
उदयपुर में ‘फाइव एस एवं काइज़ेन’ पर जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न
आर्चि पीस पार्क में आयोजित हुआ आधे दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम
करीब 90 लोगो ने भाग लेकर सीखी ‘फाइव एस’ और काइज़ेन तकनीक
घर और समाज में भी लागू हो सकती हैं प्रबंधन की ये अवधारणाएं
स्वच्छ भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में पहल
विशेषज्ञों ने बताया—छोटे सुधार से संभव है बड़ा बदलाव
सुश्री सोनिया,
उदयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान के उदयपुर में क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (QCFI) के राजसमंद चैप्टर द्वारा “फाइव एस एवं काइज़ेन” विषय पर एक प्रभावी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 89 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों को “फाइव एस” और “काइज़ेन” जैसी प्रबंधन तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना था। QCFI ने देशभर में एक लाख घरों को ‘फाइव एस’ से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है, और यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनील कुमार जगासिया और डॉ. विक्रम कुमावत ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सरल उदाहरणों के माध्यम से “फाइव एस” के पांच सिद्धांत—
- पुनर्व्यवस्था (Re-organise)
- सुव्यवस्थितता (Neatness)
- सफाई (Cleaning)
- मानकीकरण (Standardization)
- अनुशासन (Sustain)
को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इन सिद्धांतों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक व्यवस्थित, समय-संवेदनशील और तनावमुक्त बना सकता है।
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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ग्रुप एक्टिविटी, चर्चा सत्र और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से जोड़ा गया, जिससे उन्हें इन तकनीकों को घर और सोसाइटी स्तर पर लागू करने की स्पष्ट समझ मिली।
“काइज़ेन” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि यह जापान से उत्पन्न एक काइज़ेन है, जो छोटे-छोटे सुधारों के माध्यम से बड़े बदलाव लाने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों में छोटे सकारात्मक बदलाव करे, तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
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प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ व सुव्यवस्थित रखने के लिए इन सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प भी लिया।
यह कार्यक्रम न केवल औद्योगिक गुणवत्ता सुधार तक सीमित रहा, बल्कि सामाजिक स्तर पर स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हुआ।
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