
राजस्थान की विरासत को मिलेगी नई पहचान: बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट्स में आएगी तेज़ी, दिया कुमारी ने दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश
पर्यटन विकास के बड़े प्रोजेक्ट्स का जल्द होगा शिलान्यास, 72 बजट घोषणाओं में 6 पूरी, 19 पर कार्य जारी
₹1,79,465 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम
शेखावाटी की हवेलियों को ‘ओपन आर्ट गैलरी‘ के रूप में विकसित करने की तैयारी
आमेर लाइट एंड साउंड शो को विश्वस्तरीय स्वरूप मिलेगा
₹206.87 करोड़ के महाराणा प्रताप सर्किट को गति, तनोट माता मंदिर बनेगा विश्वस्तरीय आस्था पर्यटन केंद्र
रामदेवरा और मालासेरी सहित धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास पर विशेष फोकस
पैनोरमा के प्रचार-प्रसार में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी
माही राठौड़,
जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी बड़े पर्यटन विकास प्रोजेक्ट्स का शीघ्र शिलान्यास कर उन्हें धरातल पर उतारा जाए। बैठक में शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण से लेकर आमेर के लाइट एंड साउंड शो, महाराणा प्रताप सर्किट, तनोट माता मंदिर, एआई आधारित पर्यटन ऐप और धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास सहित कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
पर्यटन विकास को मिलेगी नई रफ्तार, लंबित कार्य जल्द होंगे पूरे
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन भवन में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्थान को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए सभी लंबित प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि बड़े पर्यटन विकास प्रोजेक्ट्स का जल्द शिलान्यास कर उनका निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिल सके।
बैठक में राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, पर्यटन सचिव शुचि त्यागी, पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियाड़, वरिष्ठ अतिरिक्त निदेशक आनंद त्रिपाठी, अतिरिक्त निदेशक पवन जैन, राजेश शर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
72 बजट घोषणाओं पर तेज़ी से काम, ₹1.79 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024-25 से 2026-27 तक की 72 बजट घोषणाओं में से 6 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 19 पर कार्य जारी है। वहीं, वर्ष 2026-27 की 23 नई घोषणाओं में से 19 पर कार्य शुरू हो चुका है।
पर्यटन विभाग को अब तक 2,094 एमओयू (MoU) के माध्यम से ₹1,79,465 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 1,359 परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन पूरा हो चुका है और 332 परियोजनाओं का ग्राउंड ब्रेकिंग किया जा चुका है। सरकार ने दिसंबर 2026 तक 127 परियोजनाओं में ₹7,247.87 करोड़ के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी मीडिया से बात करते हुए।
शेखावाटी की हवेलियां बनेंगी ‘ओपन आर्ट गैलरी‘, विरासत संरक्षण पर विशेष फोकस
बैठक में “शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना-2026″ के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा हुई। योजना के तहत निजी हवेलियों में मौजूद दुर्लभ फ्रेस्को पेंटिंग्स का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा, ताकि पूरा शेखावाटी क्षेत्र ‘ओपन आर्ट गैलरी‘ के रूप में विकसित हो सके।
इसके अलावा अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के नवीनीकरण, ऐतिहासिक रविन्द्र मंच के पुनर्विकास, हेरिटेज कंसल्टेंट्स के एम्पैनलमेंट, ऐतिहासिक बावड़ियों के संरक्षण और विरासत संग्रहालयों के विकास की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
संग्रहालय अधिकारियों का अध्ययन दल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, कटक और केवड़िया के प्रमुख संग्रहालयों का भ्रमण करेगा, ताकि वहां की बेस्ट प्रैक्टिसेज राजस्थान में लागू की जा सकें।
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आस्था, इतिहास और तकनीक को जोड़कर पर्यटन का नया मॉडल
बैठक में आमेर किले के विश्वस्तरीय लाइट एंड साउंड शो की समीक्षा की गई। साथ ही ₹206.87 करोड़ की लागत वाले महाराणा प्रताप सर्किट को शीघ्र मूर्त रूप देने पर चर्चा हुई।
भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर को विश्वस्तरीय आस्था पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं रामदेवरा मंदिर और मालासेरी जैसे धार्मिक स्थलों पर सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास के निर्देश दिए गए।
पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए AI Enabled Tourism App की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके माध्यम से पर्यटकों को डिजिटल और स्मार्ट सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
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पैनोरमा को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने राजस्थान धरोहर प्राधिकरण द्वारा विकसित पैनोरमा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर इन पैनोरमा को सामुदायिक विरासत के रूप में विकसित किया जाए।
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