
होटल कजरी की जीएम कुर्सी पर संग्राम! आरटीडीसी के गलियारों से सचिवालय तक लॉबिंग तेज, कुर्सी को लेकर एक अनार सौ बीमार
आरटीडीसी की सबसे चर्चित कुर्सियों में शामिल हुई होटल कजरी की जीएम पोस्ट
होटल कजरी में पोस्टिंग को लेकर विभागीय अफसरों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
विभागीय आलाकमान के चहेतों के नामों की चर्चा ने बढ़ाई हलचल
राजधानी से लेकर संभागीय स्तर तक राजनेताओं से चल रहा सिफारिश दौर
राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों के बीच होगा नए जीएम का चयन
आरटीडीसी के टॉप होटल की कमान संभालने को लेकर बढ़ी दिलचस्पी
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर स्थित राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) की चर्चित होटल कजरी इन दिनों सत्ता, प्रशासन और पर्यटन विभाग के गलियारों में चर्चा का बड़ा केंद्र बनी हुई है। होटल कजरी के इकाई प्रभारी के 31 मई को सेवानिवृत्त होने से पहले ही इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर कब्जा जमाने को लेकर प्रदेशभर के कई अफसर सक्रिय हो गए हैं। सचिवालय से लेकर सीएमआर तक दौड़-धूप और लॉबिंग का दौर तेज हो चुका है।
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होटल कजरी की जीएम कुर्सी के लिए बढ़ी अफसरों की बेचैनी
सूत्रों के अनुसार होटल कजरी में जीएम (इकाई प्रभारी) की कुर्सी को लेकर विभाग के अंदर जबरदस्त हलचल मची हुई है। सीकर, पाली, बाड़मेर और जयपुर तक के कई अधिकारी इस पद को हासिल करने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। वर्तमान इकाई प्रभारी के रिटायरमेंट से पहले ही संभावित दावेदारों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि कई अधिकारी लगातार सचिवालय और सीएम हाउस के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि उन्हें इस प्रतिष्ठित होटल का प्रभार मिल सके। होटल कजरी को आरटीडीसी के सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक होटलों में माना जाता है, इसलिए इस पद को लेकर होड़ तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

आखिर क्यों खास है होटल कजरी की यह कुर्सी?
विभागीय सूत्रों की मानें तो होटल कजरी केवल एक होटल नहीं बल्कि प्रभाव, संपर्क और प्रशासनिक महत्व का बड़ा केंद्र माना जाता है। आरटीडीसी के टॉप-5 होटलों में शुमार यह होटल शायद ही कभी घाटे में रहा हो। यही वजह है कि यहां जीएम बनना कई अधिकारियों के लिए प्रतिष्ठा और प्रभाव दोनों का विषय बन चुका है।
जानकार बताते हैं कि इस होटल के संचालन में कई तरह के ऑफिशियल, व्यक्तिगत और राजनीतिक फायदे जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि विभागीय आला अफसरों के चहेतों की सूची भी तैयार बताई जा रही है, जो इस कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में लगे हुए हैं।
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सचिवालय से सीएमआर तक दौड़-धूप, मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला
सूत्रों के मुताबिक होटल कजरी की कुर्सी को लेकर लॉबिंग अब विभागीय दफ्तरों तक सीमित नहीं रही। सचिवालय, मंत्रालयों और सीएमआर तक कई अधिकारी अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं। यहां तक कि कुछ अधिकारियों ने मुख्य सचिव तक अपनी दावेदारी पहुंचाई है।
बताया जा रहा है कि विभागीय आलाकमान के करीबी अधिकारी इस कुर्सी के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि विभाग के पास कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अंतिम निर्णय को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
योग्य अधिकारियों की अनदेखी का भी उठ रहा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं लॉबिंग और राजनीतिक प्रभाव के चलते योग्य अधिकारियों की अनदेखी न हो जाए। कई ऐसे अधिकारी भी बताए जा रहे हैं जो अनुभव और प्रशासनिक क्षमता के आधार पर इस पद के लिए मजबूत दावेदार माने जाते हैं, लेकिन उनकी पहुंच कमजोर होने के कारण उनका नाम पीछे छूट सकता है।
विभागीय कर्मचारियों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि किसी सक्षम अधिकारी को जिम्मेदारी मिलती है तो होटल कजरी की कार्यप्रणाली और बेहतर हो सकती है।
रूक्मणि रियार के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
फिलहाल आरटीडीसी एमडी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहीं रूक्मणि रियार को एक सख्त और निर्णय लेने वाली अधिकारी माना जाता है। ऐसे में विभाग के भीतर यह उम्मीद जताई जा रही है कि होटल कजरी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की कमान किसी योग्य और सक्षम अधिकारी को ही सौंपी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार रूक्मणि रियार फिलहाल शहर से बाहर हैं, लेकिन उनके लौटते ही 31 मई से पहले इकाई प्रभारी के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि आखिर होटल कजरी की चर्चित कुर्सी पर किस अफसर की ताजपोशी होती है।
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