
70 वर्षों की विरासत, दो वर्षों में स्वर्णिम छलांग: “हमने सरस को सिर्फ डेयरी नहीं, किसानों की समृद्धि का राष्ट्रीय मॉडल बनाया” — श्रुति भारद्वाज
लगभग 70 वर्षों की यात्रा के बाद सरस अपने स्वर्णकाल में
सहकारिता से समृद्धि तक का सफल मॉडल बना राजस्थान
देश में दूध उत्पादन के क्षेत्र में राजस्थान का दूसरा स्थान
सरस के इतिहास का सर्वाधिक लाभ 681 करोड़ एवं सर्वाधिक टर्नओवर 16116करोड़ रुपए
किसानों की आय में लगभग 13% वृद्धि
3000 नई सहकारी समितियां और 1 लाख नए सदस्य
सरस घी की रिकॉर्ड मांग, स्टॉक से शॉर्टेज तक का सफर
115 सरस प्लाजा, आउटलेट और पार्लर का राष्ट्रीय विस्तार लक्ष्य
जयपुर में 10 लाख लीटर क्षमता वाला नया डेयरी प्लांट तैयार,उद्घाटन जल्द
किसानों के बच्चों के लिए सरस स्कॉलरशिप योजना की भी तैयारी
जयपुर, dusrikhabar.com। सरस की असली कमाई सिर्फ मुनाफा नहीं, मुस्कुराते किसान हैं: इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल रिकॉर्ड लाभ नहीं है। असली सफलता यह है कि गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं, पशुपालकों की आय बढ़ी है, युवाओं को रोजगार मिला है और किसानों का अपने सहकारी मॉडल पर भरोसा मजबूत हुआ है। आज सरस की हर दूध की थैली, हर घी का डिब्बा और हर डेयरी उत्पाद राजस्थान के लाखों परिवारों की मेहनत, विश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी कहता है।

आरसीडीएफ एमडी श्रुति भारद्वाज से इंटरव्यू के दौरान सवाल जवाब करते दूसरी खबर के संपादक विजय श्रीवास्तव। (फोटो एआई निर्मित है)
दूसरी खबर के संपादक विजय श्रीवास्तव से राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज की खास बातचीत।
इस विस्तृत इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि किस प्रकार केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के विजन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में सरस ने घाटे की मानसिकता से निकलकर नेशनल ब्रांड बनने तक का सफर तय किया और कैसे यह बदलाव किसानों की जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।
आपको बता दें कि सरस ने मार्च 2026 तक 70 वर्षों का सर्वाधिक टर्नओवर 16116 करोड़ रुपए किया बल्कि अब तक का सर्वाधिक लाभ जो कि 681करोड़ रुपए था हासिल कर स्वर्णिम इतिहास रचा।
70 वर्षों की विरासत, दो वर्षों में स्वर्णिम छलांग
करीब 70 वर्षों की यात्रा तय कर चुका सरस आज सिर्फ राजस्थान का डेयरी ब्रांड नहीं, बल्कि देश का दूसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक सहकारी नेटवर्क और अपने इतिहास के सर्वाधिक लाभ अर्जित करने वाला संस्थान बन चुका है। यह बदलाव केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक खुशहाली की कहानी भी है।
सवाल-जवाब में जानिए सरस के स्वर्णकाल की पूरी कहानी
प्रश्न 1: सरस को स्वर्णकाल तक पहुंचाने का सबसे बड़ा विजन क्या था?
आरसीडीएफ की प्रबंध निदेशक संचालक श्रुति भारद्वाज ने कहा: “सरस को राष्ट्रीय पहचान दिलाना हमारा पहला लक्ष्य था” जब मैंने आरसीडीएफ की जिम्मेदारी संभाली तो सबसे पहले यह तय किया कि सरस को केवल सरकारी डेयरी संस्था नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल बिजनेस ब्रांड बनाना है। हमने Business Planning, KPI (Key Performance Indicators), Cost Management और Profit Maximization जैसे आधुनिक प्रबंधन मॉडल अपनाए। हमारा उद्देश्य था कि सरस की गुणवत्ता और शुद्धता ऐसी हो कि देशभर का उपभोक्ता इस ब्रांड पर भरोसा करे। सरस की सफलता का वास्तविक उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं बल्कि उससे जुड़े लाखों किसानों के जीवन में समृद्धि लाना था।
प्रश्न 2: इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ किसे मिला?
“उन्होंने कहा किसानों की आय बढ़ी, महिलाओं को मिली आर्थिक आत्मनिर्भरता” हमने सबसे पहले 3000 से अधिक नई सहकारी समितियों का गठन किया। जिसमें एक लाख नए सदस्य जुड़े। हमने किसानों को दूध का बेहतर मूल्य देना शुरू किया जिससे दूध उत्पादकों की आय लगभग 13 प्रतिशत तक बढ़ी।
इसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिला। आज गांवों में महिलाएं डेयरी व्यवसाय की मजबूत भागीदार बन चुकी हैं। सहकारिता वास्तव में किसानों की आर्थिक रीढ़ बन गई है।
प्रश्न 3: सरस को व्यापारिक मॉडल में बदलने का विचार आपके मन में कैसे आया?
“भारद्वाज ने कहा- डेयरी को भावनात्मक नहीं, व्यावसायिक दृष्टि से देखना जरूरी था” राजस्थान में डेयरी को लंबे समय तक केवल पारंपरिक गतिविधि माना जाता रहा। हमने किसानों को समझाया कि यदि डेयरी को बिजनेस मॉडल के रूप में अपनाया जाएगा तो आय कई गुना बढ़ सकती है। आज इसका परिणाम सबके सामने है। राजस्थान का दुग्ध किसान पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है।
प्रश्न 4: सरस में आपको सबसे बड़ी चुनौती क्या मिली?
“उन्होंने कहा- 11 हजार मीट्रिक टन घी गोदाम में पड़ा था” जब मैंने कार्यभार संभाला तब करीब 11 हजार मीट्रिक टन देसी घी स्टॉक में पड़ा था, जो जल्द ही आउटडेट होने की स्थिति में पहुंच रहा था। हमने तत्काल फैसला लेते हुए घी के दामों में व्यावहारिक कमी की।
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बाजार में तेज सप्लाई सुनिश्चित की और गुणवत्ता व शुद्धता को और बेहतर बनाया। जिसका परिणाम है आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। सरस घी की बाजार में इतनी मांग है कि कई बार सप्लाई कम पड़ जाती है।
प्रश्न 5: उत्पादन बढ़ाने के लिए आरसीडीएफ द्वारा कौन-कौन से बड़े कदम उठाए गए?
“नई तकनीक अपनाई, पशुपालकों को आधुनिक बनाया” हमने केवल खरीद नहीं बढ़ाई बल्कि तकनीकी सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया। मुख्य पहल के तहत Sex Sorted Semen तकनीक को बढ़ावा दिया, 10 लाख डोज प्रतिदिन उत्पादन क्षमता तक बढ़ाई, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक प्रयास किया और पशुपालकों का तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था कर उनके कौशल को बढ़ाया। परिणाम स्वरूप इससे दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई।
प्रश्न 6: सरस के उत्पादों में क्या बदलाव किए गए?
“दूध और घी से आगे बढ़कर Value Added Products पर फोकस” आज सरस केवल दूध बेचने वाला ब्रांड नहीं है। हमने त्योहारों और बाजार की जरूरतों को देखते हुए कई नए उत्पाद शुरू किए—
- कलाकंद
- रसगुल्ला
- गुलाब जामुन
- मावा पेड़ा
- काजू पेड़ा
- बेसन लड्डू
- फ्लेवर्ड मिल्क
- कोल्ड कॉफी
- श्रीखंड
यही Value Addition आज सरस की आय का बड़ा आधार बन रहा है।
प्रश्न 7: सरस को राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की दिशा में आपकी क्या रणनीति रही है?
“राजस्थान से निकलकर पूरे देश तक पहुंच रहा है सरस” हमने कई राज्यों के साथ एमओयू किए। देशभर में सरस प्लाजा, सरस आउटलेट और सरस पार्लर स्थापित करने की योजना बनाई। लक्ष्य 115 आधुनिक आउटलेट्स का है। जयपुर सहित राजस्थान के कई शहरों में इनका विस्तार हो चुका है।
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दिल्ली के बीकानेर हाउस में बनने वाला एक्सक्लूसिव सरस प्लाजा देशभर के लोगों को राजस्थान के स्वाद से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। सरस के उत्पादों को देशभर में पहुंचाने के लिए फिलहाल मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और एनसीआर में सरस के आउटलेट्स खोलने और सरस घी और दूध की सप्लाई करने के लिए समझौते किए हैं।
प्रश्न 8: सरस में भविष्य की सबसे बड़ी योजनाएं क्या हैं?
“10 लाख लीटर क्षमता वाला नया प्लांट और कई नए डेयरी प्रोजेक्ट” जयपुर में 10 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला अत्याधुनिक प्लांट तैयार है। इसके अलावा सीकर, अलवर, भरतपुर, कोटा और झालावाड़ सहित करीब 10 शहरों में नए डेयरी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे किसानों से अधिक दूध खरीदा जा सकेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।
प्रश्न 9: किसानों के बच्चों के लिए आपकी क्या विशेष योजना है?
“सरस स्कॉलरशिप योजना लाएंगे” हम चाहते हैं कि किसानों के बच्चे केवल डेयरी से जुड़े न रहें बल्कि तकनीकी रूप से भी मजबूत बनें। इसी उद्देश्य से सरस स्कॉलरशिप योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत तकनीकी शिक्षा, डेयरी मैनेजमेंट,पशुपालन और आधुनिक कृषि जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों को सहायता दी जाएगी।
प्रश्न 10: सरस के स्वर्णकाल का सबसे बड़ा श्रेय आप किसे देंगी?
“आरसीडीएफ की प्रबंधक वरिष्ठ आईएएस श्रुति भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि ने डेयरी क्षेत्र में नई क्रांति की” मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं किसान परिवार से आते हैं। उन्हें किसानों की वास्तविक जरूरतों की समझ है।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहकारिता केवल योजना नहीं रही बल्कि ग्रामीण समृद्धि का मजबूत माध्यम बनी। यदि आज सरस अपने इतिहास के सबसे अच्छे दौर में है तो इसमें राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, किसानों का विश्वास और पूरी टीम की मेहनत का बड़ा योगदान है।
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