
किशनगढ़ में वकील को थप्पड़ मारना DSP अंजू यादव को पड़ा भारी, APO; CM के निर्देश पर कार्रवाई
डीएसपी अंजू यादव APO, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय की कार्रवाई
रोड साइड खड़ी कार को लेकर अधिवक्ता-महिला पुलिस अधिकारी में हुई थी बहस
9 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर थप्पड़ मारने का वीडियो हुआ था वायरल
अजमेर में अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन, एसपी से मिलकर कार्रवाई की उठाई थी मांग
आखिर कौन पुलिस को इजाजत देता है आम जन को थप्पड़ मारने का ?
महावीर सिंह
अजमेर, dusrikhabar.com। राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारने के मामले में पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए डीएसपी मंजू यादव को एपीओ कर दिया है। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव को एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) किया गया है। सड़क किनारे खड़ी कार को लेकर शुरू हुआ विवाद पुलिस अधिकारी और अधिवक्ता के बीच टकराव में बदल गया था। घटना के बाद वकीलों ने विरोध प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग उठाई और अब पुलिस मुख्यालय के फैसले के बाद अधिवक्ताओं में संतोष देखने को मिला।
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सड़क किनारे खड़ी कार से शुरू हुआ विवाद, अधिवक्ताओं ने जताया विरोध
किशनगढ़ में 9 अक्टूबर को सड़क किनारे खड़ी कार को लेकर अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया और ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव के बीच कहासुनी हो गई थी। देखते ही देखते बहस ने विवाद का रूप ले लिया। इसी दौरान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अधिवक्ता को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई।
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। बड़ी संख्या में वकील पुराना रेलवे स्टेशन रोड स्थित यातायात चौकी पर पहुंचे और महिला अधिकारी के खिलाफ विरोध जताया। इसके बाद अधिवक्ता मुख्य चौराहे पर पहुंचे और जाम लगाकर अपना आक्रोश जाहिर किया।
मामले ने पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी। देर रात महिला अधिकारी की ओर से माफी मांगे जाने के बाद तत्काल विरोध शांत हुआ, लेकिन प्रकरण पर कार्रवाई की मांग बनी रही।
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सोशल मीडिया पर टिप्पणी से फिर बढ़ा विवाद
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ने लगा। वीडियो पर एक यूजर की टिप्पणी के जवाब में डीएसपी अंजू यादव की ओर से लिखा गया— “आदत है उड़ता तीर लेने की, दम रखते हैं उतना…” इस प्रतिक्रिया के बाद विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया।
हालांकि, अगले दिन अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया और महिला अधिकारी का एक वीडियो सामने आया। इसमें महिला अधिकारी की ओर से माफी मांगी गई। इसके बाद अधिवक्ता ने बार एसोसिएशन के सहयोग के लिए आभार जताया। माफी के बाद विरोध की तीव्रता कम हुई, लेकिन अधिवक्ता संगठन ने पुलिस विभाग से उचित कार्रवाई की मांग जारी रखी।
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अजमेर बार एसोसिएशन ने SP से मिलकर उठाया था मामला
मामले में माफी का वीडियो सामने आने के बावजूद अजमेर में अधिवक्ताओं ने सोमवार को प्रदर्शन किया था। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र ओझा के नेतृत्व में वकीलों ने जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल से मुलाकात की और डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।
अधिवक्ताओं का कहना था कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो, ताकि कानून के प्रति आम लोगों का भरोसा कायम रहे।
APO की कार्रवाई के बाद अधिवक्ताओं ने मनाया जश्न
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा डीएसपी अंजू यादव को APO किए जाने की कार्रवाई सामने आने पर अजमेर में अधिवक्ताओं ने खुशी जाहिर की। इस दौरान एडवोकेट राजीव भारद्वाज और राहुल भारद्वाज ने बार एसोसिएशन अध्यक्ष योगेंद्र ओझा को मिठाई खिलाई।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस अधिकारियों के व्यवहार, सार्वजनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के मामलों में संवेदनशीलता की जरूरत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मुख्यमंत्री ने क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने डीएसपी अंजू यादव को APO करने की कार्रवाई की।
यह मामला बताता है कि किसी विवाद में संयम, संवाद और जिम्मेदार व्यवहार कितना महत्वपूर्ण है। वर्दी हो या कानून की पैरवी करने वाला पेशा—सार्वजनिक जीवन में हर पक्ष से मर्यादा और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।
बहरहाल किशनगढ़ में तो डीएसपी मंजू यादव को अपने किए की सजा मिली लेकिन अब बड़ा सवाल ये उठता है कि पुलिस वालों को ये अधिकार कौनसा कानून देता है कि आम आदमी को बिना कारण गाली गलौच कर सके और थप्पड़ मार सके? मामले से जुड़े विषय विशेषज्ञ ने कहा कि:–ये तो अधिवक्ता थे और वीडियो वायरल हो गया तो कार्रवाई भी हो गई। लेकिन आम आदमी सड़कों पर पुलिस के इस तरह के दुर्व्यवहार का अक्सर शिकार होता है। क्या इस सबके लिए पुलिस अफसरों के लिए कानून में कोई सजा नहीं होनी चाहिए? अपराधी साबित होने पर रिमांड की तरह सड़क पर बर्ताव करने वाले पुलिस वालों पर होनी चाहिए सख्त कार्रवाई या नहीं यह तो कोर्ट तय करे और जनता लेकिन पुलिस वाले अगर मानवता अगर नहीं रखेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब पुलिस और आमजन के बीच बड़ी खाई पैदा हो जाएगी, पुलिस के जनसरोकार के कार्यों में जनता शामिल ही नहीं होगी।
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