सिंचाई विभाग की जमीन, खसरा नंबर 158, को भी होटल प्रबंधन को गलत तरीके से आवंटित किए जाने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की जांच अब संबंधित दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्ड और भूमि आवंटन की प्रक्रिया के आधार पर किए जाने की संभावना है।
EOW की जांच में मनी ट्रेल पर नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली EOW अब कथित निवेश राशि के मनी ट्रेल, बैंक लेनदेन, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, निवेशकों से हुए समझौते और प्रोजेक्ट के स्वामित्व व हस्तांतरण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए बेनामी संपत्तियों और प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
ताज अरावली प्रोजेक्ट के बारे में:-
उदयपुर में ताज अरावली प्रोजेक्ट मुख्य रूप से Taj Aravali Resort & Spa है, जो अरावली पहाड़ियों के बीच कोडियात (बुजरा) क्षेत्र में स्थित एक लग्जरी 5-स्टार रिसॉर्ट प्रॉपर्टी है। इसे इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के ताज ब्रांड के तहत संचालित किया जाता है। [1, 2, 3, 4]
मुख्य विशेषताएं
- लोकेशन: यह उदयपुर में कोडियात मुख्य रोड पर अरावली पहाड़ियों की तलहटी में फैला एक विशाल और शांत प्राकृतिक परिसर है। [1, 2]
- आवास और सुविधाएं: इस प्रोजेक्ट में लग्जरी कमरे, सुइट और शानदार टेंट कॉटेज शामिल हैं। साथ ही, बेहतरीन डाइनिंग, स्पा और बड़े इवेंट स्पेस उपलब्ध हैं। [1, 2]
- डेस्टिनेशन वेडिंग: यह शानदार और बड़े पैमाने पर होने वाली शादियों व आयोजनों के लिए एक लोकप्रिय डेस्टिनेशन वेन्यू माना जाता है। [1, 2]
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