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जयपुर में BJP की बाड़ेबंदी, उदयपुर में कांग्रेस का आत्मविश्वास: नतीजों से पहले दोनों दलों की अलग-अलग रणनीति

जयपुर में BJP की बाड़ेबंदी, उदयपुर में कांग्रेस का आत्मविश्वास: नतीजों से पहले दोनों दलों की अलग-अलग रणनीति

जयपुर में भाजपा ने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी

उम्मीदवारों को दिल्ली रोड स्थित रिसॉर्ट में ठहराने की तैयारी

14 सितंबर को मतगणना,21 सितंबर को महापौर, 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव

भाजपा की रणनीति नतीजों के बाद संभावित बोर्ड गठन को ध्यान में रखकर बनाई

इधर उदयपुर में कांग्रेस के 80 प्रत्याशियों की बैठक आयोजित

कांग्रेस ने किया दावा कि उदयपुर में बन रहा उसका बोर्ड 

कांग्रेस नेताओं ने कहा पार्टी को बाड़ेबंदी की जरूरत नहीं, उन्हें किसी का डर नहीं

-विजय श्रीवास्तव-

जयपुर, dusrikhabar.com। नगर निगम चुनाव की मतगणना से पहले राजस्थान की सियासत में पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद तेज हो गई है। जयपुर में भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को दिल्ली रोड स्थित रिसॉर्ट में ठहराने की तैयारी की है, वहीं उदयपुर में कांग्रेस ने 80 उम्मीदवारों की बैठक कर बिना बाड़ेबंदी चुनाव जीतने का भरोसा जताया है।

एक तरफ भाजपा नतीजों के बाद बोर्ड गठन तक अपने संभावित विजेताओं को साथ रखने की रणनीति पर काम कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व अपने उम्मीदवारों के बीच जीत को लेकर आत्मविश्वास बढ़ाता नजर आया।

जयपुर में भाजपा ने प्रत्याशियों को किया एकजुट, रिसॉर्ट में ठहराने की तैयारी

जयपुर में भाजपा ने नगर निगम चुनाव के अपने पार्षद प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर शहर कार्यालय बुलाया। यहां से उम्मीदवारों को बसों के जरिए दिल्ली रोड स्थित एक रिसॉर्ट ले जाया गया। पार्टी ने प्रत्याशियों से 22 सितंबर तक जरूरी सामान साथ लाने के लिए कहा था।

भाजपा की यह पूरी कवायद केवल मतगणना तक सीमित नहीं मानी जा रही। 14 सितंबर को मतगणना, इसके बाद 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होना है। ऐसे में पार्टी नतीजों से लेकर बोर्ड गठन तक अपने संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की तैयारी में है।

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प्रशिक्षण शिविर के नाम पर प्रत्याशियों से संपर्क

पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर की जानकारी दी गई और दोपहर 12 बजे भाजपा कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार जयपुर के साथ प्रदेश के अन्य नगर निकायों में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई जा रही है। उदयपुर सहित कई जिलों में भी उम्मीदवारों को प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एक साथ रखने की तैयारी की गई है।

बहुमत का गणित बिगड़ा तो काम आएगी एकजुटता

नगर निकाय चुनाव में कई जगह मुकाबला करीबी रहने की संभावना के बीच भाजपा की रणनीति को बोर्ड गठन के संभावित गणित से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि किसी निकाय में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो कुछ पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

ऐसी स्थिति में भाजपा नहीं चाहती कि उसके संभावित विजयी पार्षद नतीजे आने के बाद दूसरे राजनीतिक दलों के संपर्क में जाएं। पार्टी की कोशिश है कि सभी उम्मीदवार एक साथ रहें और जरूरत पड़ने पर बोर्ड गठन को लेकर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके।

उदयपुर में कांग्रेस का दावा—बोर्ड हमारा बनेगा, बाड़ेबंदी की जरूरत नहीं

उधर उदयपुर में कांग्रेस ने अलग अंदाज में चुनावी तस्वीर पेश की। हिरणमगरी क्षेत्र के एक होटल में शनिवार को कांग्रेस के 80 पार्षद प्रत्याशियों की बैठक हुई। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीदवारों से वन-टू-वन चर्चा की और अलग-अलग वार्डों से चुनावी फीडबैक लिया।

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बैठक में मतदान प्रतिशत, संभावित जीत के अंतर और वार्डवार स्थिति पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाते हुए दावा किया कि पार्टी ने भाजपा के सामने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा है।

पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने का दावा

कांग्रेस शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ ने कहा कि पार्टी ने पूरी योजना के साथ चुनाव लड़ा और सभी उम्मीदवारों ने पूरी ताकत लगाई। उन्होंने भाजपा के मौजूदा बोर्ड के कामकाज को भी चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने मुद्दा बनाने की बात कही।

राठौड़ के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्ड में विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर मजबूती से जनता के बीच अपनी बात रखी।

हमें किसी का डर नहीं’—कांग्रेस का आत्मविश्वास

बैठक में राठौड़ ने कहा कि उदयपुर में कांग्रेस का बोर्ड बनने जा रहा है और पार्टी को बाड़ेबंदी की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी का डर नहीं है।

देहात कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने भी उम्मीदवारों के साथ संवाद किया। बैठक में पूर्व विधायक सज्जन कटारा, विवेक कटारा सहित पार्टी के पदाधिकारी और ब्लॉक अध्यक्ष मौजूद रहे।

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बैठक में सिर्फ उम्मीदवारों को प्रवेश, रिश्तेदार ने जताई नाराजगी

होटल में आयोजित बैठक को लेकर प्रवेश व्यवस्था भी सख्त रही। उम्मीदवारों के अलावा अन्य लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। इसी दौरान एक प्रत्याशी के रिश्तेदार को प्रवेश नहीं मिलने पर उसने नाराजगी जाहिर की और होटल में शोर-शराबा भी हुआ।

चुनाव के बाद असली कहानी सिर्फ जीत-हार की नहीं होती, बल्कि उन पार्षदों की भी होती है जो आने वाले दिनों में अपने-अपने वार्ड की जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करेंगे। जयपुर में दल अपने संभावित विजेताओं को संभालकर रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उदयपुर में कांग्रेस उम्मीदवारों के भरोसे और आत्मविश्वास को अपनी ताकत मान रही है। अब मतगणना ही तय करेगी कि किस पार्टी की रणनीति जमीन पर कितनी मजबूत साबित होती है।

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