क्या SMS हॉस्पिटल बना आरोपियों की ‘आरामगाह’? गिरफ्तारी के बाद…

क्या SMS हॉस्पिटल बना आरोपियों की ‘आरामगाह’? गिरफ्तारी के बाद…

गिरफ्तारी के बाद आरोपी बीमारी का बहाना बनाकर हो रहे अस्पताल में भर्ती

अब पूरे सिस्टम पर उठे कई बड़े सवाल

अस्पताल अधीक्षक मृणाल जोशी ने क्यों साधी चुप्पी? 

जेल से बचने के लिए अस्पताल का सहारा ले रहे आरोपी

डॉ. सोमदेव बंसल केस ने खोली सिस्टम की बड़ी खामियां

बिना सीनियर कंसल्टेंसी के भर्ती, प्रोटोकॉल की अनदेखी

मेडिकल बोर्ड गठित, फिर भी जांच में देरी

RGHS फर्जीवाड़ा और दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर, dusrikhabar.com, जयपुर। राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि क्रिमिनल्स और आरोपी जेल से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। हाल ही में सामने आए डॉ. सोमदेव बंसल केस ने इस पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है, जहां नियमों को ताक पर रखकर आरोपियों को राहत मिलती दिख रही है।

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आरोपियों के लिए ‘सेफ जोन’ बनता SMS हॉस्पिटल

जयपुर का SMS हॉस्पिटल अब कथित रूप से उन आरोपियों के लिए आरामगाह बनता जा रहा है, जो जेल जाने से बचना चाहते हैं और जिनके बड़े रसूखात हैं या जिनके पास दौलत की कमी नहीं है। जानकार सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद कई आरोपी बीमारी का बहाना बनाते हैं। प्रभावशाली (रसूखदार) लोग अस्पताल में भर्ती होकर जेल से बचने की कोशिश करते हैं, 

इससे पहले डॉ. मनीष अग्रवाल के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला, जहां रिश्वत केस में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने तबीयत खराब बताकर अस्पताल में भर्ती ले ली थी। हालांकि जांच में रिपोर्ट सामान्य आने पर उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

डॉ. सोमदेव बंसल केस: गिरफ्तारी के बाद अस्पताल में एंट्री

ताजा मामला जयपुर के निविक हॉस्पिटल संचालक डॉ. सोमदेव बंसल से जुड़ा है।

  • मानसरोवर थाना पुलिस ने जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया
  • गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों में तबीयत बिगड़ने का दावा
  • 12 अप्रैल को SMS हॉस्पिटल में भर्ती

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या नियमों के अनुसार भर्ती हुई या सिस्टम में कहीं लापरवाही हुई?

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प्रोटोकॉल की अनदेखी: बिना सीनियर डॉक्टर के भर्ती

इस मामले में अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई। सीनियर डॉक्टर की कंसल्टेंसी के बिना भर्ती, इमरजेंसी केस होने के बावजूद सीधे जनरल मेडिसिन वार्ड में एडमिशन, रेजीडेंट डॉक्टर के साइन तक नहीं। मेडिसिन डिपार्टमेंट के HOD ने इस पर नाराजगी जताई और इसे गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन बताया।

मेडिकल बोर्ड गठित, लेकिन जांच में देरी

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया, जिसमें शामिल हैं:

  • कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ
  • न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ
  • जनरल मेडिसिन
  • फोरेंसिक मेडिसिन

लेकिन हैरानी की बात यह है कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी सभी जांच पूरी नहीं हो सकी।

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प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ‘नॉर्मल’

डॉ. बंसल की अब तक की मेडिकल रिपोर्ट ब्लड टेस्ट – सामान्य, ECG – सामान्य, CT स्कैन – सामान्य। इसके बावजूद उन्हें भर्ती रखा गया, जिससे पूरे मामले पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

क्या है RGHS घोटाला?

जांच में सामने आया कि आरोपी डॉक्टर पर RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) में फर्जीवाड़े का आरोप है। आरोपों के मुख्य बिंदु मरीजों को बार-बार डिस्चार्ज और री-एडमिट दिखाना, एक ही कंसेंट फॉर्म में काटछांट कर कई बार इस्तेमाल और दस्तावेजों में हेरफेर कर सिस्टम का गलत फायदा, FSL रिपोर्ट में भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की पुष्टि हो चुकी है।

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शिकायत से गिरफ्तारी तक का पूरा घटनाक्रम

  • सितंबर 2025 में एडवोकेट जितेंद्र शर्मा ने शिकायत दर्ज करवाई
  • इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया
  • पुलिस जांच में इलाज में लापरवाही नहीं, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली
  • वकीलों ने हाईकोर्ट रोड पर प्रदर्शन भी किया
  • इसके बाद पुलिस ने डॉ. सोमदेव बंसल को गिरफ्तार किया

बड़ा सवाल: सिस्टम में सुधार कब?

यह मामला केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है, क्या अस्पतालों का इस्तेमाल जेल से बचने के लिए किया जा रहा है? क्या मेडिकल प्रोटोकॉल सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं? क्या आम मरीजों के अधिकारों से समझौता हो रहा है?

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विशेषज्ञ मानते हैं कि पारदर्शिता, सख्त निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

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