
नागौर में निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंची RLP, SP पद नियमित रूप से भरने की उठाई मांग…
RLP ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में दायर की जनहित याचिका, नागौर जिला चर्चा में
नागौर में SP का पद नियमित रूप से भरने की मांग
19 अगस्त 2026 के अतिरिक्त कार्यभार संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग
आगामी नगर निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर
पार्टी ने राजनीतिक एवं प्रशासनिक दबाव से मुक्त चुनावी माहौल की भी मांग
पूर्व में राज्य निर्वाचन आयोग के पास पहुंची थी नागौर APRO अजित सिंह की शिकायत
लंबे समय से एक ही स्थान पर APRO अजित सिंह के पद पर बने रहने की शिकायत
साथ ही APRO पर समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाने का भी लगा था आरोप
राज्य निर्वाचन आयोग के पत्र के बाद भी जिला कलेक्टर नहीं कर पाए जांच?
नवीन सक्सेना,
नागौर, dusrikhabar.com। आगामी नगर निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने जनहित याचिका दायर कर नागौर जिले में निष्पक्ष, निर्भीक और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक के रिक्त पद को नियमित रूप से भरने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में जिले के पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
नागौर में SP पद को लेकर RLP ने उठाए सवाल
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के प्राधिकरण पर अधिकृत प्रतिनिधि एवं RLP नेता अनिल बारुपाल ने यह जनहित याचिका प्रस्तुत की है।
याचिका में बताया गया है कि नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा, आईपीएस के स्थानांतरण के बाद पुलिस अधीक्षक का पद रिक्त रहा। इसी दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया और चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं भयमुक्त बनाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश जारी किए।
RLP का कहना है कि ऐसे समय में जिले के पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद का रिक्त रहना चुनावी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।
19 अगस्त के आदेश पर भी पार्टी ने जताई आपत्ति
जनहित याचिका में विशेष रूप से 19 अगस्त 2026 को कार्मिक विभाग द्वारा जारी व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। पार्टी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के पद पर नियमित नियुक्ति करने के बजाय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नागौर एसपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया।
RLP ने इसी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि चुनाव के दौरान पुलिस अधीक्षक की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में भयमुक्त वातावरण बनाने, शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने और सभी राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों को समान अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण होती है।
राजनीतिक दबाव से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका
याचिका में RLP की ओर से यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि यदि पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो राजनीतिक प्रभाव या दबाव के चलते किसी दल के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का दुरुपयोग हो सकता है।
पार्टी ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि नागौर में चुनाव प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
RLP के मुताबिक लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रत्येक मतदाता को बिना भय, दबाव और भेदभाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है।
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हाईकोर्ट से RLP की प्रमुख मांगें
जनहित याचिका के माध्यम से पार्टी ने राजस्थान हाईकोर्ट से मुख्य रूप से मांग की है कि
- नागौर के पुलिस अधीक्षक का रिक्त पद तत्काल नियमित रूप से भरा जाए।
- 19 अगस्त 2026 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को एसपी नागौर का अतिरिक्त कार्यभार देने संबंधी आदेश को निरस्त किया जाए।
- नगर निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव निष्पक्ष, स्वतंत्र और भयमुक्त वातावरण में कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
- चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को समान अवसर उपलब्ध कराया जाए।
- चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक एवं प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
‘मामला किसी व्यक्ति के हित का नहीं, मतदाताओं के अधिकार का’
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने अपने कार्यालय से जारी प्रेस बयान में स्पष्ट किया है कि यह जनहित याचिका किसी व्यक्ति विशेष के निजी हित को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि नागौर जिले के मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से दायर की गई है।
पार्टी का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को अपने विचार रखने तथा चुनावी प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से भाग लेने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता चुनाव की विश्वसनीयता का अहम आधार है।
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लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता पर जोर
RLP ने उम्मीद जताई है कि राजस्थान हाईकोर्ट लोकतंत्र की गरिमा, निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े इस मामले में आवश्यक हस्तक्षेप करेगा और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाए रखने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करेगा।
नागौर APRO अजित सिंह को लेकर पहले राज्य निर्वाचन आयोग में पहुंची थी शिकायत
इधर एक दूसरे प्रकरण में नागौर में APRO के पद पर लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात रहने को लेकर पूर्व में राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत पहुंच चुकी है। शिकायत में APRO अजित सिंह पर एक समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाए जाने के साथ लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। आपको बता दें कि APRO नागौर अजित सिंह को स्थानीय निवासी भी बताया जा रहा है और वो लंबे समय से अपने गृह जिले में कार्यरत हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार, इस मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने जिला कलेक्टर, देवेंद्र कुमार को अग्रिम जांच के लिए पत्र लिखा था, लेकिन चुनावों की दृष्टि से बेहद गंभीर प्रकरण होने के बावजूद डेढ़ माह बाद भी जिला कलेक्टर इस प्रकरण की जांच पूरी नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों से पहले नागौर में प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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