सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त जजों के लिए बड़ा फैसला..! देशभर के जजों को एक साल…

सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त जजों के लिए बड़ा फैसला..! देशभर के जजों को एक साल…

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत

रिटायरमेंट के बाद भी मिल सकती है एक साल की सेवा

जजों की सेवानिवृत्ति आयु के मामले में केंद्र, राज्यों और सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी 

मामले की सुनवाई तक याचिकाकर्ता जजों को 61 वर्ष तक सेवा में बने रहने की अंतरिम अनुमति

राजस्थान सहित अधिकांश राज्यों में अधीनस्थ अदालतों के जज 60 वर्ष की आयु में होते हैं सेवानिवृत्त 

विजय श्रीवास्तव,

नई दिल्ली,dusrikhabar.com। न्याय केवल कानून की किताबों से नहीं, बल्कि अनुभवी और निष्पक्ष न्यायाधीशों के निर्णयों से मजबूत होता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के जिला और अधीनस्थ अदालतों के जजों की सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा है कि जब तक मामला विचाराधीन है, याचिकाकर्ता जजों को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाए, यदि उन्हें पहले ही सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो।

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देशभर के जजों की सेवा अवधि पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर

ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इसका असर देश की पूरी न्यायिक व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और देश के सभी हाईकोर्ट्स का पक्ष सुनना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अभी 61 वर्ष तक सेवा में बने रहेंगे याचिकाकर्ता जज

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को 61 वर्ष की आयु पूरी होने तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते उन्हें पहले ही सेवा से मुक्त न किया गया हो।

फिलहाल राजस्थान सहित अधिकांश राज्यों में जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा अधीनस्थ अदालतों के जजों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है। यदि अंतिम निर्णय सेवा अवधि बढ़ाने के पक्ष में आता है तो इसका लाभ देशभर के हजारों न्यायिक अधिकारियों को मिल सकता है।

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22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

यह मामला 13 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष आया। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को इसी विषय से जुड़े एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी।

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अनुभव का सम्मान, न्याय व्यवस्था को मजबूती

न्यायाधीश केवल फैसले नहीं सुनाते, बल्कि समाज में न्याय और संविधान पर लोगों का विश्वास बनाए रखते हैं। वर्षों का अनुभव उन्हें जटिल मामलों को समझने और संतुलित निर्णय देने में सक्षम बनाता है।

यदि सेवा अवधि बढ़ाने पर अंतिम सहमति बनती है, तो इससे अनुभवी न्यायाधीशों का अनुभव न्याय व्यवस्था को और मजबूत कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, युवा न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और नई नियुक्तियों जैसे पहलुओं पर भी संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की राय सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लेना चाहता है।

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