
आभानेरी में छह माह में पहुंचे 80 हजार से ज्यादा पर्यटक, चांद बावड़ी के साथ लोककलाओं ने बढ़ाया आकर्षण
आभानेरी महोत्सव-2026 का आयोजन 12 और 13 अक्टूबर को
चांद बावड़ी और हर्षद माता मंदिर आभानेरी की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर
पद दंगल, कच्छी घोड़ी, बहरूपिया, नट कला और भपंग वादन प्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण
लाख की चूड़ियां, मिट्टी के बर्तन और लोहे के उत्पाद बनाने वाले कारीगरों करेंगे प्रदर्शन
कैमल कार्ट से ग्राम भ्रमण और नुक्कड़ नाटक भी महोत्सव का हिस्सा
राजस्थानी लोकसंस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना उद्देश्य
जनवरी से जून 2026 तक आभानेरी में दर्ज की गईं 80,181 पर्यटक यात्राएं
सोनिया
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और ग्रामीण संस्कृति को करीब से देखने की चाह देशी-विदेशी पर्यटकों को दौसा जिले के आभानेरी तक खींच रही है। यहां की विश्वप्रसिद्ध चांद बावड़ी, प्राचीन हर्षद माता मंदिर और राजस्थानी लोकपरंपराएं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसी विरासत को नई पहचान देने के लिए सोमवार को दो दिवसीय आभानेरी महोत्सव-2026 का आगाज हुआ। 12 और 13 अक्टूबर को आयोजित इस महोत्सव में लोककलाओं, पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन से जुड़ी गतिविधियों के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाया जा रहा है।
विरासत के साथ लोकसंस्कृति का संगम
राजस्थान पर्यटन विभाग और दौसा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि आभानेरी की जीवंत लोकसंस्कृति को भी पर्यटकों तक पहुंचाना है। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, आयोजन के माध्यम से क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक कलाओं को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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महोत्सव में देशी-विदेशी पर्यटकों को राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। वहीं, स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच मिल रहा है। इस तरह आभानेरी महोत्सव विरासत संरक्षण और स्थानीय हुनर को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पद दंगल से कठपुतली तक, लोककलाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां
महोत्सव में राजस्थान की पारंपरिक लोककलाओं ने सांस्कृतिक माहौल को खास बना दिया है। यहां पद दंगल, कच्छी घोड़ी नृत्य, बहरूपिया, नट कला, कठपुतली और भपंग वादन जैसी प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। शहनाई वादन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन का हिस्सा हैं।
लोककलाओं की प्रस्तुतियां सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जा रही हैं, जबकि शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हो रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटक राजस्थान की उन लोकपरंपराओं से रूबरू हो रहे हैं, जो पीढ़ियों से ग्रामीण जीवन और सामाजिक उत्सवों का हिस्सा रही हैं।
लाख की चूड़ियां, मिट्टी के बर्तन और लोहे के उत्पादों का हुनर
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण पारंपरिक हस्तशिल्प भी है। यहां लाख की चूड़ियां बनाने वाले लाखेरे, मिट्टी के बर्तन तैयार करने वाले कुम्हार और लोहे के उत्पाद बनाने वाले लोहार अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पर्यटक कारीगरों को काम करते हुए देखने के साथ लाख की चूड़ियां बनाने, कुम्हार के चाक पर मिट्टी को आकार देने और लोहे के उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से समझ रहे हैं। इन पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी भी की जा रही है।
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यह गतिविधि केवल पर्यटकों के मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और संभावित ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन का यह मेल स्थानीय हुनर को आगे बढ़ाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
कैमल कार्ट से गांव की सैर, नुक्कड़ नाटकों में दिखी ग्रामीण जिंदगी
आभानेरी महोत्सव में पर्यटकों को गांव के पारंपरिक परिवेश से परिचित कराने के लिए कैमल कार्ट से ग्राम भ्रमण की व्यवस्था भी आकर्षण का हिस्सा है। इसके जरिए सैलानी ग्रामीण वातावरण और स्थानीय जीवनशैली को करीब से देख सकते हैं।
वहीं, नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक विषयों और स्थानीय संस्कृति को प्रस्तुत किया जा रहा है। लोककलाओं, हस्तशिल्प और ग्राम भ्रमण जैसी गतिविधियां पर्यटकों को राजस्थान के ग्रामीण जीवन का ऐसा अनुभव देती हैं, जो केवल ऐतिहासिक इमारतों को देखने तक सीमित नहीं रहता।
इस तरह ग्रामीण पर्यटन के जरिए स्थानीय परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है।

आभानेरी में चांद बावड़ी के साथ लोककलाओं ने बढ़ाया आकर्षण
चांद बावड़ी और हर्षद माता मंदिर हैं आभानेरी की पहचान
दौसा जिले का आभानेरी अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां स्थित चांद बावड़ी अपनी अनूठी सीढ़ीनुमा संरचना और स्थापत्य शैली के कारण प्रसिद्ध है। बावड़ी की ज्यामितीय बनावट और गहराई इसे देखने आने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनाती है।
इसके समीप स्थित हर्षद माता मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये दोनों स्थल आभानेरी की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करते हैं और राजस्थान की प्राचीन स्थापत्य परंपरा से परिचित होने का अवसर देते हैं।
महोत्सव के दौरान इन ऐतिहासिक स्थलों के साथ लोककलाओं और ग्रामीण गतिविधियों को जोड़ने से पर्यटकों को आभानेरी को व्यापक रूप में समझने का अवसर मिल रहा है। इससे विरासत पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
आभानेरी महोत्सव से स्थानीय पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है दिशा
आभानेरी में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही स्थानीय स्तर पर नए अवसर पैदा करने की संभावना रखती है। जब पर्यटक ऐतिहासिक स्थलों के साथ हस्तशिल्प, लोककलाओं और ग्रामीण गतिविधियों में भी रुचि लेते हैं, तो इसका लाभ स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और पर्यटन से जुड़े लोगों तक पहुंच सकता है।
जनवरी से जून तक 80हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे आभानेरी
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच आभानेरी में कुल 80,181 पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें 44,140 घरेलू और 36,041 विदेशी पर्यटक यात्राएं शामिल हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि आभानेरी की ऐतिहासिक धरोहर देशी पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानियों को भी आकर्षित कर रही है। महोत्सव के जरिए इस रुचि को स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अवसर में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
आभानेरी महोत्सव-2026 इसी संभावना को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोजन के बाद भी स्थानीय शिल्पकारों को बाजार, लोककलाकारों को मंच और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं कितनी निरंतरता से मिलती हैं। यदि इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है, तो आभानेरी राजस्थान के प्रमुख विरासत और ग्रामीण पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।
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