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जन्माष्टमी पर देशभर में कृष्ण भक्ति की लहर: जयपुर से मथुरा, द्वारका और वृंदावन तक मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

जन्माष्टमी पर देशभर में कृष्ण भक्ति की लहर: जयपुर से मथुरा, द्वारका और वृंदावन तक मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

आज देशभर में मनाया जा रहा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य पर्व 

गोविंददेवजी, खाटूश्यामजी, सांवलिया सेठ, मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की विशेष रौनक 

जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर में तड़के 4 बजे से विशेष दर्शन शुरू

बांके बिहारी मंदिर में सालाना विशेष मंगला आरती होगी आधी रात के बाद 

द्वारका में मध्यरात्रि आरती और जन्मोत्सव मुख्य आकर्षण 

नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर दर्शन व्यवस्था बदली 

ISKCON दिल्ली में 108 कलश महाभिषेक और 108 महाआरती का आयोजन 

ISKCON बेंगलुरु में मध्यरात्रि महाआरती और विशेष अभिषेक

विजय श्रीवास्तव/नवीन सक्सेना/संदीप बहल/सोनिया/महावीर/माही राठौड़

जयपुर/मथुरा/नई दिल्ली/बैंगलुरु/द्वारका/केरल, dusrikhabar.com। आज 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से मंदिरों में दर्शन के लिए कतारें हैं, घरों में बाल गोपाल के लिए झूले सजाए गए हैं और शाम ढलते ही भजन-कीर्तन, झांकियों और धार्मिक आयोजनों की रौनक बढ़ रही है। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के उस पवित्र क्षण का इंतजार लाखों श्रद्धालु कर रहे हैं।

सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक गोविंद देवजी में विभिन्न आयोजन…

इस बार जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उन परिवारों और श्रद्धालुओं के लिए भावनाओं से भरा अवसर है, जो अपने बच्चों को कान्हा की बाल लीलाओं की कहानियां सुनाते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। किसी के लिए कृष्ण आस्था हैं, किसी के लिए बचपन की स्मृति और किसी के लिए जीवन में उम्मीद और मुस्कान का नाम।

देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में आज अलग-अलग परंपराओं और स्थानीय संस्कृति के अनुसार विशेष आयोजन हो रहे हैं।

जयपुर: गोविंददेवजी के दरबार में तड़के से भक्तों की कतार

जयपुर के आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव सुबह की मंगला झांकी से शुरू हुआ। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 4 सितंबर को मंगला झांकी सुबह 4 बजे से 6:30 बजे तक, इसके बाद धूप, श्रृंगार, राजभोग, ग्वाल, संध्या और शयन झांकियां आयोजित होंगी। रात में 11 बजे से 11:15 बजे तक मंगला आरती और मध्यरात्रि 12 से 12:30 बजे तक तिथि पूजा व अभिषेक होगा। गोविंददेवजी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए मंदिर और प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

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यहां जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है। जयपुर के हजारों परिवारों के लिए यह साल की उन रातों में से एक है, जब बच्चे कृष्ण बनकर सजते हैं, घरों में माखन-मिश्री का भोग लगता है और पूरा परिवार कान्हा के जन्म का इंतजार करता है।

रात 12 बजे जन्मोत्सव और अभिषेक

आपके उपलब्ध आयोजन विवरण के अनुसार, रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के अवसर पर 31 तोपों की हवाई गर्जना और आतिशबाजी की जाएगी। इसके बाद पंचामृत अभिषेक होगा। अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, बूरा और शहद सहित बड़ी मात्रा में सामग्री तैयार की गई है।

जयपुर मेट्रो भी आधी रात के बाद तक चलेगी

जन्माष्टमी पर परकोटे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जयपुर में यातायात व्यवस्था बदली गई है। जयपुर मेट्रो के फेरे बढ़ाकर 218 किए गए हैं और सेवा देर रात तक जारी रहेगी। अंतिम मेट्रो मानसरोवर से रात 1 बजे और बड़ी चौपड़ से 1:10 बजे रवाना होगी। 

जन्माष्टमी पर खाटूश्यामजी में उमड़ा आस्था का सैलाब, 17 KM मार्ग नो व्हीकल जोन

सीकर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रसिद्ध खाटूश्यामजी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देशभर से आए भक्त रींगस से पैदल खाटूधाम पहुंच रहे हैं। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने रींगस से खाटूश्यामजी तक 17 किलोमीटर लंबे मार्ग को नो व्हीकल जोन घोषित किया है।

इस मार्ग पर केवल एंबुलेंस और पुलिस वाहनों को आवाजाही की अनुमति है। रींगस रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से सुबह से ही हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर रहे हैं। जन्माष्टमी के साथ वीकेंड होने के कारण भक्तों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

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भीड़ को नियंत्रित करने और सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर देने के लिए आज VIP दर्शन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ RAF बल तैनात किया गया है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे व्यवस्था का पालन करें, धैर्य रखें और पैदल यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। खाटूश्यामजी में जन्माष्टमी का यह उत्सव भक्तों के लिए आस्था, भक्ति और सामूहिक श्रद्धा का बड़ा अवसर बन गया है।

सांवलिया सेठ मंदिर में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी, रात 8 बजे ड्रोन शो

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर चित्तोड़गढ़ के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में तैयारियां अंतिम दौर में हैं। 4 सितंबर को मंदिर परिसर को फूलों की आकर्षक सजावट और रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए रात 8 बजे विशेष ड्रोन शो आयोजित होगा, जिसे पार्किंग क्षेत्र से देखा जा सकेगा।

रात 12 बजे जन्मोत्सव, आरती के बाद आतिशबाजी

रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर विशेष आरती की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं को पंजेरी प्रसाद वितरित किया जाएगा। जन्मोत्सव के उल्लास में भव्य आतिशबाजी भी होगी। मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों को लेकर भक्तों में खास उत्साह है।

VIP दर्शन बंद, बड़े वाहनों की एंट्री पर रोक

श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए 4 सितंबर को VIP दर्शन बंद रहेंगे। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के तहत चौपहिया एवं बड़े वाहनों के मंडफिया गांव में प्रवेश पर रोक रहेगी। मंदिर मंडल ने भीड़ नियंत्रण, दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। जन्माष्टमी पर सांवलिया सेठ धाम में भक्ति, रोशनी और कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य संगम देखने को मिलेगा।

मथुरा-वृंदावन: जहां जन्माष्टमी त्योहार नहीं, कृष्ण से जुड़ने का अनुभव

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और बाल लीलाओं की भूमि वृंदावन में आज जन्माष्टमी का सबसे गहरा आध्यात्मिक रंग दिखाई दे रहा है।

भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार मथुरा, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण जन्मभूमि, बांके बिहारी, इस्कॉन, प्रेम मंदिर और राधारमण सहित प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। मंदिर फूलों और रोशनी से सजाए गए हैं तथा भजन, कीर्तन, रासलीला और विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जा रहा है।

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मध्यरात्रि करीब आते ही ब्रज की गलियों में जय श्रीकृष्ण और नंद के आनंद भयो के जयकारे गूंजने लगेंगे।

यह वह क्षण होगा जब हजारों परिवार अपने बच्चों को गोद में लेकर कान्हा के जन्म की झांकी देखेंगे और कई बुजुर्ग शायद अपने बचपन की जन्माष्टमी को फिर से याद करेंगे।

बांके बिहारी मंदिर: साल में एक बार होने वाली मंगला आरती का इंतजार

वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी की विशेष तैयारियां की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 4 और 5 सितंबर की रात 1:55 बजे मंगला आरती होगी। इस आरती के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रखने का निर्णय भी लिया गया है। मंदिर परिसर से बाहर रहने वाले भक्तों के लिए लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए दर्शन की सुविधा की जानकारी दी गई है।

बांके बिहारी की मंगला आरती का अपना विशेष महत्व है। साल में सिर्फ एक बार होने वाले इस दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से वृंदावन पहुंचते हैं।

कृष्ण जन्मभूमि: आधी रात को होगा मुख्य जन्मोत्सव

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आज रात जन्मोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यरात्रि का अभिषेक और पूजा रहेगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार जन्माष्टमी पर मथुरा में मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। कृष्ण जन्मभूमि समेत ब्रज के प्रमुख मंदिरों में भजन, कीर्तन, रासलीला, विशेष प्रार्थना और मध्यरात्रि जन्मोत्सव आयोजित हो रहे हैं। यहां पहुंचने वाले कई श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल दर्शन की यात्रा नहीं होती। कई परिवार वर्षों से मनोकामना पूरी होने पर मथुरा आने की परंपरा निभाते हैं।

द्वारका: कृष्ण की नगरी में आधी रात को गूंजेगी आरती

गुजरात की द्वारका में जन्माष्टमी का उत्सव भगवान कृष्ण की नगरी की पहचान से जुड़ा है। भारत सरकार के Incredible India पोर्टल के अनुसार 4 सितंबर को द्वारका में जन्माष्टमी उत्सव मनाया जा रहा है। द्वारकाधीश मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। मध्यरात्रि आरती और जन्मोत्सव मुख्य आकर्षण होंगे। इसके साथ भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कृष्ण लीला से जुड़े आयोजन भी होंगे।

द्वारका में यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वे उस नगरी में कृष्ण को याद करते हैं, जिसे परंपरा में उनका राज्य माना जाता है।

नाथद्वारा: श्रीनाथजी के दरबार में बदली दर्शन व्यवस्था

राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में भी जन्माष्टमी और नंदोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां हैं। मंदिर से संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी महोत्सव का कार्यक्रम दर्ज है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार जन्माष्टमी और नंदोत्सव के चलते 4 और 5 सितंबर को सामान्य दर्शन पास, मनोरथ पास और प्रोटोकॉल पास जारी नहीं किए जाएंगे तथा दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इसका सीधा उद्देश्य भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना है। 

श्रीनाथजी के दर्शन के लिए आने वाले बुजुर्ग, बच्चे और परिवार इस दिन विशेष भाव से ठाकुरजी के सामने पहुंचते हैं। उनके लिए कुछ पल की झलक भी घंटों की यात्रा को सार्थक बना देती है।

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दिल्ली ISKCON: 108 कलश, 108 आरतियां और मध्यरात्रि जन्मोत्सव

दिल्ली के ISKCON मंदिर, ईस्ट ऑफ कैलाश में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव आयोजित किया जा रहा है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्यक्रम में 108 कलशों से महाभिषेक, दिन और रात में 108 महाआरतियां, कीर्तन, प्रसाद सेवा और मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव शामिल है। मंदिर के अनुसार हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद सेवा की भी व्यवस्था है। यहां जन्माष्टमी का एक खास पहलू यह भी है कि देश-विदेश के भक्त ऑनलाइन माध्यम से भी इस उत्सव से जुड़ सकते हैं।

ISKCON बेंगलुरु: आधी रात तक खुले रहेंगे मंदिर के द्वार

बेंगलुरु में ISKCON Hare Krishna Hill और अन्य केंद्रों पर जन्माष्टमी के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ISKCON बेंगलुरु की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 4 सितंबर को दर्शन मध्यरात्रि तक जारी रहेंगे। रात में विशेष अभिषेक, कीर्तन, आरती और पालकी उत्सव आयोजित होंगे। Hare Krishna Hill पर विशेष अभिषेक रात करीब 9:30 बजे से और मध्यरात्रि में महा मंगल आरती होगी।

व्हाइटफील्ड स्थित आयोजन में 5253 भोग अर्पण, बच्चों के लिए गीता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित कई आयोजन रखे गए हैं। यहां खास बात यह है कि बच्चों और युवाओं को भी जन्माष्टमी से जोड़ने के लिए संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और डिजिटल कार्यक्रमों को उत्सव का हिस्सा बनाया गया है।

उडुपी से लेकर केरल तक: कृष्ण भक्ति के अलग-अलग रंग

जन्माष्टमी का उत्सव केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत में भी कृष्ण जन्मोत्सव अपनी स्थानीय परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उडुपी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी परंपराएं अलग धार्मिक-सांस्कृतिक रंग लेकर सामने आती हैं। इस वर्ष 4 सितंबर को वहां कृष्ण पक्ष अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग दर्ज है।

यानी देश के अलग-अलग हिस्सों में पूजा की शैली, मंदिरों की परंपरा और उत्सव का तरीका भले अलग हो, लेकिन कान्हा के प्रति भाव एक ही है।

दिल्ली द्वारका में सजेगी ‘कृष्ण नगरी’, तकनीक से दिखेगी कृष्ण लीला

दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में 3 और 4 सितंबर को जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के लिए बड़े क्षेत्र में ‘कृष्ण नगरी’ तैयार की गई है। यहां आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिलेगा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में 8K/3D प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कृष्ण की शिक्षाओं व लीलाओं को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करने की तैयारी की गई है।

यह पहल खास तौर पर नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है—ताकि मोबाइल और डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी पीढ़ी कृष्ण की कहानी को सिर्फ किताब में नहीं, बल्कि अनुभव के रूप में भी समझ सके।

आज की रात: मंदिरों में जागेगी आस्था, घरों में झूलेगा लड्डू गोपाल

जन्माष्टमी की सबसे खूबसूरत तस्वीर शायद मंदिरों की भीड़ नहीं, बल्कि वह घर है जहां माता-पिता अपने बच्चे को कृष्ण की तरह सजाते हैं। कहीं मां अपने हाथों से नन्हे कान्हा का मुकुट तैयार कर रही है, कहीं पिता घर में छोटा सा झूला सजा रहे हैं और कहीं दादा-दादी बच्चों को कृष्ण की बाल लीलाओं की कहानी सुना रहे हैं।

यही जन्माष्टमी की असली आत्मा है—पीढ़ियों को जोड़ना।

कृष्ण का जन्मोत्सव हमें केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं देता, बल्कि जीवन के उस संदेश की याद भी दिलाता है जिसमें प्रेम, करुणा, मित्रता, साहस और धर्म के साथ खड़े रहने की प्रेरणा मिलती है। और जब रात के 12 बजेंगे, शंखनाद होगा, घंटियां बजेंगी और मंदिरों में आरती की लौ उठेगी, तब देश के करोड़ों घरों में एक ही भावना गूंजेगी—

नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…

📍 जन्माष्टमी 2026: देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में आज क्या खास?

स्थान/मंदिर आज का प्रमुख आयोजन
गोविंददेवजी, जयपुर सुबह 4 बजे से विशेष दर्शन, रात में तिथि पूजा व अभिषेक
कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा मध्यरात्रि जन्मोत्सव, विशेष पूजा और अभिषेक
बांके बिहारी, वृंदावन रात 1:55 बजे विशेष मंगला आरती
द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका मध्यरात्रि जन्मोत्सव, आरती, भजन और सांस्कृतिक आयोजन
श्रीनाथजी, नाथद्वारा विशेष जन्माष्टमी दर्शन, बदली हुई दर्शन व्यवस्था
ISKCON दिल्ली 108 कलश महाभिषेक, 108 महाआरती और मध्यरात्रि जन्मोत्सव
ISKCON बेंगलुरु विशेष अभिषेक, कीर्तन और मध्यरात्रि महाआरती
दिल्ली द्वारका कृष्ण नगरी, 3D/तकनीकी प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक आयोजन

नोट: मंदिरों की दर्शन और पूजा व्यवस्थाएं स्थानीय परंपरा, सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रशासन के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। खासकर मध्यरात्रि के कार्यक्रमों में जाने वाले श्रद्धालु स्थानीय प्रशासन/मंदिर की ताजा सूचना जरूर देखें।

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