
‘पार्किंसन अब नहीं रोकेगा आपके कदम’, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर ने दिखाई नई राह
विश्व पार्किंसंस दिवस 2026
आधुनिक तकनीक से बदल रही है पार्किंसंस रोग की तस्वीर
जयपुर में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) और एडैप्टिव DBS से मरीजों को नई उम्मीद
3000+ मरीजों का सफल इलाज, 16 उन्नत सर्जरी पूरी
समय पर पहचान और इलाज से बेहतर हो सकती है जीवन गुणवत्ता
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, dusrikhabar.com। विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा “पार्किंसन? अब नहीं रोकेगा आपके कदम” थीम के साथ एक विशेष जागरूकता प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्किंसंस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती पहचान के महत्व को समझाना और आधुनिक उपचार विकल्पों को आमजन तक पहुंचाना रहा।
जागरूकता के साथ इलाज की नई दिशा
यह कार्यक्रम Four Points by Sheraton Jaipur, City Square में आयोजित हुआ, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन ने पार्किंसंस रोग के बढ़ते मामलों, इसके प्रभाव और उन्नत इलाज तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों ने बताया कि पार्किंसंस एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। इसके प्रमुख लक्षणों में कंपकंपी, शरीर में जकड़न, धीमी गति और संतुलन की समस्या शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन समय पर उपचार, सही दवाइयों और आधुनिक तकनीकों के जरिए मरीज एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
उन्नत तकनीक: DBS और Adaptive DBS से उम्मीद
नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर वर्तमान में राजस्थान का अग्रणी केंद्र है, जहां डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) जैसी अत्याधुनिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। डॉ. वैभव माथुर (कंसलटेंट – न्यूरोलॉजी एवं DBS स्पेशलिस्ट) ने बताया कि “DBS उन मरीजों के लिए बेहद प्रभावी है, जिन पर दवाइयों का असर कम हो जाता है। इसमें मस्तिष्क के विशेष हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगाकर नियंत्रित सिग्नल भेजे जाते हैं, जिससे लक्षणों में राहत मिलती है।” उन्होंने आगे कहा कि अब एडैप्टिव DBS (A-DBS) तकनीक भी उपलब्ध है, जो:
- रियल-टाइम में ब्रेन सिग्नल्स को समझती है
- स्वतः अपनी सेटिंग्स एडजस्ट करती है
- मरीज के अनुसार पर्सनलाइज्ड इलाज देती है
इससे इलाज अधिक सटीक, प्रभावी और सुरक्षित हो गया है।
रिकॉर्ड उपलब्धियां: 3000+ मरीजों को लाभ
- पिछले 2 वर्षों में 3000 से अधिक पार्किंसंस मरीजों का सफल उपचार
- 16 DBS सर्जरी सफलतापूर्वक पूर्ण
- अत्याधुनिक न्यूरोलॉजिकल केयर में लगातार प्रगति
यह उपलब्धियां नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर की विंशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा क्षमता को दर्शाती हैं।

विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा सम्मान समारोह में मौजूद डॉ. प्रदीप कुमार गोयल (क्लिनिकल डायरेक्टर), बलविंदर सिंह वालिया (फैसिलिटी डायरेक्टर), डॉ अमित माथुर और उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ मरीज और परिजन।
विशेषज्ञों की राय: शुरुआती पहचान है सबसे जरूरी
डॉ. प्रदीप कुमार गोयल (क्लिनिकल डायरेक्टर) ने कहा “पार्किंसंस रोग की शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। समय रहते इलाज शुरू करने से बीमारी की प्रगति धीमी की जा सकती है और मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है।” वहीं, बलविंदर सिंह वालिया (फैसिलिटी डायरेक्टर) ने कहा ं“हमारा उद्देश्य मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज देना है, साथ ही जागरूकता बढ़ाना ताकि लोग इस बीमारी को डर नहीं, बल्कि एक मैनेजेबल स्थिति के रूप में देखें।”
मिथकों से बाहर आने की जरूरत
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि समाज में पार्किंसंस रोग को लेकर कई मिथक और भ्रांतियां हैं, जैसे यह केवल बुजुर्गों की बीमारी है, इसका कोई इलाज नहीं और मरीज सामान्य जीवन नहीं जी सकते। इधर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आधुनिक चिकित्सा और सही देखभाल से इन सभी मिथकों को गलत साबित किया जा सकता है।
नारायणा हॉस्पिटल जयपुर: स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी
नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर एक प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है, जो किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। यहां उपलब्ध प्रमुख सुविधाओं में न्यूरोलॉजी एवं मूवमेंट डिसऑर्डर ट्रीटमेंट, कार्डियोलॉजी एवं हार्ट केयर, ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार) और क्रिटिकल केयर सेवाएं शामिल हैं। साथ हीअनुभवी डॉक्टरों और अत्याधुनिक तकनीक के साथ यह अस्पताल मरीज-केंद्रित देखभाल का नया मानक स्थापित कर रहा है।
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