
राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: ओडीओपी उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर, 18 करोड़ से अधिक की 5 परियोजनाएं स्वीकृत
पंच गौरव कार्यक्रम के तहत पांच जिलों में आधुनिक परियोजनाओं को मिली मंजूरी
दौसा, चूरू, डीडवाना-कुचामन, फलोदी और बालोतरा के उत्पाद होंगे हाईटेक
टेस्टिंग लैब, टेक्नोलॉजी सेंटर और वेयरहाउसिंग सुविधाओं से बढ़ेगी गुणवत्ता
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक मिलेगा मार्जिन मनी अनुदान
ओडीओपी नीति से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। Government of Rajasthan ने एक जिला एक उत्पाद नीति (ODOP) के तहत प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
पंच गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य सरकार ने दौसा, चूरू, डीडवाना-कुचामन, फलोदी और बालोतरा जिलों में 18.19 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 5 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी है।
इन परियोजनाओं के जरिए स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
पंच गौरव कार्यक्रम के तहत ओडीओपी उत्पादों को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

मुख्य सचिव वी श्रीनिवास
मुख्य सचिव V. Srinivas की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति ने पंच गौरव कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया।
राज्य सरकार का उद्देश्य ओडीओपी उत्पादों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक गुणवत्ता मानकों से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
इसके लिए पहले चरण में 10.76 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है ताकि परियोजनाओं का कार्य जल्द शुरू किया जा सके।
दौसा और डीडवाना-कुचामन में स्टोन इंडस्ट्री को मिलेगा बढ़ावा

उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त नीलाभ सक्सेना
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त Neelabh Saxena ने बताया कि दौसा जिले में पत्थर आधारित उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए 3.30 करोड़ रुपये की लागत से टेक्नोलॉजी फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा।
इस सेंटर की मदद से स्टोन आधारित उत्पादों में आधुनिक कटिंग, डिजाइन और फिनिशिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पाद अधिक आकर्षक और टिकाऊ बनेंगे।
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वहीं डीडवाना-कुचामन जिले में 5.05 करोड़ रुपये की लागत से सीएनसी मशीन टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित किया जाएगा। इससे स्टोन प्रोसेसिंग उद्योग को आधुनिक तकनीकी सहायता मिलेगी।
चूरू और फलोदी में गुणवत्ता जांच और भंडारण की आधुनिक सुविधा
चूरू जिले में लकड़ी आधारित उत्पादों के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन BIS टेस्टिंग लैब और सीजनिंग सुविधा स्थापित होगी। इससे हस्तशिल्प और लकड़ी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जा सकेंगे।
फलोदी में सोनामुखी उत्पाद के लिए 2.35 करोड़ रुपये की लागत से क्लाइमेट-कंट्रोल्ड वेयरहाउसिंग फैसिलिटी बनाई जाएगी। इससे उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे और खराब होने की संभावना कम होगी।
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यह पहल ओडीओपी नीति के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बालोतरा में टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगी डिजिटल तकनीक
बालोतरा जिले में वस्त्र उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से टेक्सटाइल डिजिटल प्रिंटिंग कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाएगा।
इस सेंटर के माध्यम से कपड़ा उद्योग में डिजिटल डिजाइनिंग, आधुनिक प्रिंटिंग और उन्नत टेक्सटाइल तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।
राजस्थान सरकार का मानना है कि टेक्सटाइल उद्योग को तकनीकी रूप से मजबूत करने से निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
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6 जिलों में पहले से चल रही हैं करोड़ों की परियोजनाएं
उद्योग विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 8 जिलों में 6.07 करोड़ रुपये लागत वाली परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत की जा चुकी हैं।
इनमें चित्तौड़गढ़ में 2 करोड़ रुपये लागत का मल्टी यूटिलिटी सेंटर, हनुमानगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये की लागत से रूरल हाट निर्माण, झुंझुनूं में शिल्पग्राम का नवीनीकरण और राजसमंद में प्रदर्शनी हॉल एवं डिस्प्ले सेंटर का निर्माण शामिल है।
इसके अलावा दौसा और डीग जिलों में सिलिकोसिस बचाव शिविरों के माध्यम से 1500 से अधिक श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराई गई हैं।
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मिलेगा बड़ा आर्थिक सहयोग
राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 के तहत प्रदेश के सभी 41 जिलों में एक-एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान की गई है। इस नीति के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक का मार्जिन मनी अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा ये सुविधाएं भी होंगी उपलब्ध:-
- एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक अनुदान
- क्वालिटी सर्टिफिकेशन और IPR पर 3 लाख रुपये तक पुनर्भरण
- विपणन आयोजनों में भाग लेने के लिए 2 लाख रुपये तक सहायता
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक सहायता
- कैटलॉगिंग और वेबसाइट विकास के लिए 75 हजार रुपये तक अनुदान
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