
खादी की ऊंची छलांग: पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कारोबार, 2.04 करोड़ लोगों को मिला रोजगार
केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड तोड़ अनंतिम आंकड़े
12 वर्षों में बिक्री 501% और उत्पादन 380% बढ़ा
खादी वस्त्रों की बिक्री में 628% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज
पीएमईजीपी के जरिए 7.31 लाख लोगों को मिला नया रोजगार
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को मिली नई उड़ान
महावीर सिंह,
दिल्ली/जयपुर, dusrikhabar.com। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। पिछले 12 वर्षों में उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज करते हुए खादी क्षेत्र ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। केवीआईसी के अनुसार वर्तमान में इस क्षेत्र से 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है।
केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े
नई दिल्ली स्थित गांधी दर्शन, राजघाट कार्यालय में केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल‘, ‘लोकल टू ग्लोबल‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘ जैसे अभियानों ने ग्रामीण उद्योगों को नई पहचान दिलाई है।
12 वर्षों में बिक्री 501% और उत्पादन 380% बढ़ा
केवीआईसी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013-14 में खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 26,109 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,25,296 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि है।
वहीं बिक्री वर्ष 2013-14 के 31,154 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,87,105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो 501 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाती है। यह उपलब्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्यमिता की बढ़ती ताकत का प्रमाण मानी जा रही है।
खादी वस्त्रों की बिक्री और उत्पादन में नई ऊंचाइयां
खादी वस्त्र उद्योग ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2013-14 में खादी वस्त्रों का उत्पादन 811 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 3,974 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो लगभग 628 प्रतिशत की वृद्धि है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा खादी के प्रचार-प्रसार और युवाओं के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने बाजार विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2.04 करोड़ लोगों को मिला रोजगार, पीएमईजीपी बना बड़ा आधार
रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र से 1.30 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 2.04 करोड़ हो गई।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना हुई। इन इकाइयों के लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की गई। इससे 7,31,434 लोगों को रोजगार मिला।
योजना की शुरुआत से अब तक 10.84 लाख से अधिक इकाइयों की स्थापना के माध्यम से करीब 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।
महिला सशक्तिकरण और कारीगरों के विकास में अहम भूमिका
केवीआईसी ने महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल रहीं। यह कुल प्रशिक्षुओं का लगभग 59 प्रतिशत है।
पीएमईजीपी के अंतर्गत 28,180 महिला उद्यमियों ने नई इकाइयां स्थापित कीं, जिनसे 3.09 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, जो इसे महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक विकास का मजबूत मॉडल बनाती हैं।
कारीगरों के पारिश्रमिक और सरकारी मांग में भी बढ़ोतरी
केवीआईसी के प्रयासों से कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2013-14 में जहां पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक था, वहीं अब यह बढ़कर 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, जो लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि है।
इसके अलावा सरकारी आपूर्ति 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई। राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री भी 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
बहरहाल खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की यह उपलब्धि केवल कारोबार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता, उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की सफलता की कहानी भी है। 1.87 लाख करोड़ रुपये का कारोबार और 2.04 करोड़ रोजगार यह साबित करते हैं कि खादी अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि विकसित भारत की आर्थिक शक्ति बन चुकी है।
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