
74 लाख में विदेश से खरीदी डॉक्टर बनने की डिग्री! SOG ने 3 डॉक्टरों को किया गिरफ्तार…
फर्जी FMG सर्टिफिकेट के सहारे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
FMGE में बार-बार असफल होने के बाद फर्जी सर्टिफिकेट का सहारा
74 लाख में फर्जी डिग्री, मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप से RMC रजिस्ट्रेशन तक पहुंचा नेटवर्क
100 से ज्यादा डॉक्टर जांच के घेरे में, मरीजों की सुरक्षा,मेडिकल व्यवस्था पर गंभीर सवाल
संदीप बहल,
जयपुर,dusrikhabar.com। डॉक्टर को समाज में जीवनदाता माना जाता है, लेकिन जब चिकित्सा पेशे में प्रवेश के लिए फर्जीवाड़े का सहारा लिया जाए तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों के जीवन के साथ भी गंभीर खिलवाड़ बन जाता है। राजस्थान में सामने आए एक बड़े फर्जीवाड़े ने मेडिकल शिक्षा और पंजीकरण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विदेश से एमबीबीएस कर लौटे तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर लाखों रुपये देकर फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) सर्टिफिकेट बनवाए और उसके आधार पर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप तथा राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीकरण तक हासिल कर लिया।
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कई बार असफल होने के बाद चुना गलत रास्ता
SOG की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए तीनों डॉक्टर कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे थे। भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) परीक्षा में वे कई बार शामिल हुए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
जांच के अनुसार, परीक्षा में बार-बार असफल होने के बाद उन्होंने वैध प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय कथित तौर पर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल करने का रास्ता चुना। यही निर्णय अब उनके करियर और भविष्य दोनों पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।
SOG ने चौमूं निवासी डॉ. दीपक यादव, डीग निवासी डॉ. राजू गुर्जर और अलवर के कठूमर निवासी डॉ. नरेश गुर्जर को गिरफ्तार किया है। तीनों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
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74 लाख रुपए में तैयार हुआ फर्जीवाड़े का नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने मिलकर करीब 74 लाख रुपए खर्च कर फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाए। इनमें डॉ. दीपक यादव ने 24 लाख, डॉ. नरेश गुर्जर ने 23 लाख और डॉ. राजू गुर्जर ने 27 लाख रुपए दिए थे।
आरोप है कि इन फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप प्राप्त की गई और बाद में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीकरण भी हासिल कर लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों के लिए भी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने में भूमिका निभाई।
100 से अधिक डॉक्टरों की पहचान, जांच का दायरा बढ़ा
SOG के अनुसार यह मामला केवल तीन डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान ऐसे 100 से अधिक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स की पहचान की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी FMG सर्टिफिकेट के जरिए इंटर्नशिप और पंजीकरण प्राप्त किया।
अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में अब तक 17 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, कुछ कर्मचारी, कथित मास्टरमाइंड और एक दलाल समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि यह कोई व्यक्तिगत फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
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मरीजों की सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा है। चिकित्सा क्षेत्र में योग्यता और प्रशिक्षण का सीधा संबंध लोगों के जीवन से होता है। यदि कोई व्यक्ति आवश्यक परीक्षा पास किए बिना फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बन जाता है, तो उसका असर सीधे मरीजों की जान और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। यही कारण है कि मेडिकल शिक्षा और लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
क्या है FMGE और क्यों जरूरी है यह परीक्षा?
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) भारत में उन छात्रों के लिए अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा है, जिन्होंने विदेश से MBBS या समकक्ष चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की है।
इस परीक्षा को पास किए बिना कोई भी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस नहीं कर सकता। FMGE प्रमाण-पत्र मिलने के बाद ही नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या राज्य मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण संभव होता है।
इसलिए FMGE केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि विदेश से पढ़कर लौटे डॉक्टर भारतीय चिकित्सा मानकों पर खरे उतरते हैं और मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर सकें।
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