
विश्व की पहली होम्योपैथी यूनिवर्सिटी का दूसरा दीक्षान्त समारोह 16 जुलाई को, 760 विद्यार्थियों का सपनों से होगा साक्षात्कार…
होम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े होंगे मुख्य अतिथि
760 विद्यार्थियों को दी जाएंगी BHMS, MD (होम्योपैथी) और PhD की डिग्रियां
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव होंगे विशिष्ट अतिथि
जयपुर स्थित होम्योपैथी विश्वविद्यालय विश्व की पहली होम्योपैथी यूनिवर्सिटी
विश्वविद्यालय में जल्द ही फार्मेसी पाठ्यक्रम शुरू करने की भी तैयारी
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। वर्षों की मेहनत, अनगिनत परीक्षाओं और मरीजों की सेवा का सपना अब साकार होने जा रहा है। जयपुर स्थित विश्व की पहली होम्योपैथी यूनिवर्सिटी में 16 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले भव्य दीक्षांत समारोह में 760 विद्यार्थियों को बीएचएमएस, एमडी (होम्योपैथी) और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की जाएंगी। यह समारोह केवल डिग्रियां बांटने का अवसर नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नए डॉक्टरों के प्रवेश का उत्सव है। हालांकि, इस खुशी के बीच विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई है कि विश्वविद्यालय से पासआउट विद्यार्थियों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनकी शिक्षा और विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिल सके।
राज्यपाल और केंद्रीय आयुष मंत्री की मौजूदगी में होगा भव्य दीक्षांत समारोह
विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. के.सी. भिंडा ने बताया कि बी.एम. बिड़ला ऑडिटोरियम, स्टैच्यू सर्किल, जयपुर में सुबह 10:30 बजे आयोजित होने वाले समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव समारोह में शामिल होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद एवं शीर्ष प्राधिकरण प्रायोजक संस्था के अध्यक्ष डॉ. मनोज राजोरिया करेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन, डॉ. अमर सिंह शेखावत, विश्वविद्यालय प्रशासन, संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।
इसके अलावा विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. के.सी. भिंडा, अध्यक्ष डॉ. ए.एन. माथुर, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, अकादमिक परिषद, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।
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760 विद्यार्थियों को मिलेगी नई पहचान
इस वर्ष विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS), एम.डी. (होम्योपैथी) और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। कुल 760 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह दिन उन विद्यार्थियों के लिए जीवन का सबसे यादगार दिन होगा, जिन्होंने वर्षों तक चिकित्सा शिक्षा के कठिन सफर को पूरी लगन से पूरा किया।
विश्व की पहली होम्योपैथी यूनिवर्सिटी, जिसने रचा इतिहास
जयपुर के सांगानेर स्थित यह विश्वविद्यालय विश्व की पहली होम्योपैथी यूनिवर्सिटी होने का गौरव रखता है। इस संस्थान ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम की हैं—
- देश का पहला होम्योपैथी ग्रेजुएशन बैच यहीं से निकला।
- दुनिया में सबसे पहले होम्योपैथी एमडी (PG) पाठ्यक्रम की शुरुआत यहीं हुई।
- 2010 में कॉलेज से विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
- 2013 में पीएचडी कार्यक्रम शुरू किया गया।
- वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 700 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
- भविष्य में फार्मेसी पाठ्यक्रम भी शुरू करने की तैयारी चल रही है।

रोजगार भी उतना ही जरूरी जितनी डिग्री, सरकार से विशेष मांग
दीक्षांत समारोह से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि विश्वविद्यालय से पासआउट होने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जाएं। विश्वविद्यालय का मानना है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रशिक्षित होम्योपैथिक चिकित्सक तैयार हो रहे हैं, लेकिन सरकारी और संस्थागत स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित हैं। यदि आयुष क्षेत्र में नई भर्तियां, स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और होम्योपैथी सेवाओं को बढ़ावा दिया जाए, तो इन डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लाभ आम जनता तक पहुंच सकेगा।
डिग्री के बाद सबसे बड़ा सपना—सम्मानजनक रोजगार
हर विद्यार्थी के हाथ में मिलने वाली डिग्री के पीछे वर्षों का संघर्ष, माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का मार्गदर्शन छिपा होता है। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद सबसे बड़ी चिंता रोजगार की होती है।
760 नए डॉक्टर जब विश्वविद्यालय से निकलेंगे तो उनके सामने केवल करियर नहीं, बल्कि समाज की सेवा का दायित्व भी होगा। यदि इन्हें उचित रोजगार और अवसर मिलते हैं, तो ये प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए विश्वविद्यालय की यह मांग केवल विद्यार्थियों के भविष्य से नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने से भी जुड़ी हुई है।
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