
विश्व रक्तदान दिवस पर रक्तदाताओं-समाजसेवियों का गीतांजलि मेडिकल कॉलेज ने किया सम्मान…
विश्व रक्तदान दिवस पर गीतांजली मेडिकल कॉलेज में रक्तवीरों का हुआ सम्मान
75 रक्तदाताओं ने किया स्वैच्छिक रक्तदान, मानव सेवा को मिली नई शक्ति
युवाओं से नियमित रक्तदान की अपील, सुरक्षित रक्त उपलब्धता पर दिया गया जोर
संदीप बहल,
उदयपुर,dusrikhabar.com। रक्तदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसी मानवीय भावना को सम्मान देने और समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उदयपुर के ब्लड सेंटर द्वारा विश्व रक्तदान दिवस 2026 के अवसर पर विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में नियमित रक्तदाताओं, समाजसेवियों और रक्तदान अभियान से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। साथ ही 75 रक्तदाताओं ने स्वैच्छिक रक्तदान कर मानव सेवा के इस महाअभियान को नई मजबूती प्रदान की। समारोह ने यह संदेश दिया कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जो किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने का माध्यम बन सकता है।
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रक्तदाताओं के सम्मान के साथ मनाया गया विश्व रक्तदान दिवस
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ब्लड सेंटर द्वारा विश्व रक्तदान दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना और उन रक्तवीरों के योगदान को सम्मानित करना था, जो नियमित रूप से रक्तदान कर समाज में मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
कार्यक्रम में रक्तदान को जन आंदोलन बनाने और युवाओं को इससे जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त रक्त की उपलब्धता बेहद आवश्यक है, और यह तभी संभव है जब अधिक से अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं।

अतिथियों ने रक्तदान को बताया ‘महादान’, युवाओं से की नियमित रक्तदान की अपील
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की डीन डॉ. संगीता गुप्ता, सीईओ ऋषि कपूर, मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह, सीएफओ रोशन जैन, एचआर हेड डॉ. राजीव पंड्या तथा पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. गीता मुखिया उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में रक्तदान को ‘महादान’ बताते हुए कहा कि एक यूनिट रक्त कई लोगों का जीवन बचा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे नियमित रक्तदान को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं।
अतिथियों ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए रक्तदान ही वह माध्यम है जिसके जरिए गंभीर मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों, प्रसूता महिलाओं, थैलेसीमिया और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को समय पर जीवनदायी सहायता मिल पाती है।
रक्तदान का सबसे बड़ा संदेश
रक्तदान वह उपहार है जिसे न खरीदा जा सकता है और न बनाया जा सकता है। इसका एकमात्र स्रोत इंसान ही है। इसलिए जब कोई व्यक्ति रक्तदान करता है, तो वह वास्तव में किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में आशा, विश्वास और नई सुबह का संचार करता है।
आज यदि हम सभी स्वस्थ नागरिक वर्ष में कम से कम एक या दो बार रक्तदान करने का संकल्प लें, तो शायद किसी अस्पताल में किसी मरीज की जान केवल रक्त की कमी के कारण न जाए। यही विश्व रक्तदान दिवस का सबसे बड़ा संदेश और मानवता की सबसे सुंदर मिसाल है।
समाजसेवियों और रक्तवीरों का किया गया विशेष सम्मान
कार्यक्रम के दौरान उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने लंबे समय से रक्तदान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
इस अवसर पर रविन्द्र पाल सिंह (कप्पू जी), कमलेश आचार्य, गोपाल विजयवर्गीय, प्रह्लाद जणवा, मुकेश जणवा, मुकेश शर्मा, इस्लाम मोहम्मद शेख, महेश साहू, देवेन्द्र जी, प्रद्युम्न सिंह, कपिल शर्मा, रोहित जोशी, राकेश जी सहित अनेक रक्तदाताओं एवं समाजसेवियों का शॉल, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान-पत्र देकर अभिनंदन किया गया।
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सम्मानित किए गए रक्तदाताओं और समाजसेवियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रक्तदान का सुख किसी भी अन्य उपलब्धि से बड़ा होता है, क्योंकि इससे किसी व्यक्ति को नया जीवन मिलता है।
ब्लड सेंटर टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ब्लड सेंटर की पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ब्लड सेंटर की प्रभारी एवं मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा अवचार ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और रक्तदान अभियान को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। इसके अलावा ब्लड बैंक सुपरवाइजर सुरेन्द्र सिंह, तकनीकी स्टाफ सुनील रजक, इन्द्रजीत शर्मा तथा ब्लड सेंटर की समस्त टीम ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
सुरक्षित रक्त उपलब्धता में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका सबसे अहम
ब्लड सेंटर की ओर से बताया गया कि अस्पतालों में सुरक्षित और पर्याप्त रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन स्थितियों, दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, कैंसर उपचार, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी साबित होते हैं।
विश्व रक्तदान दिवस ऐसे सभी रक्तवीरों के प्रति आभार और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो बिना किसी स्वार्थ के नियमित रूप से रक्तदान कर अनगिनत लोगों को जीवनदान देने में सहयोग करते हैं।
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75 रक्तदाताओं ने किया स्वैच्छिक रक्तदान, समाज को दिया प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्वैच्छिक रक्तदान अभियान रहा, जिसमें कुल 75 रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए रक्तदान किया।
रक्तदाताओं के उत्साह और समर्पण ने यह साबित किया कि समाज में मानव सेवा और परोपकार की भावना आज भी जीवित है। रक्तदान शिविर में युवाओं, समाजसेवियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर दूसरों के जीवन की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
रक्तदान से जुड़े भ्रम और सच्चाई
भ्रम: रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है।
सच्चाई: स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान से कोई स्थायी कमजोरी नहीं होती। थोड़े आराम और पर्याप्त पानी-भोजन से व्यक्ति सामान्य दिनचर्या में लौट आता है।
भ्रम: बार-बार रक्तदान करना नुकसानदायक है।
सच्चाई: चिकित्सकीय मानकों के अनुसार निर्धारित अंतराल पर किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है।
भ्रम: केवल जरूरत पड़ने पर ही रक्तदान करना चाहिए।
सच्चाई: स्वैच्छिक और नियमित रक्तदान ही ब्लड बैंकों में पर्याप्त रक्त उपलब्ध कराता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाई जा सके।
कौन रक्तदान कर सकता है?
स्वस्थ व्यक्ति आसानी से रक्तदान कर सकता है। सामान्य तौर पर रक्तदान के लिए शर्तें आवश्यक है जैसे
- आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो।
- वजन कम से कम 45 से 50 किलोग्राम हो।
- हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो (आमतौर पर 12.5 ग्राम/डीएल या उससे अधिक)।
- व्यक्ति किसी गंभीर संक्रामक बीमारी से पीड़ित न हो।
- रक्तचाप और स्वास्थ्य स्थिति सामान्य हो।
- गर्भवती महिलाएं और हाल ही में प्रसव कराने वाली महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकतीं।
- चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टर की अनुमति आवश्यक होती है।
रक्तदान से पहले प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य जांच की जाती है ताकि दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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