
राजस्थान का मेगा वॉटर मिशन: हाईटेक जलाशय, रेत के बीच पानी का महासागर, 50 लाख लोगों को मिलेगी राहत
थार के रेगिस्तान में बना 242 करोड़ का विशाल जलाशय
इंदिरा गांधी नहर से जुड़े प्रोजेक्ट से 50 लाख लोगों को राहत
मानसून का अतिरिक्त पानी अब होगा संरक्षित
HDPE तकनीक से रोका जाएगा रेतीली जमीन में पानी का रिसाव
नहर बंद होने पर भी बाड़मेर-जैसलमेर में नहीं होगा जल संकट
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर/बाड़मेर/जैसलमेर, dusrikhabar.com। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की समस्या को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार ने बड़ी पहल की है। बाड़मेर और जैसलमेर जिलों के करीब 50 लाख लोगों को सालभर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 242 करोड़ रुपये की लागत से विशाल कृत्रिम जलाशय तैयार किया गया है। यह जलाशय इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़ा हुआ है, जहां मानसून के अतिरिक्त पानी को संग्रहित कर सूखे और नहर बंदी के दौरान उपयोग किया जाएगा। आधुनिक तकनीक और HDPE लाइनिंग से तैयार यह परियोजना थार में जल संरक्षण का नया मॉडल बनकर उभरी है।
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28 किलोमीटर लंबा जलाशय, करोड़ों लीटर पानी का भंडारण
यह जिगजैग आकार का कृत्रिम जलाशय लगभग 28 किलोमीटर लंबा और करीब 10 मीटर गहरा बनाया गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अनुसार इसमें करीब 1413 मिलियन क्यूबिक फीट पानी संग्रहित किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह जलाशय लगभग 141 करोड़ लीटर पानी का बैकअप रिजर्व तैयार करेगा, जिससे पेयजल आपूर्ति को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकेगा।
मानसून में अतिरिक्त पानी होगा स्टोर
सरकार की योजना के तहत मानसून के दौरान इंदिरा गांधी नहर में आने वाले अतिरिक्त पानी को इस जलाशय में संग्रहित किया जाएगा। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भारी मात्रा में आने वाले पानी का उपयोग अब सीधे बहाने के बजाय जल संरक्षण के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत होती है, ऐसे में बचा हुआ पानी इस जलाशय में स्टोर कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
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रेगिस्तान में पानी बचाने के लिए अपनाई हाईटेक तकनीक
रेतीली जमीन में पानी रिसने की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। इसे रोकने के लिए जलाशय के नीचे करीब 76 लाख वर्गमीटर HDPE प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। यह विशेष तकनीक पानी को जमीन में समाने से रोकेगी। PHED अधिकारियों के मुताबिक अगर यह सुरक्षा परत नहीं लगाई जाती तो करोड़ों लीटर पानी जमीन में रिस जाता। इसलिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इस रेगिस्तानी जलाशय को तैयार किया गया है।
नहर बंद होने पर नहीं होगा जल संकट
PHED के अधिशासी अभियंता रामपाल मुंधियाड़ा ने बताया कि हर साल इंदिरा गांधी नहर रखरखाव के कारण लगभग एक महीने के लिए बंद रहती है। इस दौरान बाड़मेर और जैसलमेर में गंभीर पानी संकट पैदा हो जाता था। अब यह नया जलाशय नहर बंद रहने की स्थिति में बैकअप के रूप में काम करेगा। इससे लोगों को गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी राहत मिलेगी। फिलहाल जलाशय में करीब 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है और भराव प्रक्रिया शुरू हो गई है।
परियोजना एक नजर में:-
- जल संकट की पृष्ठभूमि
- पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में हर वर्ष इंदिरा गांधी नहर बंद होने के दौरान पेयजल संकट गहराता था।
- गर्मियों और सूखे की स्थिति में लाखों लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता था।
- इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़े जल भंडारण प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई।
- परियोजना की अवधारणा
- राजस्थान सरकार और PHED अधिकारियों ने इंदिरा गांधी नहर से अतिरिक्त पानी स्टोर करने का मॉडल तैयार किया।
- परियोजना का मुख्य उद्देश्य था:
- नहर बंदी के दौरान पेयजल उपलब्ध कराना
- मानसून के अतिरिक्त पानी का संरक्षण
- रेगिस्तानी क्षेत्रों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना
- प्रशासनिक स्वीकृति और बजट
- परियोजना को राज्य सरकार से प्रशासनिक मंजूरी मिली।
- करीब 242 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत हुई।
- इसे मोहनगढ़ जलापूर्ति प्रणाली से जोड़ा गया।
- निर्माण कार्य
- जैसलमेर जिले में 507 RD हेड के पास विशाल कृत्रिम जलाशय बनाया गया।
- लगभग: 28 किमी लंबाई, 10 मीटर गहराई और 76 लाख वर्गमीटर HDPE शीट बिछाई गई
- रेतीली जमीन में रिसाव रोकने के लिए विशेष इंजीनियरिंग तकनीक अपनाई गई।
- जल भराव और संचालन
- इंदिरा गांधी नहर से लगभग 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- जलाशय में भराव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- मानसून के अतिरिक्त पानी को संरक्षित किया जाएगा।
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