42 सीटर बस में 97 स्कूली बच्चे, जयपुर में स्कूल बस हादसे के बाद परिजनों का फूटा गुस्सा, बसें रुकवाई, जाम लगाया, नारेबाजी भी
जयपुर स्कूल बस हादसे में 15 साल की लक्षिता की मौत
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे मिले
लोगों का आरोप पुलिस प्रशासन के अपनी जेबें भरने से फुर्सत नहीं
आरटीओ भी बड़े रसूख वाले स्कूलों से कर लेते हैं साठ-गांठ
स्कूल बस हादसे में 18 बच्चे हुए थे घायल
ग्रामीणों ने चार स्कूल बसों को रोककर किया प्रदर्शन
‘बाल वाहिनी’ नियम की अनदेखी का भी आरोप
जोबनेर पुलिस ने चालान और नियमानुसार कार्रवाई का दिया आश्वासन
नवीन सक्सेना,
जयपुर के जोबनेर में 8 अगस्त को हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसे में गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय छात्रा लक्षिता कुमावत ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लक्षिता की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने निजी स्कूलों की चार बसों को रोककर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। बसों की जांच के दौरान स्कूल संचालकों की लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए।
हादसे में 18 बच्चे हुए थे घायल, लक्षिता की हालत थी गंभीर
8 अगस्त को आसलपुर मार्ग पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सामने से आ रही स्कूल बस से टकरा गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूल बस पलट गई। हादसे में बस में सवार 18 बच्चे घायल हुए थे। इनमें दो बच्चों के सिर में गंभीर चोट आई थी, जबकि तीन बच्चों के पैरों में फ्रैक्चर हुआ था।
गंभीर रूप से घायल लक्षिता कुमावत (15) को जयपुर के SMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उसके हाथ-पैर में फ्रैक्चर के साथ कमर में गंभीर चोट थी और लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे, ‘बाल वाहिनी’ नियम की भी अनदेखी का आरोप
लक्षिता की मौत के बाद ग्रामीणों ने निजी स्कूलों की चार बसों को रोककर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बसों में क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा था। बच्चों को सुरक्षित परिवहन के बजाय भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर ले जाने का आरोप लगाया गया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बसों पर अनिवार्य रूप से लिखा जाने वाला ‘बाल वाहिनी’ तक अंकित नहीं था। उनका कहना था कि सामान्य कमर्शियल वाहनों की तरह बच्चों को ले जाकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आईपीएस स्कूल की एक बस के चालक ने बच्चों से भरी बस को अंदर से लॉक कर दिया। वहीं, दूसरी बस के चालक द्वारा ग्रामीणों से बहस करने का भी आरोप लगाया गया।
स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों पर डाली जिम्मेदारी
स्कूल प्रबंधन से जुड़े भगवान सहाय चौधरी ने कहा कि बसें अभिभावकों की सहमति से संचालित होती हैं। उनके अनुसार, एक बच्चे को स्कूल लाने-ले जाने में करीब 3 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च आता है, जबकि कई अभिभावक 500 रुपये देने में भी आनाकानी करते हैं।
स्कूल सचिव शैलेश बूरी ने कहा कि गरीब बच्चों के लिए अलग बस चलाने की व्यवस्था की जाएगी। मामले में मौके पर पहुंचे जोबनेर थाने के एएसआई मदनलाल ने संबंधित स्कूल बसों के चालान करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी लक्षिता
आसलपुर निवासी लक्षिता तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। वह अंग्रेजी माध्यम से दसवीं बोर्ड की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी वह आगे रहती थी और कई पुरस्कार व मेडल जीत चुकी थी।
दुखद संयोग यह है कि करीब दो वर्ष पहले इसी आसलपुर सड़क मार्ग पर एक हादसे में लक्षिता के दादा की भी मौत हुई थी। अब उसी सड़क ने परिवार की लाडली को भी छीन लिया। लक्षिता की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
—————————
#Jaipur, #Jobner, #School Bus Accident, #Lakshita Kumawat, #Rajasthan News, #Road Accident, #School Bus, #Baal Vahini, #Asalpur, #SMS Trauma Center, जयपुर स्कूल बस हादसा, जोबनेर स्कूल बस हादसा, लक्षिता कुमावत मौत, जयपुर सड़क हादसा, स्कूल बस लापरवाही, बाल वाहिनी, आसलपुर सड़क हादसा
