
भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: 49 वर्ष की उम्र में जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
जसपाल राणा का निधन, जर्मनी से लौटते समय बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में ली अंतिम सांस
कॉमनवेल्थ गेम्स के 9 गोल्ड मेडलिस्ट, भारतीय शूटिंग के स्वर्णिम सितारे थे जसपाल राणा
मनु भाकर के कोच को देश ने खोया, प्रधानमंत्री मोदी और खेल जगत ने दी श्रद्धांजलि
विजय श्रीवास्तव,
दिल्ली/जयपुर,dusrikhabar.com। भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। देश के महान निशानेबाज, कोच और करोड़ों युवाओं की प्रेरणा रहे जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए 9 स्वर्ण पदक जीतने वाले जसपाल राणा ने न केवल एक खिलाड़ी के रूप में देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि कोच के रूप में भी नई पीढ़ी के निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से भारतीय निशानेबाजी जगत ने एक ऐसा सितारा खो दिया है, जिसकी चमक आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
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जर्मनी से लौटते समय बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में चल रहा था इलाज
जानकारी के अनुसार 1 जून को म्यूनिख (जर्मनी) से भारत लौटते समय फ्लाइट में जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद उनके हृदय में स्टेंट डाला गया। उपचार के दौरान शुक्रवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने की।
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भारत को दिलाए 9 गोल्ड, कई पीढ़ियों के बने प्रेरणास्रोत
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 स्वर्ण सहित कुल 15 पदक जीते। वहीं एशियन गेम्स में भी 8 पदक अपने नाम किए, जिनमें 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल हैं। उनका शानदार करियर भारतीय खेल इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
मनु भाकर के कोच और युवाओं के मार्गदर्शक थे जसपाल
जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कोच भी थे। वे पेरिस ओलिंपिक में दो पदक जीतने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रहे। फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए भारत का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था। उनकी कोचिंग और मार्गदर्शन से कई युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।
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प्रधानमंत्री मोदी और खेल जगत ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने भी उन्हें भारतीय निशानेबाजी की स्वर्णिम पीढ़ी का अहम सदस्य बताते हुए कहा कि उनका जाना खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
वो सब जसपाल राणा के बारे में जो शायद आप नहीं जानते
भारतीय निशानेबाजी का वह सितारा जिसने संघर्ष को सफलता में बदला
भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में जसपाल राणा का नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा। 28 जून 1976 को उत्तराखंड के देहरादून में जन्मे जसपाल बचपन से ही अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा स्वयं खेलों से जुड़े रहे, इसलिए घर का माहौल भी खेलों के अनुकूल था। कम उम्र में ही जसपाल ने निशानेबाजी में रुचि दिखाई और कठिन अभ्यास के दम पर अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी।
18 की उम्र में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक से शुरुआत
महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह वह दौर था जब भारत में निशानेबाजी को ज्यादा पहचान नहीं मिली थी, लेकिन जसपाल ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 स्वर्ण सहित 15 पदक जीतना उनकी असाधारण उपलब्धियों में शामिल है। एशियन गेम्स में भी उन्होंने 8 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
खेल से संन्यास लेकिन नई पीढ़ी को किया तैयार
उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव भी आए। चोटों, प्रतिस्पर्धा और चयन संबंधी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। खेल से संन्यास के बाद भी उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया और कोच के रूप में नई पीढ़ी को तैयार किया। मनु भाकर जैसे खिलाड़ियों की सफलता में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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संघर्ष और अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल
जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल थे। उनका जीवन बताता है कि सच्ची लगन और अथक मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भारतीय खेल जगत में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।
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