जयपुर निकाय चुनाव के बाद सियासी हलचल तेज: 62.74% मतदान, फर्जी वोटिंग और EVM को लेकर हंगामा; BJP-कांग्रेस ने शुरू की पार्षदों को साधने की तैयारी

जयपुर निकाय चुनाव के बाद सियासी हलचल तेज: 62.74% मतदान, फर्जी वोटिंग और EVM को लेकर हंगामा; BJP-कांग्रेस ने शुरू की पार्षदों को साधने की तैयारी

मतदान खत्म होते ही बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, 14 सितंबर को खुलेगा जीत-हार का पिटारा

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 62.74% मतदान 

वार्ड 49, 101 और 62 में फर्जी मतदान के आरोप लगे

कई बूथों पर EVM में तकनीकी खराबी के कारण मतदाताओं को परेशानी 

वार्ड 114 में प्रत्याशियों के बीच विवाद और झड़प

भाजपा-कांग्रेस का संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर मंथन 

त्रिशंकु स्थिति बनने पर निर्दलीय पार्षद निभा सकते बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका 

विजय श्रीवास्तव/नवीन सक्सेना/माही राठौड़/सोनिया/संदीप/महावीर

जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों की नजर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई है। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 62.74 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दौरान जहां बुजुर्गों से लेकर Gen-Z और पहली बार वोट डालने वाले युवा उत्साह के साथ बूथों तक पहुंचे, वहीं कुछ केंद्रों पर फर्जी मतदान के आरोप, EVM में तकनीकी खराबी और प्रत्याशियों के बीच विवाद ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया।

मतदान समाप्त होते ही अब असली राजनीतिक गणित शुरू हो गया है। BJP और कांग्रेस दोनों संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। खासकर उन निकायों में, जहां बहुमत का आंकड़ा मामूली अंतर से तय हो सकता है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मतदान के दौरान कई बूथों पर हंगामा, फर्जी वोटिंग के आरोप

जयपुर के अलग-अलग वार्डों में मतदान के दौरान चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए। वार्ड 49, 101 और 62 में फर्जी मतदान के आरोप लगाए गए।

सांगानेर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 49 में कांग्रेस प्रत्याशी धर्म सिंह सिंघानिया ने आरोप लगाया कि कुछ मतदाता जब मतदान केंद्र पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर पहले ही वोट डाला जा चुका है। इसके बाद प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने मतदान केंद्र पर विरोध जताया।

इसी तरह वार्ड 101 के पानीपेंच वाटर वर्क्स बूथ पर निर्दलीय प्रत्याशी विष्णु ब्याणी के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर फर्जी वोटिंग के आरोप लगाए। वार्ड 62 के जगतपुरा-टीलावाला स्थित बूथ नंबर 23 पर भी कथित फर्जी मतदान को लेकर विवाद हुआ।

मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो मतदान केंद्र पर पहुंचने वाला प्रत्येक मतदाता अपने मत के अधिकार और उसकी गोपनीयता को लेकर आश्वस्त रहना चाहता है। ऐसे आरोप सामने आने पर स्वाभाविक रूप से मतदाताओं के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

EVM खराब होने से कई जगह मतदाता परेशान, कुछ समय रुका मतदान

मतदान के दौरान कुछ केंद्रों पर EVM की तकनीकी खराबी भी सामने आई। चुनाव से पहले मॉकपोल के दौरान वार्ड 149, 150 और 116 से 132 के बीच कई मशीनों में तकनीकी दिक्कत की सूचना मिली।

वार्ड 113 में कांवटिया का खुर्रा स्थित अग्रवाल धर्मशाला के मतदान केंद्र पर EVM खराब होने के बाद मतदाताओं में नाराजगी देखी गई। कुछ मतदाता वोट डाले बिना ही लौट गए।

ऐसी स्थिति में मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि वे अपना समय निकालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने पहुंचते हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से उन्हें इंतजार करना पड़ता है। मतदान व्यवस्था का सुचारु संचालन इसलिए जरूरी है, ताकि किसी मतदाता को अपने मताधिकार से वंचित महसूस न करना पड़े।

बूथ पर प्रत्याशियों में विवाद, झड़प के बाद पुलिस ने संभाला मामला

वार्ड 114 के एक मतदान केंद्र पर सुबह प्रत्याशियों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। एक निर्दलीय प्रत्याशी ने कांग्रेस प्रत्याशी को बूथ के अंदर से बाहर करने की मांग की। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।

वहीं वार्ड 26 के मंगलम सिटी गवर्मेंट स्कूल स्थित बूथ पर कांग्रेस एजेंट के नहीं बैठने को लेकर विवाद हुआ। कांग्रेस प्रत्याशी ने मतदान कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए और हंगामा किया।

बुजुर्गों से लेकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं तक दिखा उत्साह

जयपुर की चुनावी तस्वीर का एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि मतदान केंद्रों पर अलग-अलग आयु वर्ग के मतदाता नजर आए। बुजुर्ग मतदाताओं के साथ युवा और पहली बार मतदान करने वाले Gen-Z वोटर्स भी शहर की स्थानीय सरकार चुनने के लिए बूथों तक पहुंचे।

नगर निगम चुनाव का असर सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। सड़क, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और कॉलोनी की मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दे पार्षद के स्तर पर लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

इसी वजह से स्थानीय निकाय का चुनाव भले ही विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तुलना में छोटा दिखाई दे, लेकिन आम नागरिक के लिए इसका असर बेहद सीधा होता है।

CM से लेकर मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने भी डाला वोट

जयपुर में मतदान के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया और कांग्रेस नेता सचिन पायलट समेत कई नेताओं और अधिकारियों ने मतदान किया।

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने वार्ड 141 के पेंशन कार्यालय स्थित बूथ नंबर 10 पर मतदान किया और लोगों से नगर निकाय चुनाव में बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की।

वहीं खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि निकाय चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि स्थानीय स्तर पर पार्षद ही लोगों की बुनियादी जरूरतों और कॉलोनियों से जुड़े मुद्दों को उठाता है।

मतदान के बाद शुरू हुई ‘बाड़ेबंदी’ की तैयारी, BJP ने प्रत्याशियों से संपर्क बढ़ाया

मतदान समाप्त होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों ने संभावित विजयी पार्षदों को अपने साथ बनाए रखने की कवायद शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, BJP ने अपने प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर की जानकारी देना शुरू कर दिया है। जयपुर के प्रत्याशियों को अगले दिन दोपहर 12 बजे पार्टी मुख्यालय बुलाए जाने की बात सामने आई है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की तैयारियां किए जाने की जानकारी है।

उदयपुर समेत कई स्थानों पर भी प्रत्याशियों को प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एकजुट रखने की रणनीति पर काम होने की चर्चा है।

राजनीतिक दलों की चिंता का केंद्र यह है कि यदि किसी निकाय में बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं हुआ तो नतीजों के बाद पार्षदों की भूमिका अचानक बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

कांग्रेस भी सक्रिय, संभावित विजेताओं को एकजुट रखने पर मंथन

BJP की सक्रियता के बीच कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। पार्टी स्तर पर संभावित विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने और चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले समीकरणों पर चर्चा चल रही है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी बाड़ेबंदी को लेकर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व की नजर उन वार्डों और निकायों पर है जहां मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।

निर्दलीय प्रत्याशी बन सकते हैं ‘गेम चेंजर’

निकाय चुनाव के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय पार्षदों की संभावित भूमिका को लेकर है।

यदि किसी नगर निकाय में BJP या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों की नजर उन निर्दलीय प्रत्याशियों पर है, जिनके अपने वार्ड में मजबूत जनाधार की चर्चा है।

एक-एक सीट का अंतर कई निकायों में सत्ता का समीकरण बदल सकता है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने से पहले ही राजनीतिक संपर्कों और रणनीतिक गतिविधियों का बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

14 सितंबर को सामने आएगी शहर की सियासी तस्वीर

अब सभी की नजर 14 सितंबर की मतगणना पर है। उसी दिन यह स्पष्ट होगा कि जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में किस दल को कितनी सीटें मिलती हैं और कौन बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंचता है।

यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो सत्ता का रास्ता आसान होगा, लेकिन करीबी मुकाबले और निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी की स्थिति में नतीजों के बाद राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर तेज हो सकता है।

फिलहाल मतदाताओं ने अपना फैसला EVM में दर्ज कर दिया है। अब फैसला मशीनों से निकलने वाले परिणाम और उसके बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर है।

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