
कार्डियोनेक्स्ट 2026: उदयपुर में जुटे 350+ विशेषज्ञ, आधुनिक हार्ट ट्रीटमेंट पर मंथन
गीतांजली मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्डियोलॉजी कॉन्फ्रेंस
हार्ट अटैक, टैकीअरिदमिया और हार्ट फेल्योर पर गहन चर्चा
लीडलेस पेसमेकर और TAVI तकनीक ने खींचा ध्यान
लाइव हार्ट स्पेसिमेन से डॉक्टरों को मिला प्रैक्टिकल अनुभव
डॉक्टरों की हेल्थ स्क्रीनिंग और मेटाबॉलिक डिजीज पर भी फोकस
उदयपुर, dusrikhabar.com। उदयपुर। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और हृदय रोगों के बेहतर प्रबंधन को लेकर गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, कार्डियक साइंस सोसाइटी और API द्वारा आयोजित कार्डियोनेक्स्ट–2026 कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में 350 से अधिक डॉक्टरों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर कार्डियोलॉजी के नवीनतम शोध, तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श किया।
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दीप प्रज्वलन के साथ शुरुआत, दिग्गज डॉक्टरों की मौजूदगी
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें अंकित अग्रवाल (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर), डॉ. आनंद गुप्ता (अध्यक्ष, IMA उदयपुर), डॉ. रमेश पटेल (एचओडी, कार्डियोलॉजी) सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे। इस दौरान डॉ. संजय गांधी, डॉ. बी.एस. बॉम्ब, डॉ. डी.सी. कुमावत, डॉ. दिलीप जैन, डॉ. रोहित सैनी और डॉ. गौरव मित्तल जैसे विशेषज्ञों ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।
आधुनिक तकनीकों पर फोकस: हार्ट केयर में बड़ा बदलाव
कॉन्फ्रेंस में हार्ट फेल्योर, लिपिड डिसऑर्डर, टैकीअरिदमिया और जन्मजात हृदय रोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें इको सिम्पोजियम, लिपिड–हार्ट फेल्योर कंटिन्युअम और जटिल टैकीअरिदमिया का प्रबंधन प्रमुख सत्रों में शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों के कारण हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में नई तकनीकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
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लीडलेस पेसमेकर और TAVI तकनीक ने बढ़ाई उम्मीद
कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा आकर्षण रहा लीडलेस पेसमेकर। यह बिना वायर के लगाया जाने वाला आधुनिक उपकरण है जिसमें संक्रमण का खतरा कम और मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है।
डॉ. रमेश पटेल ने बताया कि TAVI (Transcatheter Aortic Valve Implantation) यह तकनीक बिना ओपन हार्ट सर्जरी के वाल्व रिप्लेसमेंट संभव बनाती है साथ ही बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

लाइव हार्ट प्रेजेंटेशन से बढ़ी समझ
कॉन्फ्रेंस में हार्ट स्पेसिमेन का लाइव प्रेजेंटेशन किया गया, जिससे डॉक्टरों को हृदय की संरचना (एनाटॉमी) को गहराई से समझने और जटिल रोगों के इलाज को बेहतर तरीके से सीखने का मौका मिला। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए सबसे अधिक ज्ञानवर्धक साबित हुआ।
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डॉ. दिलीप जैन द्वारा आयोजित डिबेट में एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) के इलाज में मेडिकल मैनेजमेंट और इंटरवेंशनल तकनीकों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर इलाज और सही तकनीक का चयन मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉक्टरों की सेहत और मेटाबॉलिक डिजीज पर चर्चा
कॉन्फ्रेंस में यह अहम सवाल भी उठा कि क्या डॉक्टर खुद हृदय रोगों के अधिक जोखिम में हैं? विशेषज्ञों ने इस पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग, संतुलित जीवनशैली, मोटापे और मेटाबॉलिक डिजीज पर नियंत्रण की आवश्यकता है।
ज्ञान और जागरूकता का मजबूत मंच
डॉ. संजय गांधी ने एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (AVR) के लाइफटाइम मैनेजमेंट पर प्रकाश डालते हुए नई तकनीकों के महत्व को समझाया। साथ ही ECG क्विज़ का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कॉन्फ्रेंस न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक रही, बल्कि हृदय रोगों की जागरूकता और बेहतर उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
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