
गीतांजली में रोबोटिक रिप्लेसमेंट से बेहतर नी ट्रीटमेंट, कम दर्द और तेज रिकवरी
गीतांजली मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट पर CME, विशेषज्ञों ने बताए फायदे
ऑस्टियोआर्थराइटिस के मिथक तोड़े, रोबोटिक्स को बताया भविष्य की दिशा
राजस्थान में रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की पूरी सुविधा देने वाला पहला मेडिकल कॉलेज होने का दावा
उदयपुर,dusrikhabar.com। उदयपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीक की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी अब घुटनों के गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की नई उम्मीद बनकर उभरी है। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उदयपुर ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), उदयपुर शाखा के सहयोग से आयोजित सीएमई (सतत् चिकित्सीय शिक्षा) कार्यक्रम में रोबोटिक तकनीक के जरिए घुटना प्रत्यारोपण के फायदे विस्तार से साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक, कम दर्दनाक और शीघ्र रिकवरी वाली हो गई है।
रोबोटिक तकनीक से सटीक ऑपरेशन, कम दर्द का दावा
कार्यक्रम में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. हरप्रीत सिंह ने “रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी” विषय पर वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण में कंप्यूटर आधारित प्लानिंग और रोबोटिक आर्म की मदद से इम्प्लांट की पोजिशनिंग बेहद सटीक तरीके से की जाती है।
उनके अनुसार, इस आधुनिक तकनीक के प्रमुख लाभ हैं:
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सर्जरी में उच्च सटीकता
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आसपास के टिश्यू को कम नुकसान
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ऑपरेशन के बाद कम दर्द
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कम ब्लड लॉस
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जल्दी चलने-फिरने की सुविधा
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अस्पताल में कम समय तक भर्ती
उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी मरीजों को अधिक आराम और बेहतर दीर्घकालिक परिणाम देती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस: मिथक बनाम हकीकत
जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. रामावतार सैनी ने “ऑस्टियोआर्थराइटिस: घुटने से जुड़े मिथक और तथ्य, रोबोटिक्स का नया युग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं, जैसे घुटना प्रत्यारोपण केवल बुजुर्गों के लिए है, सर्जरी के बाद सामान्य जीवन संभव नहीं और ऑपरेशन बेहद दर्दनाक होता है।
डॉ. सैनी ने स्पष्ट किया कि आधुनिक रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट तकनीक ने इन आशंकाओं को काफी हद तक खत्म कर दिया है। सही समय पर उपचार लेने से मरीज सामान्य जीवनशैली में जल्दी लौट सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रोबोटिक्स चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही तकनीक है और भविष्य में यह घुटना सर्जरी का मानक तरीका बन सकती है।
मरीजों ने साझा किए सकारात्मक अनुभव
कार्यक्रम के दौरान उन मरीजों को भी आमंत्रित किया गया जिन्होंने रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी करवाई थी। मरीजों ने मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऑपरेशन के बाद उन्हें अपेक्षाकृत कम दर्द हुआ और वे कम समय में सामान्य गतिविधियों में लौट सके। मरीजों की संतुष्टि ने कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों के बीच इस तकनीक को लेकर सकारात्मक संदेश दिया।
राजस्थान में पहली बार संपूर्ण रोबोटिक सुविधा का दावा
डॉ. हरप्रीत सिंह और डॉ. रामावतार सैनी ने बताया कि गीतांजली हॉस्पिटल राजस्थान का पहला मेडिकल कॉलेज है जहां रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की संपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए उदयपुर के अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता ने की, जबकि सचिव डॉ. प्रशांत अग्रवाल की विशेष उपस्थिति रही। डॉ. अग्रवाल ने दोनों सर्जनों की उपलब्धियों और उनके अनुभव से उपस्थित चिकित्सकों को अवगत कराया।
आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों ने दिए जवाब
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित चिकित्सकों ने रोबोटिक सर्जरी, इम्प्लांट चयन, रिकवरी अवधि और संभावित जोखिमों से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने विस्तार से सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
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