भारत-यूके व्यापार समझौते की चमक: जयपुर से ब्रिटेन रवाना हुई पहली आभूषण खेप…

भारत-यूके व्यापार समझौते की चमक: जयपुर से ब्रिटेन रवाना हुई पहली आभूषण खेप…

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भारत-यूके व्यापार समझौते के तहत जयपुर से पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना

करीब एक करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के स्वर्ण, हीरा, चांदी और प्लेटिनम आभूषण भेजे गए

यूके में भारतीय आभूषणों पर 4% तक का आयात शुल्क समाप्त होगा

अगले तीन वर्षों में यूके को निर्यात 75.4 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना

राजस्थान के हजारों कारीगरों और ज्वेलरी उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,duarikhabar.com। जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के लिए बुधवार का दिन केवल एक निर्यात उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों जौहरियों, कारीगरों और आभूषण उद्योग से जुड़े परिवारों के भविष्य में नई उम्मीद जगाने वाला क्षण बन गया। भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CEPA) के तहत जयपुर से यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से रवाना हुई। करीब एक करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप के साथ राजस्थान के जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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जयपुर के आभूषण उद्योग को मिला वैश्विक बाजार का नया द्वार

भारत-यूके व्यापार समझौते के तहत रवाना हुई इस पहली खेप में स्वर्ण, हीरा जड़ित, चांदी और प्लेटिनम आभूषण शामिल हैं। इनका निर्यात द्वारका जेम्स, गैलेंट ज्वेलरी, विनायक ज्वेल्स और वैभव ग्लोबल जैसे प्रमुख निर्यातकों द्वारा किया गया।

यह सिर्फ आभूषणों की खेप नहीं, बल्कि जयपुर के उन हजारों कुशल कारीगरों की मेहनत और हुनर का सम्मान है, जिनकी कला अब दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचेगी।

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व्यापार समझौते से निर्यातकों और कारीगरों दोनों को होगा लाभ

खेप रवाना करने के अवसर पर आयोजित समारोह में नीरज दुबे, सुनीता वर्मा, जितेंद्र मीणा तथा जीजेईपीसी (GJEPC) राजस्थान क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग मौजूद रहे।

सीमा शुल्क आयुक्त आर.के. चंदन ने इसे भारत की निर्यात यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह पहल भविष्य में व्यापार को नई गति देगी।

वहीं जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने बताया कि भारत-यूके समझौते के लागू होने के बाद भारतीय आभूषणों पर यूके में लगने वाला 4 प्रतिशत तक का आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा, जिससे भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

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अगले तीन वर्षों में कई गुना बढ़ सकता है निर्यात

विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को मिलेगा।

प्रमुख अनुमान:

  • यूके को भारत का आभूषण निर्यात 75.4 करोड़ डॉलर से बढ़कर लगभग 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
  • जयपुर के हजारों कारीगरों, डिजाइनरों और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
  • विदेशी मुद्रा आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • राजस्थान की पारंपरिक ज्वेलरी कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान और बड़ा बाजार मिलेगा।

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कारीगरों के हाथों की कला अब दुनिया तक पहुंचेगी

जयपुर सदियों से रत्न, हीरा कटिंग, कुंदन, मीनाकारी और हस्तनिर्मित आभूषणों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है। अब भारत-यूके व्यापार समझौते के कारण स्थानीय उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी। इससे न केवल बड़े निर्यातकों बल्कि छोटे कारीगरों, डिजाइन स्टूडियो और पारिवारिक ज्वेलरी इकाइयों की आय बढ़ने की भी संभावना है। यह पहल “मेक इन इंडिया” और “लोकल टू ग्लोबल” की सोच को भी मजबूती देती है।

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