
राहुल गांधी कोटा में बोले- छात्रों को तनाव नहीं अवसर देने की जरूरत…
कोटा में NEET पेपर लीक से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक, राहुल गांधी ने उठाए बड़े सवाल
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर 5 लाख करोड़ खर्च, छात्रों-अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
डॉक्टर-इंजीनियर से आगे भी दुनिया, युवा को हो पसंदीदा करियर चुनने की आजादी: राहुल गांधी
नवीन सक्सेना,
कोटा,dusrikhabar.com। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा शिक्षा तंत्र छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक एवं मानसिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि युवाओं और छात्रों की आवाज को सामने लाने का प्रयास है।
read also:कैसा रहेगा आपका आज, क्या कहता है भाग्यांक? 18 जून, गुरुवार, 2026
NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का हमला
कोटा के दशहरा मैदान में छात्रों से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश का शिक्षा तंत्र बच्चों को सीखने की आजादी देने के बजाय उन्हें दबाव और तनाव की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताएं और पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। राहुल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों को आत्मविश्वास दे, न कि उन्हें मानसिक तनाव में डाल दे।
उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि समाज और सरकार को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां किसी भी विद्यार्थी को निराशा या दबाव के कारण आत्मघाती कदम उठाने की नौबत न आए।
read also:मोहन भागवत बोले- इतिहासकारों ने गलत नैरेटिव बनाया, हल्दीघाटी में अकबर नहीं महाराणा प्रताप हुए विजयी…
पांच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में परिवारों पर 5 लाख करोड़ का बोझ
राहुल गांधी ने दावा किया कि NEET, JEE समेत पांच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में देशभर के परिवारों की जेब से करीब 5 लाख करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि कई मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर है।
राहुल ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पढ़ाई, परीक्षा और रोजगार के नाम पर छात्रों और उनके अभिभावकों से लगातार पैसा वसूलने का माध्यम बन गई है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्कृति और महंगी तैयारी ने शिक्षा को अवसर के बजाय आर्थिक बोझ में बदल दिया है। उनके अनुसार, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए बड़ी कीमत चुका रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सफलता की कोई गारंटी नहीं है।
read also:5 लाख रुपये में बन जाएगा 3 कमरे का मकान, अपनाएं ये ट्रिक्स!
डॉक्टर-इंजीनियर ही क्यों? छात्रों को मिले मनपसंद करियर चुनने की आजादी
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से पूछा कि अधिकांश युवा केवल आईआईटी, मेडिकल, एसएससी या यूपीएससी जैसे विकल्पों की ओर ही क्यों बढ़ते हैं। इस पर कई छात्रों ने कहा कि बचपन से उन्हें यही लक्ष्य बताया जाता है। राहुल ने कहा कि यदि युवाओं को स्वतंत्रता मिले तो कोई डांसर बनना चाहता है, कोई पायलट, कलाकार या अन्य क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश के युवाओं के सामने केवल पांच बड़े करियर विकल्प ही क्यों हैं। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जहां विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विषय और करियर चुन सकें तथा उन्हें लाखों रुपये खर्च कर तैयारी करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
सुसाइड शिक्षा व्यवस्था का फेल्योर
राहुल ने एक छात्रा का सुसाइड नोट दिखाते हुए कहा कि यह किसी छात्र की आकांक्षा की विफलता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी चिंता जताते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में इंजीनियर डिग्री लेने के बाद भी बेरोजगार हैं। उनके अनुसार, रोजगार के सीमित अवसर और महंगी शिक्षा युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है।
बहरहाल कोटा में छात्रों के बीच राहुल गांधी का यह संवाद शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव, NEET पेपर लीक विवाद, करियर विकल्पों की सीमाओं और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए छात्रों को उनकी पसंद के अनुसार अवसर उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
—————————–
