
29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन: राजस्थान बनेगा AI और डेटा सेंटर निवेश का नया हब…
29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया शुभारंभ
43 हजार करोड़ से अधिक के डेटा सेंटर निवेश प्रस्ताव, AI हब बनने की ओर बढ़ा राजस्थान
स्टार्टअप्स को बड़ी राहत: सरकारी खरीद में अनुभव और न्यूनतम टर्नओवर की बाध्यता खत्म
राजस्थान लैंग्वेज मॉडल, स्मार्ट राजस्थान और ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा सहित कई डिजिटल पहलों का शुभारंभ
‘कलर्स ऑफ राजस्थान’ की सांस्कृतिक संध्या ने जीता दिल, लोक कला की शानदार प्रस्तुतियों से सम्मेलन का समापन
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,durikhabar.com। जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के पहले दिन डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स और नागरिक-केंद्रित तकनीकी सेवाओं को लेकर बड़े फैसले और व्यापक मंथन हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को AI एवं डेटा सेंटर निवेश का पसंदीदा राज्य बनाने का संकल्प दोहराते हुए बताया कि प्रदेश को 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक के डेटा सेंटर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया में अनुभव और न्यूनतम टर्नओवर की अनिवार्यता समाप्त करने की घोषणा की। इस दौरान राजस्थान लैंग्वेज मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन, स्मार्ट राजस्थान, राजस्थान इनोवेशन चैलेंज और ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा का शुभारंभ भी किया गया।
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डिजिटल इंडिया के विजन को राजस्थान देगा नई गति, AI और डेटा सेंटर पर बड़ा फोकस
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और जनकल्याण का सबसे प्रभावी माध्यम बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनधन, आधार, मोबाइल (JAM) और डीबीटी जैसी पहलों ने पारदर्शी शासन की नई संस्कृति स्थापित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राजस्थान AI-ML पॉलिसी 2026, AVGC-XR पॉलिसी तथा AI एवं क्वांटम कंप्यूटिंग मिशन लागू कर भविष्य की तकनीकों के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में राजस्थान संपर्क के जरिए हर महीने 2.5 से 3 लाख शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है और वे स्वयं भी शिकायतों की मॉनिटरिंग करते हैं।
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प्रमुख बातें:
- राजस्थान को डेटा सेंटर क्षेत्र में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले।
- राज्य सरकार स्टार्टअप्स के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया में अनुभव और न्यूनतम टर्नओवर की शर्त समाप्त करेगी।
- AI, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शासन का आधार बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में स्टार्टअप्स की संख्या 4 हजार से बढ़कर 8,500 से अधिक, निवेश 250 करोड़ से बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये तथा रोजगार 22 हजार से बढ़कर 47 हजार से अधिक हो गया है। राज्य में 9 इन्क्यूबेशन सेंटर, 65 लॉन्चपैड और 65 आई-स्टार्ट लॉन्चपैड नेस्ट स्थापित किए गए हैं, जिनसे 1.28 लाख से अधिक विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ा गया है।
डिजिटल कनेक्टिविटी के तहत 1,686 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, 3,200 से अधिक ग्राम पंचायतों में 12,500 हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन तथा 79 हजार से अधिक ई-मित्र कियोस्कों के माध्यम से 900 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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भर्ती प्रक्रियाओं में AI आधारित फोटो सत्यापन और ई-केवाईसी, साइबर सुरक्षा के लिए आधुनिक साइबर लैब एवं साइबर रेंज, तथा सार्वजनिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों में 25 हजार से अधिक निगरानी कैमरे स्थापित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के दौरान राजस्थान लैंग्वेज मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन, स्मार्ट राजस्थान परियोजना, राजस्थान इनोवेशन चैलेंज, ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा का शुभारंभ किया तथा डिजिटल राजस्थान कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इसके अलावा उन्होंने तकनीकी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा में निवेशकों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस और AI इन गवर्नेंस के माध्यम से तेज, बेहतर और अधिक प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा डेटा और AI भविष्य की सुशासन व्यवस्था की आधारशिला बनेंगे।
प्लेनरी सेशन1-2 : स्थानीय भाषा, AI और वॉइस टेक्नोलॉजी होंगे भविष्य के डिजिटल गवर्नेंस की पहचान
सम्मेलन के पहले दिन आयोजित दोनों प्लेनरी सत्रों में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सेवाएं और वॉइस-फर्स्ट तकनीक भविष्य के समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित शासन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं।
पहले सत्र “AI Based Governance for All” में विशेषज्ञों ने कहा कि सरकारी सेवाओं को आम नागरिक तक उसकी मातृभाषा में पहुंचाना ही वास्तविक डिजिटल समावेशन है। भाषिणी जैसे प्लेटफॉर्म, AI आधारित डेटा गवर्नेंस, न्यायिक अनुवाद, कृषि, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं में AI के उपयोग को भविष्य की दिशा बताया गया। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि भारत 60 लाख AI वर्कफोर्स, 2 लाख स्टार्टअप्स और वैश्विक AI क्षमता के साथ दुनिया की अग्रणी AI शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
दूसरे सत्र “Bridging Digital Divide – Voice First Solutions in Important Public Services” में विशेषज्ञों ने बताया कि वॉइस रिकग्निशन, मशीन ट्रांसलेशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसी तकनीकें सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और बहुभाषी बना रही हैं। CPGRAMS, समाधान दीदी, भाषिणी, ई-श्रम, यूनिफाइड पेंशन पोर्टल और ज्ञान भारतम् मिशन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म यह साबित कर रहे हैं कि AI आधारित वॉइस तकनीक डिजिटल डिवाइड को कम करने और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है।
प्रमुख निष्कर्ष:
- स्थानीय भाषा में AI आधारित सेवाएं डिजिटल समावेशन की कुंजी हैं।
- वॉइस-फर्स्ट टेक्नोलॉजी सरकारी सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
- AI आधारित डेटा गवर्नेंस, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन भविष्य की दिशा तय करेंगे।

“कलर्स ऑफ राजस्थान” में कला का प्रदर्शन करते कलाकार।
‘कलर्स ऑफ राजस्थान’ ने सम्मेलन को दिया सांस्कृतिक रंग, लोक संस्कृति ने जीता सभी का दिल
सम्मेलन के पहले दिन का समापन भव्य सांस्कृतिक संध्या “कलर्स ऑफ राजस्थान” के साथ हुआ। कलाकार अनिता प्रधान और उनकी टीम ने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुति देकर देशभर से आए प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में घूमर, चरी, भवाई, शिव स्तुति, मंजीरा और कथक की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों के प्रदर्शन पर उपस्थित अतिथियों और प्रतिनिधियों ने स्टैंडिंग ओवेशन देकर उनका उत्साहवर्धन किया। सांस्कृतिक संध्या में सम्मेलन के डेलिगेट्स, पुरस्कार विजेता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।
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