
विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार बना भारत, उद्योगपतियों के लाखों करोड़ के लोन माफ…!
भारत पर बढ़ता कर्ज संकट! 200लाख करोड़ का कर्जदार…!
विश्व बैंक के कर्जदारों में दूसरे नम्बर पर इंडोनेशिया का नाम
मार्च 2026 तक भारत पर 200 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज का अनुमान
43 उद्योगपतियों के 3लाख 53 करोड़ रुपए के कर्ज माफ
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ा और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। केंद्रीय बजट दस्तावेज की रिपोर्ट्स और संसद में उठे मुद्दों के अनुसार मार्च 2026 तक भारत पर कुल सरकारी देनदारी लगभग 200.53 लाख करोड़ रुपये का अनुमान है। इसी के साथ भारत विश्व बैंक से सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले देशों में शीर्ष पर पहुंच गया है। आर्थिक विशेषज्ञ इसे देश की वित्तीय स्थिति और बढ़ते राजकोषीय दबाव का संकेत मान रहे हैं।
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विश्व बैंक के सबसे बड़े कर्जदार देशों में भारत पहले स्थान पर
जानकारी के अनुसार भारत वर्तमान में विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन चुका है। वहीं दूसरे स्थान पर इंडोनेशिया है, जिस पर लगभग 21.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता विदेशी और आंतरिक कर्ज आने वाले समय में सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर बड़ा दबाव डाल सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि लगातार बढ़ती सरकारी देनदारी, ब्याज भुगतान और घाटे की स्थिति आम जनता पर अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ बढ़ा सकती है।
संसद में उठा 3लाख 53हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफी मामला
संसद में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 43 बड़ी कंपनियों के करीब 3 लाख 53 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए। उन्होंने दावा किया कि “हेयरकट योजना” के तहत कंपनियों पर कुल 5 लाख 44हजार करोड़ रुपये का बकाया था, जिसमें से बड़ी राशि माफ कर दी गई।
2014 में भी भारत था 42लाख 59हजार 200 करोड़ का कर्जदार
भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत पर विश्व बैंक का 440 अरब डॉलर यानि 42 लाख 59 हजार 200 करोड़ रुपये) लेकर विश्व बैंक की सूची में शामिल था।
जिन 43 बड़ी कंपनियों का कर्ज माफ होने की चर्चा, उनमें से कुछ प्रमुख कंपनियों की सूची
- दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि 87,000 करोड़ कर्ज, 37,000 करोड़ चुकाया 49,000करोड़ माफ
- रामस्वरूप इंडस्ट्रीज लि 5800करोड़ कर्ज, 5500करोड़ माफ
- भूषण स्टील लिमिटेड 56,022 करोड़ का कर्ज, 35,571 करोड़ चुकाया, 20,451 करोड़ माफ
- एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड 49,471 करोड़ कर्ज, 8,455 करोड़ माफ
- भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड 47,158 का कर्जा, 19,350 करोड़ चुकाया, 27,808 करोड़ माफ
- रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड 41000 करोड़ कर्जा, 36000 करोड़ माफ
- आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर 29524 करोड़ कर्ज, 5हजार करोड़ जमा किया, 24472 करोड़ माफ
- इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड 13,175 करोड़ कर्ज, 5320करोड़ चुकाया, 7,855 करोड़ माफ्र
- एमटेक ऑटो लिमिटेड पर 12641 करोड़ का कर्ज, 2615 करोड़ चुकाया, 10हजार करोड़ माफ
- एस्सार पावर लिमिटेड 12,168 करोड़ कर्ज, 9,568 करोड़ माफ
- मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड 11,015 करोड़ कर्ज, 8,123 करोड़ माफ
- रूचि सोया 9000 करोड़ कर्ज, 5000 करोड़ माफ
- डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड 8,181 करोड़ कर्ज, 358 करोड़ चुकाया, 7,821 करोड़ माफ
- जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड 7,454करोड़ कर्ज, 6,444 करोड़ माफ
- ज्योति स्ट्रक्चर लिमिटेड 7,368 करोड़ कर्ज, 3674 करोड़ माफ
- एचसीएल मैन्यूफेक्चरिंग लिमि 7,242 करोड़ कर्ज, 6192करोड़ माफ
- एशियन कलर कोटेड स्पार्क लिमिटेड 6,567 करोड़ कर्ज, 1538 करोड़ चुकाया, 5,029 करोड़ माफ
- ईएमसी लिमिटेड 6,150 करोड़ कर्ज, 5,612 करोड़ माफ
- कुमार मेटालर्जिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड 5,607 करोड़ का कर्ज, 5666 करोड़ माफ ब्याज सहित
- आधुनिक मेटालिक्स लिमिटेड पर 5,371करोड़ का कर्जा, 410 करोड चुकाया, 4,961 करोड़ माफ
- कोरबा वेस्ट पावर कंपनी लिमिटेड 5000करोड़ कर्ज, 3,865करोड़ माफ
इन मामलों को लेकर विपक्षी राजनैतिक दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आम जनता और किसानों के छोटे कर्ज पर सख्ती जबकि बड़े उद्योगपतियों को लगातार राहत दे रही है।
हजारों करोड़ लेकर विदेश भागे उद्योगपतियों पर भी बहस तेज
देश से बड़े बैंक लोन लेकर विदेश जाने वाले उद्योगपतियों का मुद्दा भी फिर चर्चा में है। आंकड़ों के अनुसार कई कारोबारी अब भी हजारों करोड़ रुपये के बकाएदार हैं।
प्रमुख उद्याेगपति जो भारतीय बैंकों का पैसा लेकर विदेश भागे
- कपिल और धीरज वधावन — लगभग 34 हजार करोड़ रुपये
- संदीप झुनझुनवाला — 22,800 करोड़ रुपये
- Nirav Modi — लगभग 13,600 करोड़ रुपये
- Vijay Mallya — लगभग 9 हजार करोड़ रुपये
- नितिन संदेसरा और परिवार — करीब 8,100 करोड़ रुपये
- जतिन मेहता पर 6800 करोड़ का लोन बाकी
- सुनील कक्कड़ 2200 करोड़ का लोन बाकी
- ललित मोदी 1700 करोड़ का लोन बाकी
- इधर विनेश शाह पर 1000 करोड़ का लोन बाकी
क्या कर्ज माफी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी थी?
आर्थिक विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि दिवालिया कंपनियों को पुनर्जीवित करने और बैंकिंग सिस्टम को बचाने के लिए “हेयरकट” जरूरी होता है। वहीं दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि इससे गलत संदेश जाता है और बड़े कॉर्पोरेट समूहों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि कर्ज वसूली तंत्र मजबूत नहीं हुआ तो भविष्य में बैंकिंग सेक्टर पर NPA का दबाव फिर बढ़ सकता है।
क्या ये जानना जरूरी नहीं देशवासियों के लिए ?
अगर वर्ष 2025 में GDP के मुकाबले सबसे अधिक कर्ज अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) वाले देशों की बात करें, तो जापान इस सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है। जापान का कर्ज उसकी कुल अर्थव्यवस्था के आकार का लगभग ढाई गुना पहुंच चुका है और उसका ऋण अनुपात करीब 248.7% दर्ज किया गया है। इसके बाद सूडान 237.1% के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि सिंगापुर 175.8% के ऋण अनुपात के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद है।
यूरोप के कई बड़े देश भी बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रहे हैं। ग्रीस का ऋण अनुपात 152.9%, इटली का 138.7% और फ्रांस का 115.3% तक पहुंच चुका है। वहीं छोटे द्वीपीय देशों में मालदीव 133.6% और बहरीन 129.8% के साथ इस सूची में शामिल हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका का Debt-to-GDP Ratio 124.1% दर्ज किया गया है, जबकि लाओस 118.3% के स्तर पर है।
Debt-to-GDP Ratio वाले शीर्ष 10 देशों में भारत शामिल नहीं
महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया के सबसे ज्यादा Debt-to-GDP Ratio वाले शीर्ष 10 देशों में भारत शामिल नहीं है। इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह दर्शाता है कि भारत का कर्ज स्तर उसकी अर्थव्यवस्था की तुलना में अभी नियंत्रित स्थिति में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि World Bank Debtors List में भारत का शीर्ष पर होना केवल बढ़ते कर्ज के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह इस बात का भी संकेत है कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास परियोजनाओं और आर्थिक विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, ताकि भविष्य में तेज आर्थिक वृद्धि हासिल की जा सके।
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राजनीतिक और आर्थिक बहस का बड़ा मुद्दा
बहरहाल बढ़ता सरकारी कर्ज, उद्योगपतियों के लोन माफ होने के आरोप और विदेश भागे आर्थिक अपराधियों के मामलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बना दिया है। विपक्ष इसे आर्थिक असमानता और कॉर्पोरेट पक्षधरता का मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दिवालिया प्रक्रिया और बैंकिंग सुधारों के तहत नियमों के अनुसार फैसले लिए गए हैं।
नोट:- सभी आंकड़े केंद्रीय बजट दस्तावेज2025-2026, राज्यसभा टीवी के सीधे प्रसारण और प्रमुख समाचार एजेंसियों से लिए गए हैं।
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