
एडीजे कोर्ट की अनूठी पहल; आवारा सांड की टक्कर से मौत पर परिवार को 61.35 लाख रुपये का मुआवजा…
जयपुर महानगर की एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित परिवार को बड़ी राहत
जयपुर हेरिटेज नगर निगम, जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव की संयुक्ति जिम्मेदारी तय
गिर्राज प्रसाद शर्मा के आश्रितों को 61.35 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश
आवारा पशुओं के प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर फिर ध्यान केंद्रित
माही राठौड़
जयपुर, dusrikhabar.com। जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या ने एक परिवार से उसका अपना छीन लिया। अब करीब चार साल बाद अदालत के फैसले से मृतक के आश्रितों को आर्थिक राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है। जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे-8 अदालत ने गिर्राज प्रसाद शर्मा की मौत के मामले में हेरिटेज नगर निगम, जयपुर जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव की संयुक्त जिम्मेदारी तय करते हुए 61.35 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। इस राशि पर 4 अप्रैल 2023 से 6 प्रतिशत साधारण ब्याज भी देना होगा।
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रामगढ़ मोड़ पर बस का इंतजार कर रहे थे गिर्राज प्रसाद शर्मा
मामला कुछ इस तरह से है कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 13 नवंबर 2022 को गिर्राज प्रसाद शर्मा जयपुर के रामगढ़ मोड़ पर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए एक आवारा सांड ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। इस हादसे में उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
गंभीर रूप से घायल गिर्राज प्रसाद को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। इधर इस घटना ने उनके परिवार को एक बड़े दुख के साथ आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच ला खड़ा कर दिया।
आश्रितों ने मांगा न्याय, अदालत ने तय की जवाबदेही
गिर्राज प्रसाद शर्मा की मौत के बाद उनकी आश्रित रेखा देवी ने क्षतिपूर्ति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में नगर निगम हेरिटेज, जयपुर जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव को पक्षकार बनाया गया।
मामले की सुनवाई के बाद एडीजे-8 अदालत ने संबंधित विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी निर्धारित की। अदालत ने निर्देश दिया कि मृतक के आश्रितों को 61.35 लाख रुपये का मुआवजा 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज सहित दिया जाए। ब्याज की गणना 4 अप्रैल 2023 से की जाएगी।
गौरतलब है कि यह फैसला उस परिवार के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे अपने मुखिया को खोने के बाद न्याय पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
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निगम ने उठाए सवाल, निजी फर्म को ठेका देने का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान नगर निगम हेरिटेज ने अपने बचाव में कहा कि गिर्राज प्रसाद शर्मा की मौत आवारा सांड की टक्कर से नहीं, बल्कि किसी वाहन की टक्कर से हुई थी। निगम ने यह भी दलील दी कि आवारा पशुओं को पकड़ने का काम एक निजी फर्म को ठेके पर दिया गया है, इसलिए क्षतिपूर्ति के दावे में निगम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में निर्णय दिया। पुलिस की रोजनामचा रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतक को आवारा सांड से टक्कर लगने के कारण गंभीर चोटें आने की बात सामने आई थी। अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मृतक की मौत और हादसे के बीच संबंध को स्वीकार किया।
आवारा पशुओं की समस्या पर फिर उठे जवाबदेही के सवाल
जयपुर सहित राजस्थान के कई शहरी इलाकों में आवारा पशुओं से सड़क सुरक्षा का खतरा आम लोगों के लिए चिंता का विषय रहा है। आए दिन सड़कों पर घूमते पशुओं के कारण पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य राहगीरों को दुर्घटना का सामना करना पड़ता है।
गिर्राज प्रसाद शर्मा की मौत से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला केवल मुआवजे तक सीमित महत्व नहीं रखता। यह स्थानीय निकायों और संबंधित प्रशासनिक विभागों की जिम्मेदारियों पर भी ध्यान आकर्षित करता है। निजी एजेंसी को ठेका देना अपने आप में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के महत्व को समाप्त नहीं करता।
बहरहाल इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि सड़क पर सुरक्षा की कमी के कारण किसी परिवार को अपूरणीय क्षति होने पर उसके आश्रितों को न्याय पाने का अधिकार है। साथ ही, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवारा पशुओं के प्रभावी प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी सामने आती है।
