
मेवाड़ की धरा पर साकार हुई केरल की परंपरा, सेवा और विश्वास के साथ जुड़ा गीतांजलि हॉस्पिटल
मेवाड़ में दिखा केरल के ओणम का रंग, संस्कृति के साथ स्वास्थ्य सेवा का भी जुड़ा संदेश
राजस्थान नायर सेवा समाज के ओणम समारोह में गीतांजली हॉस्पिटल से सेवा सहयोग
उदयपुर में अब सदस्यों और परिवारों को मिलेंगी स्वास्थ्य सेवाओं में विशेष रियायतें
ओणम साध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य प्रस्तुतियां रहे प्रमुख आकर्षण
गीतांजली हॉस्पिटल और राजस्थान नायर सेवा समाज के बीच हुआ टाई-अप
पहल का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाना
-माही राठौड़-
उदयपुर, dusrikhabar.com। मेवाड़ की धरती पर रविवार को केरल की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का खूबसूरत संगम देखने को मिला। राजस्थान नायर सेवा समाज, उदयपुर की ओर से सेक्टर-4 स्थित अमृता भवन में ओणम उत्सव 2026 का आयोजन किया गया। समारोह में समाज के सदस्यों और उनके परिवारों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान ओणम साध्या, सांस्कृतिक एवं नृत्य प्रस्तुतियों, छात्रवृत्ति वितरण सहित कई कार्यक्रम हुए। खास बात यह रही कि उत्सव ने सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ स्वास्थ्य सेवा को भी सामाजिक सरोकार से जोड़ा।
ओणम ने याद दिलाई अपनी जड़ों और साथ चलने की परंपरा
ओणम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामूहिक खुशियों, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। उदयपुर में आयोजित समारोह में भी यही भावना दिखाई दी। अलग-अलग पृष्ठभूमि से जुड़े समाज के लोग परिवार के साथ एकत्र हुए और केरल की पारंपरिक संस्कृति को करीब से महसूस किया।
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गीतांजली हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने समाज के सदस्यों और उनके परिवारजनों को ओणम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व आपसी सहयोग, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि समाज की जरूरतों को समझकर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना गीतांजली हॉस्पिटल की सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
समय पर जांच से उपचार की राह होती है आसान
गीतांजली हॉस्पिटल के सीईओ ऋषि कपूर ने कहा कि किसी बीमारी की समय पर पहचान और सही डायग्नोसिस उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल में आधुनिक रेडियोलॉजी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता है। उनके अनुसार राजस्थान नायर सेवा समाज के साथ किया गया यह सहयोग केवल एक औपचारिक समझौता नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है।
रेडियोलॉजी और आधुनिक जांच सुविधाओं की दी जानकारी
समारोह में गीतांजली हॉस्पिटल की ओर से शशिराज केनाथ ने समाज के सदस्यों को हॉस्पिटल में उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी दी। विशेष रूप से रेडियोलॉजी एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाओं के बारे में बताया गया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच तकनीकों की मदद से बीमारी की समय रहते और अधिक सटीक पहचान संभव होती है। इससे चिकित्सकों को मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की बेहतर रणनीति तैयार करने में सहायता मिलती है।
ओणम समारोह में हुआ स्वास्थ्य सेवा सहयोग का टाई-अप
समारोह का एक महत्वपूर्ण पहलू राजस्थान नायर सेवा समाज और गीतांजली हॉस्पिटल के बीच सेवा सहयोग के लिए हुआ टाई-अप रहा। इसके तहत समाज के सदस्यों और उनके परिवारजनों को गीतांजली हॉस्पिटल की विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में विशेष रियायत उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। इस पहल का सीधा लाभ समाज के उन परिवारों को मिल सकता है, जो आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सुविधाजनक और रियायती तरीके से लेना चाहते हैं।
संस्कृति से सेवा तक पहुंचा ओणम का संदेश
समारोह में मौजूद समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने गीतांजली हॉस्पिटल की इस पहल का स्वागत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल परंपराओं को निभाने का अवसर नहीं होते, बल्कि समाज को एक-दूसरे के करीब लाने और जरूरत के समय साथ खड़े होने का माध्यम भी बन सकते हैं। उदयपुर में मनाया गया ओणम उत्सव इसी भावना का उदाहरण बना, जहां केरल की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवा एक ही मंच पर दिखाई दी।
ओणम पर्व क्यों मनाया जाता है? परंपरा और महत्व
ओणम केरल का प्रमुख लोक-पर्व है, जिसे समृद्धि, फसल, खुशहाली और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह पर्व राजा महाबली के सम्मान में मनाया जाता है। कहा जाता है कि महाबली के शासन में केरल में सुख-समृद्धि थी। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर महाबली से तीन पग भूमि मांगी और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। मान्यता है कि वर्ष में एक बार महाबली अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आते हैं, इसी खुशी में ओणम मनाया जाता है।
ओणम की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध प्राचीन कृषि एवं फसल उत्सवों से भी जोड़ा जाता है। यह पर्व सामान्यतः 10 दिनों तक मनाया जाता है। घरों के बाहर पुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है, नए कपड़े पहने जाते हैं और केले के पत्ते पर ओणम सद्या का पारंपरिक भोज परोसा जाता है। नौका दौड़, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र होते हैं। ओणम का सबसे बड़ा संदेश प्रेम, समानता, परिवार और मिल-जुलकर खुशियां बांटने का है।
ओणम की असली खूबसूरती केवल उत्सव और परंपरा में नहीं, बल्कि उस भावना में है जिसमें समाज एक-दूसरे की खुशियों और जरूरतों में सहभागी बनता है। उदयपुर का यह आयोजन इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई दिया—जहां संस्कृति ने लोगों को जोड़ा और स्वास्थ्य सेवा ने इस जुड़ाव को सहयोग और संवेदनशीलता का नया अर्थ दिया।
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