
जयपुर से उदयपुर तक मेयर की कुर्सी का सियासी गणित: 5 शहरों में कहीं बहुमत तो कहीं निर्दलीयों की निर्णायक भूमिका…
बीकानेर-उदयपुर में 21 तो, जयपुर-कोटा और जोधपुर में 25 सितम्बर को नए मेयर की घोषणा
जयपुर में सुनील कोठारी, कोटा में अनुसुइया गोस्वामी और उदयपुर में पारस सिंघवी भाजपा के मेयर वहीं, बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला होंगे मेयर
जोधपुर में निर्दलियों के हाथों में होगी सत्ता की डोर भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सोलंकी में कांटे की टक्कर
जोधपुर में रिपोलिंग के बाद भाजपा को कांग्रेस पर एक सीट की बढ़त मिली
बीकानेर में कांग्रेस के बागी नवरतन डागा का नामांकन वापस लेना महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा
जयपुर में चार रिपोलिंग वाले वार्ड कांग्रेस ने जीतकर अपना आंकड़ा 53 से बढ़ाकर 57 किया
2020 के मुकाबले जयपुर, जोधपुर और कोटा की निगम संरचना बदली
विजय श्रीवास्तव
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान के पांच बड़े शहरों—जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर—में नगर निगम चुनाव के बाद अब अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा मेयर के चुनाव की है। जनता ने पार्षद चुन दिए हैं, लेकिन नगर निगम की सत्ता की अंतिम तस्वीर अब पार्षदों के मतदान से सामने आएगी।
पांचों शहरों का चुनावी गणित एक जैसा नहीं है। जयपुर, कोटा और उदयपुर में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, बीकानेर में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से ऊपर है, जबकि जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी मुकाबला है और वहां गैर-कांग्रेसी-भाजपा पार्षद निर्णायक स्थिति में हैं।
राज्य के 2026 निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कई शहरों में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन नगर निगमों के भीतर सीटों का गणित अलग-अलग तस्वीर पेश करता है। यही कारण है कि मेयर चुनाव में केवल प्रत्याशी की राजनीतिक पहचान ही नहीं, बल्कि पार्षदों की संख्या, दलगत एकजुटता, निर्दलीयों की भूमिका और बागी उम्मीदवारों को साधने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
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21 सितम्बर और 25 सितम्बर को नए मेयर के नामों का ऐलान
आपको बता दें कि उदयपुर और बीकानेर शहरों में मेयर का चुनाव सोमवार, 21 सितम्बर 2026 को होना है और इन शहरों में इसी दिन नतीजों की घोषणा कर नए मेयर का ऐलान होगा। वहीं दूसरी ओर जयपुर, कोटा और जोधपुर के कुछ पोलिंग बूथों पर रिपोलिंग के कारण शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026 को मेयर के चुनाव होकर इसी दिन मतगणना के बाद नए मेयर के नाम की घोषणा की जाएगी।
जयपुर: 78 पार्षदों के साथ भाजपा का स्पष्ट बहुमत, सुनील कोठारी मैदान में
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और निर्दलीयों के 15 पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 76 है। यानी भाजपा के पास बहुमत से दो सीट अधिक हैं। भाजपा ने पूर्व शहर अध्यक्ष सुनील कोठारी को मेयर प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने सुनीता मावर को मैदान में उतारा है।
मेयर चुनाव का गणित
जयपुर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सीटों का अंतर है। भाजपा 78 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है। कांग्रेस के पास 57 सीटें हैं और 15 निर्दलीय पार्षद अलग खड़े हैं। इसलिए यहां राजनीतिक चर्चा का केंद्र बोर्ड बनाने की क्षमता से अधिक भाजपा के भीतर एकजुटता और कांग्रेस की रणनीति पर है।
कांग्रेस की ओर से यह दावा किया गया है कि कुछ भाजपा पार्षद उसके संपर्क में हैं, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दलबदल या क्रॉस-वोटिंग के दावों को फिलहाल राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2020 से तुलना
2020 में जयपुर दो निगमों—ग्रेटर और हेरिटेज—में बंटा था। जयपुर ग्रेटर में भाजपा ने 88 और कांग्रेस ने 49 सीटें जीती थीं, जबकि जयपुर हेरिटेज में कांग्रेस 47 और भाजपा 42 सीटों पर रही थी। इस बार दोनों हिस्सों को मिलाकर एक 150 सदस्यीय निगम में भाजपा 78 और कांग्रेस 57 पर है। इसलिए 2020 और 2026 की तुलना करते समय निगमों की संरचना में बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
राजनीतिक गणित: भाजपा के पास बहुमत है; कांग्रेस के सामने चुनौती अपने 57 पार्षदों को एकजुट रखने और विपक्षी भूमिका को प्रभावी बनाने की है। 15 निर्दलीय संख्या में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भाजपा की मौजूदा संख्या उसे बहुमत के पार रखती है।
जोधपुर: 45 बनाम 44, मेयर की कुर्सी के लिए 11 पार्षदों का गणित महत्वपूर्ण
जोधपुर इस पांचों शहरों में सबसे अलग राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहा है। 100 सदस्यीय नगर निगम में रिपोलिंग के बाद भाजपा 45 और कांग्रेस 44 सीटों पर पहुंची है, जबकि 11 सीटें निर्दलीय/अन्य के पास हैं। बहुमत के लिए 51 पार्षद चाहिए।
भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को मेयर प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी ने पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था।
रिपोलिंग ने बदल दिया समीकरण
पहले 99 वार्डों के परिणाम में भाजपा और कांग्रेस 44-44 पर थीं। वार्ड 50 की रिपोलिंग में भाजपा उम्मीदवार की जीत के बाद भाजपा का आंकड़ा 45 हो गया। इससे भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन बहुमत से अभी भी छह सीट दूर है।
2020 में तस्वीर बिल्कुल अलग थी
2020 में जोधपुर दो निगमों—नॉर्थ और साउथ—में विभाजित था। नॉर्थ में कांग्रेस ने 53 और भाजपा ने 19 सीटें जीती थीं, जबकि साउथ में भाजपा 43 और कांग्रेस 29 पर रही थी। दोनों निगमों को मिलाकर कांग्रेस 82 और भाजपा 62 सीटों पर थी। 2026 में एकीकृत 100 सदस्यीय निगम में दोनों पार्टियां लगभग बराबरी पर आ गई हैं।
राजनीतिक गणित
जोधपुर में कोई भी प्रमुख दल अपने दम पर बहुमत में नहीं है। इसलिए यहां मेयर चुनाव का केंद्र निर्दलीय और अन्य पार्षद होंगे। सात निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा ने बोर्ड के लिए 52 का दावा किया है, लेकिन मेयर चुनाव में प्रत्येक पार्षद का मतदान अलग से निर्णायक होगा।
जोधपुर में पार्टी प्रत्याशियों के साथ-साथ 11 गैर-भाजपा-कांग्रेस पार्षदों का रुख और दोनों दलों की अपने पार्षदों को साथ रखने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
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कोटा: 55 सीटों के साथ भाजपा बहुमत में, अनुसुईया गोस्वामी बनाम सुनीता सुमन
कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा ने 55 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 39 सीटें और निर्दलीयों को 4 सीटें मिली हैं। बहुमत का आंकड़ा 51 है।
भाजपा ने वार्ड 98 की पार्षद अनुसुईया गोस्वामी को मेयर प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने वार्ड 17 की पार्षद सुनीता सुमन को मैदान में उतारा है। मेयर चुनाव 25 सितंबर को होना है।
55 सीटों का क्या मतलब?
भाजपा बहुमत से चार सीट आगे है। कांग्रेस के पास 39 और निर्दलीयों के पास 4 सीटें हैं। इसलिए कोटा में भी मुख्य राजनीतिक सवाल बोर्ड गठन के बजाय पार्षदों की एकजुटता और मेयर प्रत्याशी के पक्ष में मतदान का है।
अनुसुईया गोस्वामी का संगठन में लंबा अनुभव और स्थानीय भाजपा संगठन से जुड़ाव उनके राजनीतिक प्रोफाइल का हिस्सा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी महिला पार्षद सुनीता सुमन को उम्मीदवार बनाकर मुकाबला बनाया है।
2020 में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत था
2020 में कोटा दो निगमों—कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण—में विभाजित था। कोटा उत्तर में कांग्रेस ने 47 और भाजपा ने 14 सीटें जीती थीं। कोटा दक्षिण में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 36-36 सीटें मिली थीं और 8 सीटें निर्दलीयों के पास थीं।
2026 में एकीकृत 100 वार्डों वाले निगम में भाजपा का 55 सीटों तक पहुंचना 2020 की तुलना में कोटा के नगर निगम गणित में बड़ा बदलाव दर्शाता है।
राजनीतिक गणित: कोटा में भाजपा के पास बहुमत है और कांग्रेस के पास 39 पार्षद। चार निर्दलीय संख्या में छोटे हैं, लेकिन राजनीतिक समीकरणों में उनकी भूमिका परिस्थितियों के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकती है।
बीकानेर: 42 सीटों के साथ कांग्रेस का बहुमत, लेकिन बागी नामांकन ने बढ़ाई थी बेचैनी
बीकानेर पांचों शहरों में ऐसा निगम है जहां कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27 और निर्दलीय व अन्य के 11 पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 41 है।
कांग्रेस ने अनिल कल्ला को मेयर प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को उम्मीदवार बनाया है।
नवरतन डागा के नामांकन ने बढ़ाई थी हलचल
कांग्रेस के पार्षद नवरतन डागा ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के सामने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया था। इससे कांग्रेस के भीतर संभावित क्रॉस-वोटिंग की चर्चा तेज हुई थी। बाद में डागा ने नामांकन वापस ले लिया। इसके साथ कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के सामने मौजूद यह आंतरिक चुनौती फिलहाल समाप्त हो गई।
पांच साल पहले भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी
2019 में बीकानेर के 80 वार्डों में भाजपा 38 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, जबकि कांग्रेस के पास 30 और निर्दलीयों के पास 11 सीटें थीं। उस समय भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की थी।
2026 में तस्वीर उलट गई—कांग्रेस 42 सीटों के साथ बहुमत में पहुंची और भाजपा 27 सीटों पर रह गई।
राजनीतिक गणित: बीकानेर में कांग्रेस के पास बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अतिरिक्त एक सीट भी है। इसलिए यहां सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अब कांग्रेस के भीतर एकजुटता बनाए रखने का है। नवरतन डागा का नामांकन वापस लेना इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा।
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उदयपुर: 53 सीटों के साथ भाजपा का स्पष्ट बहुमत, पारस सिंघवी के सामने कांग्रेस की पूनम कंवर
उदयपुर में भाजपा ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस के खाते में 23, निर्दलीयों के खाते में 3 और माकपा के खाते में 1 सीट गई है। बहुमत का आंकड़ा 41 है।
भाजपा ने पारस सिंघवी को मेयर प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस की ओर से डॉ. पूनम कंवर राठौड़ प्रत्याशी हैं।
53 सीटें भाजपा को कितनी बढ़त देती हैं?
भाजपा बहुमत से 12 सीट ऊपर है। कांग्रेस 23 सीटों के साथ विपक्ष में है। तीन निर्दलीय और एक माकपा पार्षद मौजूद हैं, लेकिन भाजपा की मौजूदा संख्या उसे बहुमत के लिए इन पर निर्भर नहीं बनाती।
हालांकि भाजपा के भीतर मेयर पद के नाम को लेकर पारस सिंघवी से पहले दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर सहित कई नामों पर चर्चा हुई थी। पार्टी ने पार्षदों से पसंदीदा नामों पर राय भी ली थी। इससे यह जरूर सामने आया कि बहुमत होने के बावजूद उम्मीदवार चयन को लेकर संगठन के भीतर राजनीतिक गतिविधि काफी तेज थी।
2019 से उदयपुर की तस्वीर
2019 में 70 वार्डों वाले उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने 44 और कांग्रेस ने 26 सीटें जीती थीं। 2026 में वार्डों की संख्या बढ़कर 80 हुई और भाजपा का आंकड़ा 53 तथा कांग्रेस का 23 हो गया। यानी वार्डों की संख्या बढ़ने के कारण सीधे सीट-सेट की तुलना सावधानी से करनी होगी, लेकिन भाजपा की बहुमत स्थिति बरकरार रहने के साथ उसका सीट आंकड़ा बढ़ा है।
राजनीतिक गणित: उदयपुर में भाजपा का बहुमत स्पष्ट है। यहां मेयर चुनाव का मुख्य राजनीतिक सवाल बोर्ड के बहुमत से अधिक भाजपा के भीतर उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की एकजुटता और नए बोर्ड की राजनीतिक प्राथमिकताओं का है।
पांचों शहरों का एक नजर में सियासी गणित
| शहर | कुल वार्ड | भाजपा | कांग्रेस | अन्य | बहुमत | मेयर प्रत्याशी |
| जयपुर | 150 | 78 | 57 | 15 | 76 | भाजपा–सुनील कोठारी / कांग्रेस–सुनीता मावर |
| जोधपुर | 100 | 45 | 44 | 11 | 51 | भाजपा–प्रसन्नचंद मेहता / कांग्रेस–राजेंद्र सोलंकी |
| कोटा | 100 | 55 | 39 | 4 | 51 | भाजपा–अनुसुईया गोस्वामी / कांग्रेस–सुनीता सुमन |
| बीकानेर | 80 | 27 | 42 | 11 | 41 | भाजपा–सुरेंद्र सिंह शेखावत / कांग्रेस–अनिल कल्ला |
| उदयपुर | 80 | 53 | 23 | 4 | 41 | भाजपा–पारस सिंघवी / कांग्रेस–डॉ. पूनम कंवर राठौड़ |
जयपुर, कोटा और उदयपुर में भाजपा तथा बीकानेर में कांग्रेस अपने-अपने निगमों में बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी हैं। जोधपुर में दोनों दल बहुमत से नीचे हैं और वहां 11 अन्य पार्षदों का गणित महत्वपूर्ण है।
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2020-19 से 2026 तक बदली तस्वीर क्या कहती है?
इन पांच शहरों को पिछले निकाय चुनावों से जोड़कर देखें तो शहरी राजनीति में सीटों का संतुलन कई जगह बदला है।
जयपुर में 2020 के दो निगमों की जगह अब एक 150 सदस्यीय निगम है। उस समय जयपुर ग्रेटर में भाजपा के पास 88 सीटें और हेरिटेज में कांग्रेस के पास 47 सीटें थीं। अब एकीकृत निगम में भाजपा 78 और कांग्रेस 57 पर है।
जोधपुर में 2020 में दो निगमों में कांग्रेस का संयुक्त प्रदर्शन भाजपा से बेहतर था—कांग्रेस 82 और भाजपा 62। 2026 में एकीकृत निगम में दोनों दल लगभग बराबर आ गए हैं और रिपोलिंग के बाद भाजपा को एक सीट की बढ़त मिली है।
कोटा में 2020 में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत था—उत्तर निगम में 47 सीटें और दक्षिण में भाजपा-कांग्रेस की 36-36 सीटों की बराबरी। 2026 में एकीकृत 100 सदस्यीय निगम में भाजपा 55 सीटों के साथ बहुमत में है।
बीकानेर में 2019 में भाजपा 38 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी और कांग्रेस 30 पर थी। 2026 में कांग्रेस 42 सीटों के साथ बहुमत में पहुंच गई, जबकि भाजपा 27 पर रह गई।
उदयपुर में 2019 के 70 वार्डों में भाजपा 44 और कांग्रेस 26 पर थी। 2026 में 80 वार्डों में भाजपा 53 और कांग्रेस 23 पर है।
पांच शहर, पांच अलग राजनीतिक गणित
जयपुर में बहुमत भाजपा के पास है। कोटा में भी भाजपा बहुमत में है। उदयपुर में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। बीकानेर में कांग्रेस बहुमत के साथ खड़ी है। जबकि जोधपुर में मुकाबला बहुमत से बाहर है और वहां अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इसलिए पांचों शहरों को एक ही राजनीतिक तराजू से देखना सही नहीं होगा। जहां बहुमत का आंकड़ा पार हो चुका है, वहां मुख्य चुनौती दल के भीतर एकजुटता बनाए रखने की है; जहां बहुमत नहीं है, वहां समर्थन जुटाने की राजनीति निर्णायक होगी।
मेयर चुनाव में अब जनता का प्रत्यक्ष मतदान नहीं होगा। निर्वाचित पार्षद ही महापौर चुनेंगे। इसलिए 21 से 25 सितंबर के बीच होने वाली राजनीतिक गतिविधियों में बाड़ेबंदी, पार्षदों की मौजूदगी, नामांकन वापसी, निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और दलों के भीतर संभावित असहमति सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दे होंगे।
यानी इन पांच शहरों में मेयर की कुर्सी का असली मुकाबला अब चुनाव मैदान से निकलकर नगर निगम के भीतर पार्षदों के अंकगणित और राजनीतिक अनुशासन तक पहुंच चुका है।
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