29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन: विकसित भारत@2047 की राह में स्मार्ट सिटी मॉडल बनेगा गेम चेंजर

29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन: विकसित भारत@2047 की राह में स्मार्ट सिटी मॉडल बनेगा गेम चेंजर

एआई और डिजिटल तकनीक से बदल रही सुशासन की तस्वीर

स्मार्ट सिटी से लेकर डिजिटल पंचायत तक, हर स्तर पर टेक्नोलॉजी का विस्तार

सुरक्षित डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा बनी सबसे बड़ी जरूरत

एग्रीस्टैक, ई-संजीवनी और त्रिनेत्र जैसे मॉडल बने आकर्षण का केंद्र

युवा, स्टार्टअप और नवाचार से विकसित भारत @2047 को मिलेगी नई गति

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर, dusrikhabar.com। 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में डिजिटल इंडिया, एआई आधारित सुशासन, स्मार्ट सिटी, साइबर सुरक्षा, ग्रामीण डिजिटलीकरण, स्टार्टअप नवाचार और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को विकसित भारत@2047 की आधारशिला बताया गया। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में आयोजित विभिन्न ब्रेकआउट सेशनों में देशभर से आए प्रशासनिक अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक लक्ष्य नहीं, बल्कि बेहतर और पारदर्शी सुशासन का माध्यम है।

सम्मेलन में स्मार्ट सिटी मॉडल, एआई आधारित सार्वजनिक सेवाएं, सुरक्षित डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, पंचायतों का डेटा आधारित डिजिटलीकरण, एग्रीस्टैक, ई-संजीवनी, डिजिटल हेल्थ सिस्टम, साइबर सुरक्षा और युवाओं की नवाचार आधारित भागीदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई, डेटा एनालिटिक्स, IoT, ब्लॉकचेन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भविष्य में सेवा वितरण को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे।

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सत्रों में यह भी रेखांकित किया गया कि 50 करोड़ से अधिक शहरी आबादी को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध करवाने, ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, सुरक्षित एआई इकोसिस्टम तैयार करने और युवाओं को रोजगार सृजक बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर तकनीक आधारित शासन मॉडल विकसित करना होगा। सम्मेलन में प्रस्तुत विभिन्न डिजिटल मॉडल और पुरस्कार विजेता पहलें इस बात का संकेत हैं कि भारत तेजी से डेटा-ड्रिवन, एआई-सक्षम और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस सिस्टम की ओर बढ़ रहा है।

ब्रेकआउट सेशन—1 विकसित भारत@2047 में स्मार्ट सिटी और एआई की भूमिका

इस सत्र में ‘ड्राइविंग अरबन ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू टेक्नोलॉजी’ विषय पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को मूलभूत सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एआई, डेटा एनालिटिक्स और इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म अनिवार्य हो चुके हैं।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • 2047 तक भारत की शहरी आबादी 90 करोड़ तक पहुंचने की संभावना।
  • नेशनल अरबन डिजिटल मिशन (NUDM) के तहत 27 सेवाओं का एकीकरण।
  • स्मार्ट सिटी में IoT सेंसर और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का उपयोग।
  • जयपुर सहित भविष्य के शहरों में वन-ऐप मोबिलिटी सिस्टम की परिकल्पना।
  • एआई आधारित डेटा विश्लेषण से पानी, ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार।
  • रिएक्टिव गवर्नेंस से प्रिडिक्टिव गवर्नेंस की ओर बढ़ता भारत।

सत्र का निष्कर्ष यह रहा कि भविष्य की स्मार्ट सिटी केवल डिजिटल नहीं, बल्कि डेटा-संचालित, नागरिक-केंद्रित और पूर्वानुमान आधारित शासन मॉडल पर आधारित होंगी। एआई और तकनीक प्रशासन को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाएंगे, लेकिन अंतिम लक्ष्य नागरिक सुविधा और सुशासन ही रहेगा।

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सेशन—2 सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के लिए एआई और साइबर सुरक्षा की आवश्यकता

‘एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेज’ विषय पर आयोजित इस सत्र में सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों पर चर्चा की गई।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • वेब 5.0 युग में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता।
  • सुरक्षित एआई के बिना विश्वसनीय ई-गवर्नेंस संभव नहीं।
  • डेटा एन्क्रिप्शन, एक्सेस मैनेजमेंट और डेटा प्राइवेसी पर विशेष जोर।
  • एआई के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर जोखिमों का व्यवस्थित आकलन जरूरी।
  • बदलते डिजिटल खतरों के अनुसार सुरक्षा तंत्र को लगातार अपडेट करने की आवश्यकता।

इस सत्र ने स्पष्ट किया कि डिजिटल इंडिया का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब एआई और डिजिटल सेवाओं के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए। डेटा सुरक्षा, विश्वसनीय एआई और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं।

सेशन—3 डिजिटल ग्राम पंचायतें और डेटा-आधारित विकेंद्रीकृत शासन

‘ग्रासरूट गवर्नेंस: डिजिटल डिसेंट्रलाइजेशन, डेटा-ड्रिवन’ सत्र में ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय डेटा के उपयोग से सुशासन को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • 2.5 लाख ग्राम पंचायतें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विकास योजनाएं बना रही हैं।
  • पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) से पंचायतों का मूल्यांकन।
  • व्हाट्सएप गवर्नेंस, ब्लॉकचेन प्रमाणपत्र और डिजिटल कर संग्रह जैसे नवाचार।
  • ई-ग्राम केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को सैकड़ों डिजिटल सेवाएं।
  • एआई आधारित बहुभाषीय सेवाओं और डेटा इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर।

सत्र का मुख्य संदेश रहा कि डिजिटल तकनीक ग्रामीण भारत को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सक्षम बना रही है। डेटा-आधारित विकेंद्रीकृत शासन विकसित भारत के लक्ष्य की मजबूत नींव बनेगा।

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सेशन—4 राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता मॉडल बने प्रेरणा

इस सत्र में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के स्वर्ण पुरस्कार विजेता मॉडलों का प्रस्तुतीकरण किया गया। विभिन्न परियोजनाओं ने तकनीक आधारित सुशासन के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) को ग्रामीण सुशासन का वैज्ञानिक मॉडल बताया गया।
  • उज्जैन का त्रिनेत्र एआई आधारित क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम चर्चा का केंद्र रहा।
  • ई-आरोग्य धामनी ने जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।
  • इसरो का एआई आधारित साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म साइबर हमलों से निपटने में प्रभावी साबित हुआ।
  • डिजिटल मॉडलों ने रियल टाइम मॉनिटरिंग और तेज निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा दिया।

सत्र ने यह साबित किया कि तकनीक आधारित नवाचार केवल प्रयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक परिवर्तन के सफल मॉडल बन चुके हैं। एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग सुशासन को नई दिशा दे रहे हैं।

सेशन—5 कृषि, स्वास्थ्य और महाकुंभ जैसे मॉडल बने डिजिटल इंडिया की मिसाल

इस सत्र में विभिन्न ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता पहलों के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य और बड़े आयोजनों में तकनीक के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • एग्रीस्टैक को कृषि क्षेत्र का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बताया गया।
  • एआई, सैटेलाइट डेटा और मौसम विश्लेषण से किसानों को व्यक्तिगत सलाह।
  • महाकुंभ 2025 में एआई आधारित भीड़ प्रबंधन और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम।
  • ई-संजीवनी और AI आधारित Clinical Decision Support System (CDSS) से टेलीमेडिसिन को नई दिशा।
  • आईसीएमआर माइंड्स के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण।

सत्र का निष्कर्ष रहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई अब केवल प्रशासन तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य और जन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। नागरिक-केंद्रित तकनीक ही भविष्य का सुशासन मॉडल बनेगी।

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सेशन—6 युवा, स्टार्टअप और एआई से बदलेगा सुशासन का भविष्य

‘एम्पावरिंग यूथ, एक्सेलरेटिंग इनोवेशन, ट्रांसफॉर्मिंग गवर्नेंस’ सत्र में युवाओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों की भूमिका पर चर्चा हुई।

सेशन के प्रमुख बिंदु: 

  • जस्थान सरकार द्वारा स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा।
  • ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए कोड चूरू, प्रगति लैब और डिजिटल सखी जैसी पहलें।
  • युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, रोजगार सृजित करने वाला बनाने पर जोर।
  • एआई आधारित समाधान से कृषि, शहरी विकास, पर्यटन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार।
  • डेटा सुरक्षा और एआई डेटा सेंटर की दिशा में कार्य।

अंतत: सत्र का मुख्य संदेश रहा कि विकसित भारत का भविष्य युवाओं के नवाचार और एआई आधारित समाधान पर निर्भर करेगा। स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी कौशल भारत के प्रशासनिक और आर्थिक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि भारत तेजी से एआई-सक्षम, डेटा-आधारित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की ओर बढ़ रहा है। आयोजन मेे संदेश दिया गया कि कैसे  तकनीक सुशासन का माध्यम है, लक्ष्य नहीं, एआई, डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म भविष्य के प्रशासन की रीढ़ बनेंगे ,सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम के बिना डिजिटल इंडिया अधूरा रहेगा, ग्राम पंचायतों से स्मार्ट सिटी तक डिजिटल परिवर्तन की नई लहर चल रही है  और युवा और स्टार्टअप भारत के डिजिटल भविष्य के मुख्य चालक होंगे।

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