जयपुर में 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल शिक्षा और नागरिक-केंद्रित शासन पर बना नया विजन

जयपुर में 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल शिक्षा और नागरिक-केंद्रित शासन पर बना नया विजन

29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस का समापन: AI से बदल रहा भारत का गवर्नेंस मॉडल

AI, स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल गवर्नेंस पर बना नया रोडमैप, जयपुर डिक्लेरेशन जारी

जयपुर डिक्लेरेशन जारी, 17 परियोजनाओं को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार

राजस्थान के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना

डिजिटल शिक्षा, डेटा आधारित नीति और नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर फोकस

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर में आयोजित 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस (NCeG 2026) का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, नीति निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट पुलिसिंग, नागरिक-केंद्रित शासन और डिजिटल शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया।

समापन समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “AI को केवल अपनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका बुद्धिमानी और जिम्मेदारी से उपयोग करना सबसे बड़ी चुनौती है। सम्मेलन के दौरान ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ जारी किया गया और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 भी वितरित किए गए।

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AI और डिजिटल गवर्नेंस से बदलेगा प्रशासनिक ढांचा

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में आयोजित समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्य करने वाली “फ्यूचरिस्टिक गवर्नमेंट” के रूप में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए सुशासन को और अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।

जयपुर में 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल शिक्षा और नागरिक-केंद्रित शासन पर बना नया विजन

29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल शिक्षा कई विषयों पर हुई चर्चा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रदेश के मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ रहे मौजूद।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने कई पुराने और अप्रासंगिक कानून समाप्त कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। मिशन कर्मयोगी और CPGRAMS जैसे प्लेटफॉर्म भारत के सुशासन मॉडल को वैश्विक पहचान दिला चुके हैं। मॉरीशस, मालदीव, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी भारत के ई-गवर्नेंस मॉडल को अपनाया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शासन में AI अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय हस्तक्षेप को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने राज्यों से भारत@2047 के लक्ष्य के साथ-साथ छोटे और मापनीय लक्ष्यों पर भी फोकस करने का आह्वान किया।

जिम्मेदार और समावेशी AI की दिशा में भारत आगे बढ़ रहा: राज्यवर्धन राठौड़

राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि भारत “जिम्मेदार और समावेशी AI” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में आए सुझावों और नवाचारों का अध्ययन कर उपयोगी मॉडलों को राज्य के विभिन्न जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा।

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ई-गवर्नेंस बना मैनेजिंग पॉसिबिलिटीज: वी श्रीनिवास

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि ई-गवर्नेंस अब केवल “मैनेजिंग सिस्टम” नहीं बल्कि “मैनेजिंग पॉसिबिलिटीज” बन चुका है। सम्मेलन में लगभग 200 विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए जबकि 100 से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन किया गया।

स्मार्ट पुलिसिंग में AI बना ‘फोर्स मल्टीप्लायर’

सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित प्लेनरी सेशन-4 ‘AI for Smart Policing and Public Safety’ में विशेषज्ञों ने स्मार्ट पुलिसिंग में AI की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। सत्र की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गोपेश अग्रवाल ने की।

गोपेश अग्रवाल ने कहा कि AI की मदद से पुलिसिंग अब रिएक्टिव से प्रिवेंटिव मॉडल की ओर बढ़ रही है। अपराध नियंत्रण, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि AI को मानव संसाधन का विकल्प नहीं बल्कि “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में देखा जाना चाहिए।

बीपीआरएंडडी के निदेशक डॉ. अमनदीप कपूर ने AI, ब्लॉकचेन, डेटा कंप्यूटिंग, CCTNS 2.0, ई-साक्ष्य, एजेंटिक AI और डार्क वेब जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि आधुनिक पुलिसिंग को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए स्वदेशी और जिम्मेदार AI विकसित करना आवश्यक है।

आंध्र प्रदेश के एलुरु के पुलिस अधीक्षक कोम्मी किशोर ने कहा कि पुलिसिंग में AI के बढ़ते उपयोग के दौरान संतुलित और चरणबद्ध तरीके से तकनीक को अपनाना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना उचित नियमन के AI आधारित नवाचार जोखिमपूर्ण हो सकते हैं और एल्गोरिद्मिक बायस से बचना आवश्यक है।

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सीडीटीआई हैदराबाद के निदेशक सलमान ताज ने कहा कि विभिन्न प्लेटफॉर्म पर मौजूद पुलिस डेटा को एकीकृत कर “डेटा फ्यूजन सेंटर” विकसित किए जाने चाहिए। इससे जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी बनेगी।

जयपुर में 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल शिक्षा और नागरिक-केंद्रित शासन पर बना नया विजन

29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस में प्लेनरी सेशन्स में विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए स्पीकर और और मौजूद प्रतिभागी।

नागरिक-केंद्रित शासन और डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर

प्लेनरी सेशन-5 ‘Citizen Centric Governance: Inclusive Governance’ में तकनीक के माध्यम से शासन को पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने पर चर्चा हुई।

राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्त करना है। उन्होंने “डिजि-वन” और “हरियालो राजस्थान मिशन” जैसी पहलों का उल्लेख किया, जहां QR कोड के माध्यम से पौधों की बुकिंग जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक राजन विशाल ने कहा कि बेहतर नीतियों के लिए विश्वसनीय डेटा बेहद जरूरी है। उन्होंने एग्रीस्टैक, IFMS और SHPP जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए बताया कि तकनीक के जरिए सेवाएं अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनी हैं।

आईटी एवं संचार विभाग के विशिष्ट सचिव हिमांशु गुप्ता ने ‘राजकाज’, ‘राजस्थान संपर्क पोर्टल’, ‘जन सूचना पोर्टल’ और ‘ई-मित्र’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान डिजिटल गवर्नेंस में तेजी से अग्रणी राज्य बन रहा है।

टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी ने कहा कि राज्य सरकार मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है, जिससे नागरिकों को सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने जन आधार, पोषण ट्रैकर और 181 हेल्पलाइन जैसी योजनाओं को नागरिक-केंद्रित शासन की मजबूत नींव बताया।

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वहीं प्लेनरी सेशन-6 में डिजिटल तकनीक के जरिए स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने पर चर्चा हुई। केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त विकास गुप्ता ने ‘समागम’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि AI आधारित मॉनिटरिंग से छात्रों की प्रगति और स्कूल प्रदर्शन की निगरानी की जा रही है।

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के CTO देबब्रत नायक ने APAAR ID और डिजिलॉकर की उपयोगिता पर जानकारी दी। गुजरात के जी-शाला प्लेटफॉर्म और हिमाचल प्रदेश के विद्या समीक्षा केंद्र जैसे मॉडलों को भी डिजिटल शिक्षा में प्रभावी बताया गया।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026: 17 नवाचारों को सम्मान

सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 भी प्रदान किए गए। सात श्रेणियों में कुल 17 परियोजनाओं और पहलों को सम्मानित किया गया, जिनमें 10 स्वर्ण, 6 रजत और 1 जूरी पुरस्कार शामिल रहे।

स्वर्ण पुरस्कार पाने वाली प्रमुख परियोजनाओं में कृषि मंत्रालय की एग्री स्टैक, ई-जागृति, महाकुंभ-2025, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा, केरल हाईकोर्ट की DCMS प्रणाली, ICMR-MINDS अध्ययन, ISRO अहमदाबाद की साइबर सुरक्षा परियोजना और बैंक ऑफ बड़ौदा का डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम शामिल रहे।

रजत पुरस्कार महाराष्ट्र, त्रिपुरा, उज्जैन और पंचायती राज मंत्रालय की विभिन्न परियोजनाओं को दिए गए, जबकि सर्वे ऑफ इंडिया को जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र और स्वर्ण पुरस्कार के लिए 10 लाख रुपये तथा रजत पुरस्कार के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

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