
भारत की चिकित्सा विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प, 760 स्टूडेंट्स को मिली उपाधि…
होम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में युवाओं को मिला सेवा और शोध का संदेश
होम्योपैथी विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह जयपुर के बिड़ला सभागार में सम्पन्न
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भारत को चिकित्सा ज्ञान की महान परंपरा का केंद्र बताया
युवा चिकित्सकों से नैतिकता, ईमानदारी और अनुसंधान को अपनाने का किया आह्वान
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव बोले ‘स्वस्थ भारत‘ के निर्माण में होम्योपैथी की भूमिका खास
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, duarikhabar.com। डिग्री केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी होती है। होम्योपैथी विश्वविद्यालय, जयपुर के दीक्षांत समारोह में यही संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने युवाओं से चिकित्सा सेवा में नैतिकता, ईमानदारी और अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत सदियों से चिकित्सा ज्ञान की महान परंपरा का केंद्र रहा है और इस विरासत को आगे बढ़ाना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
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इस अवसर पर BHMS, MD (होम्योपैथी) और PhD के 760 स्टूडेंट्स को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें से शुरुआती 20 स्टूडेंट्स को राज्यपाल ने हरिभाऊ ने डिग्री प्रदान कर आशीर्वाद वचन दिया। समारोह में चिकित्सा क्षेत्र की उत्कृष्ट प्रतिभाओं को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए। इनमें विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. के.सी. भिण्डा और होम्योपैथिक विश्वविद्यालय के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमर सिंह शेखावत को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

होम्योपैथिक विश्वविद्यालय के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमर सिंह शेखावत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित।
इस अवसर पर होम्योपैथिक विश्वविद्यालय के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमर सिंह शेखावत ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए संस्थापक डॉ. गिरेन्द्र पाल के योगदान को स्मरण किया।
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विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. के.सी. भिण्डा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित।
भारत की चिकित्सा परंपरा पर गर्व, शोध आधारित होम्योपैथी को बढ़ाने का आह्वान
जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित होम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारत की पहचान केवल प्राचीन संस्कृति से नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान और ज्ञान की समृद्ध परंपरा से भी रही है।

हौम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े उद्बोधन देते हुए।
उन्होंने कहा कि हमारे संस्कारों में नैतिकता और ईमानदारी सदैव रही है तथा चिकित्सा क्षेत्र में इन मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे होम्योपैथी को अनुसंधान आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं ताकि यह चिकित्सा पद्धति और अधिक प्रभावी बन सके।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि रोगी को स्वस्थ करने वाली हर प्रभावी चिकित्सा पद्धति का सम्मान होना चाहिए और चिकित्सा का अंतिम उद्देश्य मानव सेवा है।
‘स्वस्थ भारत‘ के निर्माण में आयुष और होम्योपैथी की अहम भूमिका
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि आज भारत की आयुष चिकित्सा पद्धतियां वैश्विक स्तर पर तेजी से स्वीकार की जा रही हैं और होम्योपैथी विश्व की सबसे अधिक स्वीकार्य चिकित्सा प्रणालियों में शामिल है।
उन्होंने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक वैज्ञानिक सोच को अपनाकर विकसित भारत और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

जयपुर के हौम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपाधि ग्रहण करते हुए विवि के संस्थापक डॉ गिरेंद्र पाल की पोती।
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में पूर्व सांसद एवं विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. मनोज राजोरिया तथा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना में डॉ. गिरेंद्रपाल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से राजस्थान में विश्व का पहला होम्योपैथी विश्वविद्यालय स्थापित हुआ।
इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने विद्यार्थियों को दीक्षांत उपाधियां प्रदान कीं।
साथ ही चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड‘ से सम्मानित किया गया।

हौम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा स्टूडेंट्स को डिग्रियां लेते हुए स्टूडेंट्स।
चिकित्सा केवल पेशा नहीं, सेवा का संकल्प
दीक्षांत समारोह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि एक चिकित्सक का दायित्व केवल दवा देना नहीं, बल्कि मरीज का विश्वास, संवेदना और उम्मीद बनना भी है। समारोह ने युवा चिकित्सकों को यह प्रेरणा दी कि वे ज्ञान, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों के साथ समाज की सेवा करें और भारत की गौरवशाली चिकित्सा परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष एवं विशेष अतिथि डॉ. तारकेश्वर जैन ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा की जा रही विभिन्न प्रक्रियाओं एवं सुधारों की भी जानकारी दी। इस दीक्षांत समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक होम्योपैथ उपस्थित रहे । कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. ए. एन. माथुर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
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