
गीतांजलि हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धियां: जटिल सर्जरी से नई जिंदगी, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में सुरक्षित इलाज
माइक्रोसर्जरी की नई पहचान: फ्री-फ्लैप तकनीक से सिर, गर्दन और हाथ-पैरों के जटिल दोषों का सफल पुर्ननिर्माण
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत का संदेश: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर 150 विद्यार्थियों ने लिया जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा
मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित: गर्भावस्था में हाइडेटिड सिस्ट के दो दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन सफल
विशेषज्ञों की टीमवर्क से बेहतर इलाज: प्लास्टिक सर्जरी, गैस्ट्रो, स्त्री रोग और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के समन्वय ने बढ़ाया भरोसा
-माही राठौड़-
उदयपुर, dusrikhabar.com। गीतांजलि हॉस्पिटल ने चिकित्सा सेवाओं में विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के बेहतर समन्वय के साथ तीन अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अस्पताल में जहां जटिल फ्री-फ्लैप रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के जरिए गंभीर शारीरिक दोषों के पुनर्निर्माण में सफलता मिली, वहीं विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विद्यार्थियों और समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवाद और जागरूकता का संदेश दिया गया। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान सामने आए दो दुर्लभ हाइडेटिड सिस्ट के जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए, जिनमें मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित रहे।
ये उपलब्धियां न केवल गीतांजलि हॉस्पिटल की मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल विशेषज्ञता को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि कठिन परिस्थितियों में समय पर उपचार, संवेदनशील देखभाल और विशेषज्ञों की टीमवर्क मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।
जटिल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से मरीजों को नई उम्मीद
गीतांजलि हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने जटिल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। पिछले एक वर्ष में विभाग ने सिर एवं गर्दन तथा हाथ-पैरों के गंभीर टिश्यू डिफेक्ट्स के लिए कई फ्री-फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। इन उपचारों का उद्देश्य केवल शरीर के क्षतिग्रस्त हिस्से को ढंकना नहीं, बल्कि मरीज की संरचना, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना रहा।

माइक्रोसर्जरी से जटिल अंगों का पुर्ननिर्माण
विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. आशुतोष सोनी के मार्गदर्शन में प्रोफेसर डॉ. आशिष सिंघल ने ये जटिल प्रक्रियाएं कीं। फ्री-फ्लैप तकनीक में शरीर के एक हिस्से से रक्त आपूर्ति सहित टिश्यू लेकर दूसरे हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। जीभ, होंठ, गाल, जबड़े तथा हाथ-पैरों के जटिल दोषों में इस तकनीक का उपयोग किया गया।
विशेष रूप से सिर एवं गर्दन के कैंसर के बाद पुर्ननिर्माण में बोलने, निगलने, चबाने और चेहरे की बनावट को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। विभाग की यह उपलब्धि उन्नत माइक्रोसर्जिकल विशेषज्ञता और मरीजों को बेहतर जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आत्महत्या पर चुप्पी नहीं, संवाद जरूरी
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर गीतांजलि कॉलेज एवं स्कूल ऑफ नर्सिंग, उदयपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था—मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय उस पर बातचीत करना जरूरी है। इस वर्ष की थीम “Changing the narrative on suicide – Start the conversation” के माध्यम से विद्यार्थियों को जोखिम के संकेत पहचानने और जरूरतमंद व्यक्ति के साथ संवेदनशील संवाद करने की जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों ने समझायी मानसिक स्वास्थ्य और मदद की अहमियत; 150 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में करीब 150 विद्यार्थियों के साथ प्राचार्य प्रो. डॉ. आलोक रावत, प्रो. डॉ. दिनेश कुमार शर्मा, प्रो. कमलेश जोशी और विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. जयेश पाटीदार सहित फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने मानसिक संकट, जोखिम कारकों, चेतावनी संकेतों और प्रभावित व्यक्ति को सहयोग देने के तरीकों पर जानकारी साझा की।
आशाधाम आश्रम में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके साथ गायन, नृत्य और ड्राइंग जैसी गतिविधियों ने जागरूकता को रचनात्मक रूप दिया। प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी दिए गए।
गर्भावस्था में दो जटिल हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी सफल
गर्भावस्था के दौरान किसी गंभीर बीमारी की सर्जरी अपने आप में बड़ी चुनौती होती है, लेकिन गीतांजलि हॉस्पिटल, उदयपुर के विशेषज्ञों ने ऐसे दो दुर्लभ मामलों में सफल उपचार कर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित रखा। दोनों महिलाओं में हाइडेटिड सिस्ट पाए गए थे और विशेषज्ञ टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सर्जरी का निर्णय लिया।

पहले मामले में 18 सेंटीमीटर का सिस्ट
पहली मरीज 12-13 सप्ताह की IVF प्रेग्नेंसी में थीं और प्लीहा में करीब 18 सेंटीमीटर का बड़ा हाइडेटिड सिस्ट था। दर्द के साथ सिस्ट के फटने का खतरा भी था। वरिष्ठ गैस्ट्रो, लिवर एवं HPB सर्जन डॉ. हेमंत जैन की टीम ने प्लीहा को सिस्ट सहित निकालकर गर्भावस्था को सुरक्षित रखा।
दूसरे मामले में 16 सप्ताह की गर्भवती महिला के लिवर और पेट में कई बड़े सिस्ट मिले। सर्जरी के दौरान लिवर से दो और पेट से एक सिस्ट निकाला गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुबाला चौधरी और डॉ. दिव्या चौधरी ने भ्रूण की निगरानी की, जबकि एनेस्थीसिया टीम ने उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सुरक्षित बनाया।
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