
अक्षय ऊर्जा में राजस्थान बना देश का मॉडल स्टेट, सोलर और ग्रीन हाइड्रोजन से बदलेगा राजस्थान का भविष्य
ऊर्जा संरक्षण से आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता राजस्थान
राजस्थान में ग्रीन एनर्जी क्रांति, 2047 तक 290 गीगावाट ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
राजस्थान में निवेश का सुनहरा मौका, ऊर्जा क्षेत्र में खुलेंगे नए द्वार
हरित ऊर्जा के दम पर नई पहचान बना रहा राजस्थान
राजस्थान में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा की संभावनाएं, निवेशकों को बड़ा अवसर
कुसुम योजना और सोलर पार्कों से ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा क्रांति
ईंधन बचत से पर्यावरण संरक्षण तक, राजस्थान सरकार का बड़ा विजन
संदीप बहल,
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान तेजी से ग्रीन एनर्जी और अक्षय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma ने राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव में कहा कि ऊर्जा की बचत ही सबसे बड़ा और सस्ता ऊर्जा उत्पादन है। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सौर ऊर्जा के विस्तार को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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ऊर्जा बचत से आत्मनिर्भर बनेगा भारत
जयपुर में आयोजित राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने कहा कि “ऊर्जा संरक्षण” केवल सरकारी नीति नहीं बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बचत आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के “ईंधन की एक-एक बूंद बचाने” के संदेश को दोहराते हुए कहा कि “ऊर्जा बचत” ही भविष्य की आर्थिक और पर्यावरणीय सुरक्षा का आधार बनेगी।

इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे मुख्यमंत्री, दिया बड़ा संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे और ईवी मोबिलिटी को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
सरकार ने राज्य में 250 स्थानों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है। इससे ई-मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा और राजस्थान स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
सौर ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान देश में अग्रणी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं। अभी तक राज्य में 47 गीगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
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उन्होंने कहा कि “राजस्थान ग्रीन एनर्जी क्रांति का केंद्र बन रहा है” और सरकार की नई नीतियों के चलते सौर, पवन, बायो ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में बड़े निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
कुसुम योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत कृषि भूमि पर लघु सौर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। अब तक 4 हजार मेगावाट से अधिक परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं और 6500 मेगावाट परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं।
इसके अलावा 12 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता वाले सोलर पार्क निर्माणाधीन हैं। राज्य के 1000 से अधिक सरकारी भवनों पर सौर्यकरण कार्य भी पूरा किया जा चुका है।
ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक राजस्थान 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का लक्ष्य हासिल करेगा। वहीं वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 290 गीगावाट किया जाएगा।
राज्य सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 लागू की है, जिसके तहत बैट्री स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और बायो फ्यूल परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
निवेशकों को मुख्यमंत्री का संदेश – “पधारो म्हारे देस”
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों से राजस्थान में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार उद्योगों और निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान निवेश के लिए देश के सबसे अनुकूल राज्यों में शामिल है और आने वाले वर्षों में यह प्रदेश ऊर्जा उत्पादन का “पावरहाउस” बनकर उभरेगा।
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