
पश्चिम एशिया संकट का असर: भारत की सबसे बड़ी प्याज मंडी में डीजल संकट, थमी ट्रकों की आवाजाही
पश्चिम एशिया तनाव का असर अब भारतीय कृषि बाजारों पर
लासलगांव मंडी में ट्रकों की कमी से प्याज व्यापार प्रभावित
वाशी APMC में प्याज के थोक दाम 15 रुपए किलो तक पहुंचे
25 मई से नीलामी बहिष्कार की चेतावनी से बढ़ी चिंता
किसानों के सामने फसल खराब होने और नुकसान का खतरा
विजय श्रीवास्तव,
पुणे/नासिक,dusrikhabar.com। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन आपूर्ति संकट का असर अब भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। देश की सबसे बड़ी प्याज थोक मंडी लासलगांव में डीजल संकट के चलते प्याज परिवहन लगभग ठप हो गया है। ट्रकों की कमी के कारण मशहूर ‘नासिक रेड’ और ‘निफाड रेड’ प्याज की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।
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व्यापारियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में लासलगांव मंडी से हर दिन लगभग 50 ट्रक प्याज देशभर के अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते थे, लेकिन अब डीजल की अनियमित उपलब्धता के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। इससे व्यापारियों और किसानों दोनों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।

लासलगांव व्यापारियों ने दी नीलामी बहिष्कार की चेतावनी
लासलगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन (LMA) ने कृषि उपज मंडी समिति (APMC) को पत्र लिखकर समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है। व्यापारियों ने साफ कहा है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे 25 मई से दैनिक प्याज नीलामी का बहिष्कार करेंगे।
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LMA के सचिव प्रवीण कदम के अनुसार ट्रांसपोर्टर्स को पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल रहा है, जिसके कारण ट्रकों की उपलब्धता तेजी से घट गई है। कई ट्रांसपोर्टर अब रोजाना 10 ट्रक भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
वाशी APMC में तेजी से बढ़े प्याज के दाम
डीजल की कमी का असर वाशी कृषि उपज मंडी (APMC) में भी साफ दिखाई दे रहा है। नासिक, पुणे, संगमनेर और नागपुर जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से आने वाले प्याज वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
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वाशी APMC के व्यापारी अशोक कारपे के अनुसार पहले प्रतिदिन 100 से 120 प्याज वाहन मंडी पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 70 से 80 रह गई है। वहीं परिवहन लागत भी प्रति टन 1100 रुपए से बढ़कर 1400 से 1500 रुपए तक पहुंच गई है।
इसका सीधा असर बाजार में देखने को मिल रहा है और थोक प्याज कीमतें 10-12 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 15 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं।
किसानों पर सबसे ज्यादा संकट
यदि व्यापारियों ने नीलामी बहिष्कार का फैसला लागू किया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। लासलगांव मंडी में रोजाना 250 से ज्यादा व्यापारी प्याज और खाद्यान्न की नीलामी में हिस्सा लेते हैं।
कई किसानों के पास पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज या भंडारण सुविधा नहीं है। ऐसे में मंडियों में बिक्री नहीं होने पर प्याज खराब होने और सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्टर्स ने भी जताई चिंता
नासिक के ट्रांसपोर्टर भारत शिंदे ने बताया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति अनियमित हो गई है। इसी वजह से कई ट्रांसपोर्टर दूसरे राज्यों में माल भेजने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि रास्ते में वाहन फंस सकते हैं।
प्याज खरीद के लिए केंद्र सरकार की तैयारी
इस बीच उपभोक्ता मामलों के विभाग (DOCA) की एक टीम नासिक पहुंची है। टीम केंद्र सरकार की एजेंसियों NAFED और NCCF द्वारा किसानों से 2 लाख टन प्याज खरीदने की तैयारियों की समीक्षा कर रही है। सरकार का उद्देश्य बफर स्टॉक तैयार कर बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखना है।
राजस्थान में दिखने लगा डीजल की कमी का असर
कृषि से जुड़े विशेषज्ञो की मानें तो अगर यही सिलसिला जारी रहा तो राजस्थान की मंडियों में भी फल और सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। हालांकि अभी ऐसी पैनिक स्थिति नहीं है लेकिन इन दिनों भी मंडी में सब्जियों की कीमतों में काफी उछाल देखने को मिल रहा है।
गौरतलब है कि राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सरकारी आंकड़ों के अनुसार है लेकिन पंप मालिकों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के साथ साथ स्टॉक में कमी का ढिंढोरा पीटना शुरु कर दिया है। जो कि प्रदेश वासियों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
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