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पीके के बाद कांग्रेस का “प्लान बी” ?

पीके के बाद कांग्रेस का “प्लान बी” ?

पीके के बाद कांग्रेस का “प्लान बी” !

कांग्रेस नहीं करवा सकी अपने सबसे बड़े फैसले की तामील

पीके का कांग्रेस में शामिल न होना कांग्रेस प्लानिंग का बड़ा फेल्योर

ऐसे में क्या कांग्रेस के पास है कोई प्लान बी ?

क्योंकि पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए उसे चाहिए चुनाव प्रबंधन का बड़ा “बैक सपोर्ट”

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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अपनी दरकती दीवारों को खुद ही सुधार सकती है कांग्रेस

हालांकि अपने वरिष्ठों को फिर से एक लाइन पर खड़ा करना,

विवादों को खत्म कर एक विचारधारा संग आगे बढ़ना, कांग्रेस के लिए है टेड़ी खीर

लेकिन इसके अलावा कांग्रेस के पास नहीं कोई दूसरा विकल्प

क्योंकि बिना दीवारों की मरम्मत कांग्रेस की इमारत हो जाएगी खंडहर

और खंडहर इमारत में क्यूं कोई तलाशेगा अपना भविष्य ?

प्रशांत किशोर के फिलहाल कांग्रेस में शामिल न होने से बनी ये स्थिति

देश की सबसे पुरानी कही जाने वाली पार्टी के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती

इसलिए अब 2024 के लिए कांग्रेस को तैयार करना ही पड़ेगा कोई “प्लान-बी”

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क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले 12राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़ भी शामिल, जहां अभी भी बरकरार है कांग्रेस की सरकार

लेकिन राजस्थान में चल रही गहलोत-पायलट के बीच आंतरिक कलह है चौड़े-धाड़े

ऐसे में 2024 में राजस्थान में कलह खत्म करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती

राजनीतिक गलियारों में है इस बात की सुगबुगाहट कि

पिछले विस चुनावों में सचिन पायलट को दिया गया था सीएम पद का लॉलीपॉप

लेकिन अंत में पार्टी को अशोक गहलोत को ही बनाना पड़ा मुख्यमंत्री

इस बार मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी किसकी अभिलाषा कर पाएगी शांत?

पार्टी के पास इत्मिनान से सोचने का नहीं बहुत ज्यादा समय

ऐसे में राजस्थान के लोगों की भावना और प्रदेश में मजबूत प्रत्याशी ही निकाल पाएगा सीट

वहीं अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के सामने साख को लेकर है यक्ष प्रश्न

राजस्थान और छत्तीसगढ़ को बचाते हुए अन्य राज्यों में कांग्रेस को फिर जमाने हैं कदम

इसके लिए जल्द ही कांग्रेस को तैयार करना होगा प्लान-बी

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