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गणेश चतुर्थी पर राजस्थान में मोती डूंगरी से त्रिनेत्र गणेश तक उमड़ा आस्था का सैलाब, घर-घर बिराजे भगवान गजानंद…

गणेश चतुर्थी पर राजस्थान में मोती डूंगरी से त्रिनेत्र गणेश तक उमड़ा आस्था का सैलाब, घर-घर बिराजे भगवान गजानंद…

14 सितंबर को राजस्थानभर में गणेश चतुर्थी की रही धूम

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में रात 1 बजे से श्रद्धालुओं की कतारें 

सुबह करीब 5 बजे से दर्शन और आरती का सिलसिला हुआ शुरू, रात 11.40 बजे तक दर्शन

सीएम भजनलाल, डिप्टी सीएम दिया कुमारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने किए दर्शन

रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश मंदिर में तीन दिवसीय लक्खी मेले का आगाज

कोटा के खड़े गणेशजी मंदिर की प्रतिमा करीब 600 वर्ष से अधिक पुरानी होने का दावा

नहर के गणेश मंदिर में स्वर्ण मुकुट और स्वर्ण आभूषणों से गणपति का किया विशेष श्रृंगार 

प्रदेशभर में घर-घर गणेश प्रतिमाएं स्थापित कर परिवारों ने सुख-समृद्धि की कामना की

विजय श्रीवास्तव/माही राठौड़

जयपुर,dusrikhabar.com। गणेश चतुर्थी के अवसर पर 14 सितंबर को राजस्थान गणपति भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर से लेकर सवाई माधोपुर के रणथंभौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर और कोटा के खड़े गणेशजी मंदिर तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। जयपुर ही नहीं, राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ दूसरे राज्यों से भी भक्त भगवान गणेश के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचे।

आस्था से जुड़े विश्वास के अनुसार भगवान गणेश के दर्शन बुद्धि, विवेक, बल और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने गणपति को मोदक, गुड़धानी और चूरमे का भोग लगाकर परिवार और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

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आधी रात से कतार, अलसुबह गणपति के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

मोती डूंगरी गणेश मंदिर के बाहर रात 1 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह करीब साढ़े पांच बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ जो रात को 11.40 बजे तक जारी रहा। भक्तों ने गणपति के दर्शन किए, आरती में शामिल हुए और एक-दूसरे को गणेश जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं।

मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा। भगवान गणेश का भव्य श्रृंगार किया गया और प्रिय मोदकों का भोग लगाया गया। सिंदूर का चोला, जनेऊ और आकर्षक पोशाक से सजे गणपति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया।

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घर-घर विराजे गणपति, परिवारों ने की मंगल कामना

गणेश चतुर्थी का उत्साह केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। प्रदेशभर में लोगों ने अपने घरों के मुख्य द्वार और पूजा स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कीं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गणपति को सिंदूर का चोला, जनेऊ और नई पोशाक धारण कराई।

कई घरों में परिवार के सदस्यों ने मिलकर गणपति की आरती की और परिवार की खुशहाली, बच्चों की सफलता और सुख-शांति की प्रार्थना की। यही गणेशोत्सव की वह परंपरा है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ परिवार के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी दिखाई देता है।

गण-गणेश और नहर के गणेशजी मंदिर में भी उमड़ी श्रद्धा

जयपुर के गण-गणेश और नहर के गणेशजी मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। नहर के गणेश मंदिर में दक्षिणावर्ती सूंड और दक्षिणाभिमुख स्वरूप में विराजमान गणपति का विशेष श्रृंगार किया गया।

स्वर्ण मुकुट और स्वर्ण कर्ण अलंकारों से सजे भगवान गणेश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। मंदिर में गणपति को राजशाही पोशाक धारण कराई गई, जिसने दर्शन को और आकर्षक बना दिया।

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त्रिनेत्र गणेश मंदिर में लक्खी मेले का आगाज

सवाई माधोपुर के रणथंभौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के साथ ही तीन दिवसीय लक्खी मेले का आगाज हुआ। गणेश चतुर्थी के दिन यहां आस्था का विशाल जनसैलाब देखने को मिला।

दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने त्रिनेत्र गणेश के दरबार में पहुंचकर दर्शन किए और अपनी मनोकामनाओं के साथ भगवान के चरणों में शीश नवाया। मेले के कारण पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

600 साल पुरानी आस्था, खड़े गणेशजी के दरबार में भक्तों की भीड़

कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित खड़े गणेशजी मंदिर की अपनी अलग पहचान है। यहां भगवान गणेश सामान्य बैठी मुद्रा में नहीं, बल्कि खड़े स्वरूप में विराजमान हैं।

मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार यह प्रतिमा करीब 600 वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। भगवान गणेश की सीधी सूंड इस प्रतिमा को और विशिष्ट बनाती है। चंबल नदी के नजदीक प्राकृतिक वातावरण में स्थित यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने भी किए गणपति के दर्शन

गणेश चतुर्थी के अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी मोती डूंगरी पहुंचकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। नेताओं ने गणपति से प्रदेश में खुशहाली, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। 

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने भी किए गणपति के दर्शन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किए मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुंचकर गणपति के दर्शन।

नगर भ्रमण के साथ होगा जन्मोत्सव कार्यक्रमों का समापन

मंदिर महंत कैलाश शर्मा के अनुसार गणेश जन्मोत्सव में कई आयोजन हुए, जिसके दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित हुई। इसी कड़ी में गणेश जन्मोत्सव का समापन 15 सितंबर को मोती डूंगरी गणेशजी के नगर भ्रमण के साथ होगा। शोभायात्रा मोती डूंगरी मंदिर से रवाना होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंचेगी।

गणेशोत्सव ने दिया एकता और उम्मीद का संदेश

राजस्थान में गणेश चतुर्थी का यह पर्व केवल मंदिरों में पूजा और दर्शन तक सीमित नहीं रहा। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर उम्र के लोगों ने गणपति उत्सव में भागीदारी निभाई। कहीं मंदिरों में लंबी कतारें थीं तो कहीं घरों में परिवार एक साथ आरती करता नजर आया।

गणेशोत्सव ने एक बार फिर यह अहसास कराया कि आस्था लोगों को जोड़ने का माध्यम भी है। गणपति के सामने हर व्यक्ति की प्रार्थना अलग हो सकती है, लेकिन भावना एक ही रही—परिवार में सुख, जीवन में शांति और राजस्थान में खुशहाली।

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