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उत्तर भारत में बारिश का कहर: केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड, यूपी में 26 जिले बाढ़ की चपेट में

केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड

बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से पैदल मार्ग बंद, यूपी में 10 से ज्यादा नदियां उफान पर

26 जिले बाढ़ की चपेट में, 4 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

मिर्जापुर में पुल डूबा, फर्रुखाबाद में हाईवे पर पानी

मध्य प्रदेश के दमोह में बिगड़े हालात, बिहार में 44 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित

बिहार में 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, 14 जिले, करीब 2,360 गांव बाढ़ प्रभावित

-विजय श्रीवास्तव-

जयपुर/उत्तराखंड/यूपी/दिल्ली/एमपी/बिहार । देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर मुसीबत बनकर सामने आया है। उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार तक भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। कहीं बादल फटने के बाद पहाड़ी रास्ते बंद हो गए, तो कहीं नदियों के उफान ने गांवों और शहरों को पानी में घेर लिया है।

सबसे चिंताजनक स्थिति केदारनाथ पैदल मार्ग पर बनी है, जहां शुक्रवार को बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड हुई और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से रास्ता बंद हो गया। वहीं उत्तर प्रदेश में 26 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और चार लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के दमोह में कई कॉलोनियों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात हैं, जबकि बिहार में 44 लाख के करीब लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

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केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटा, बोल्डर गिरने से रास्ता बंद

उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने के बाद हालात बिगड़ गए। तेज बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्र में लैंडस्लाइड हुई और भारी भरकम बोल्डर रास्ते पर आ गिरे। इससे केदारनाथ का पैदल मार्ग बाधित हो गया। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन की घटनाएं यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे मौसम में सबसे बड़ी चिंता यात्रियों की सुरक्षा और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाने की होती है।

यूपी में 10 से ज्यादा नदियां उफान पर, 26 जिले बाढ़ की चपेट में

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने गंगा और यमुना समेत 10 से अधिक नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया है। नदियों के उफान पर आने से प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। बाढ़ की स्थिति का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। चार लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और कई इलाकों में आवागमन तथा सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

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मिर्जापुर में पुल डूबा, फर्रुखाबाद में हाईवे जलमग्न

बारिश और बढ़ते जलस्तर का असर बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। मिर्जापुर में पुल पानी में डूब गया, वहीं फर्रुखाबाद में हाईवे पर पानी भर गया। ऐसे हालात में स्थानीय लोगों के सामने आवाजाही, जरूरी सामान की उपलब्धता और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने जैसी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।

MP में फिर सक्रिय हुआ मानसून, दमोह में बाढ़ जैसे हालात

मध्य प्रदेश में करीब तीन दिन के ब्रेक के बाद मानसूनी सिस्टम फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुरुवार रात भोपाल, नर्मदापुरम और विदिशा में भी बारिश हुई। बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

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दमोह की कई कॉलोनियों में भरा पानी

दमोह में स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। कई कॉलोनियों में पानी भर गया है और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

लगातार बारिश से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए जलभराव के बीच सुरक्षित रहना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

बिहार में 14 जिले बाढ़ प्रभावित, 44 लाख लोगों पर असर

बिहार में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बाढ़ का असर करीब 2,360 गांवों तक पहुंचा है और लगभग 44 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं।

27,954 लोग राहत शिविरों में पहुंचे

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत और बचाव कार्य जारी हैं। करीब 27,954 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। इन परिवारों के लिए फिलहाल राहत शिविर ही सुरक्षित ठिकाना बने हुए हैं। बाढ़ के बीच बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की जरूरतों का ध्यान रखना प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।

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चार राज्यों में बारिश ने बढ़ाई चिंता

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के हालात बताते हैं कि मानसून की सक्रियता एक बार फिर कई क्षेत्रों में चुनौती बन रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और रास्ते बंद होने, मैदानी क्षेत्रों में नदियों के उफान और बाढ़, जबकि शहरों में जलभराव ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

ऐसे समय में प्रशासन के साथ आम लोगों के लिए भी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करना और जोखिम वाले इलाकों से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

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